जिला अस्पताल में नहीं है डायरिया की दवा

अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी Updated Sun, 31 Jul 2016 12:32 AM IST
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करोड़ों रुपये की लागत से बना संयुक्त जिला चिकित्सालय मंझनपुर डॉक्टरों की मनमानी की भेंट चढ़ गया है। अस्पताल में एक महीने से डायरिया की दवा अर्थात ओआरएस पाउडर है ही नहीं। जबकि इन दिनों डायरिया का प्रकोप गांव-गांव बना हुआ है। इसके कारण रोजाना डायरिया से पीड़ित मरीज अस्पताल से बैरंग लौटने को मजबूर हैं। अस्पताल में छुट्टियों के दिनाें में डॉक्टर अक्सर गायब रहते है। जबकि डॉक्टरों के इंतजार में कक्ष के बाहर महिलाओं और परिसर में पेड़ के नीचे तमाम मरीज अपने तीमारदारों के साथ बैठे रहते हैं।
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डायरिया से पीड़ित अर्जुन प्रसाद पुत्र राम लाल निवासी कोतारी, रानी देवी पुत्री राम चंदर निवासी मौली, रंजना पुत्री फूलचंद्र निवासी मौली और सचिन पुत्र राम नारायण निवासी टेंगाई ने बताया कि अक्सर अस्पताल में बहुत कम ही डॉक्टर मौजूद रहते हैं। वहीं यदि शाम अथवा रात के समय किसी की दुर्घटना हो जाए या किसी की तबीयत बिगड़ जाए, तो इस अस्पताल में इमरजेंसी के अलावा कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं मिलता है। लोगों के मुताबिक डॉक्टर के साथ ही यहां इन दिनों डायरिया की दवा भी नहीं मिलती है। पीली, सफेद गोलियां देकर इलाज की सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। दवा और डॉक्टर नहीं मिलने से लोगों को झोलाछाप डाक्टरों के यहां जाने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।


बिना चादर के लिटा दिए जाते हैं मरीज
संयुक्त जिला चिकित्सालय मंझनपुर में डॉक्टरों, कर्मियों की ऐसी मनमानी है कि मरीजों को बिना चादर के सीधे बेड पर लिटा दिया जाता है। चादर बिछा भी रहता है तो इतना गंदा की उसमें से दुर्गंध आती रहती है। मरीज और तीमारदारों का आरोप है कि मांगने के बाद भी चादर उपलब्ध नहीं कराई जाती है।

वाटर कूलर भी है महीनों से खराब
दवा, डॉक्टर के साथ मरीजों को संयुक्त जिला चिकित्सालय मंझनपुर में पानी की किल्लत का भी सामना करना पड़ रहा है। लोगों की मानें तो अस्पताल परिसर में लगा वाटर कूलर महीनों से खराब पड़ा है। बिजली रहने पर सप्लाई के पानी से टंकी भर जाती है। चटकती धूप और भीषण गर्मी में यही उबलता पानी पीने को मिलता है। इससे लोग पीने के लिए बोतलबंद पानी लाने को मजबूर हैं।

मुख्यद्वार बन जाता है वाहन स्टैंड
संयुक्त जिला चिकित्सालय मंझनपुर का मुख्यद्वार वाहन स्टैंड बना रहता है। डॉक्टर, कर्मचारी से लेकर मरीज और उनके तीमारदारों के भी वाहन मुख्यगेट के सामने ही खड़े कर दिए जाते हैं। इससे अस्पताल में आने-जाने में लोगों को परेशानी होती है।

पीक दान बना अस्पताल का दरवाजा
जिला चिकित्सालय मंझनपुर में आने जाने वालों मरीजों के तीमारदारों पर अस्पताल परिसर में पान खाने पर प्रतिबंध लगाने वाला कोई जिम्मेदार नहीं है। तीमारदार बाहर से पान खा कर आते हैं और अस्पताल के अंदर ही दरवाजे पर थूंक देते है। अस्पताल परिसर में लगा सीसी टीवी कैमरा भी इन्हें नहीं पकड़ पा रहा है। अस्पताल में साफ-सफाई नहीं होने से पूरे परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।

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