घाघरा में समाए बाछेपारा के 30 घर, 40 पर कटान का खतरा

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 04 Aug 2021 01:20 AM IST
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धौरहरा। तहसील क्षेत्र के रमियाबेहड़ की ग्राम पंचायत भटपुरवा कलां के मजरा बाछेपारा में घाघरा नदी की विनाशलीला थमने का नाम नहीं ले रही है। नदी ने बीते एक सप्ताह में करीब 30 घरों को निगल लिया है और करीब 40 अन्य घर निशाने पर हैं। वहीं बाढ़ खंड हाथ पर हाथ धरे ग्रामीणों के घरों को नदी में समाता हुआ देख रहा है। बाढ़ कटान बचाव के नाम पर सिर्फ बोरियों में रोड़ा भरकर नदी के कटान को रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
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ग्रामीण अपने ही हाथों से बनाए आशियाने खुद तोड़कर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं। दूसरी ओर गोड़ियन पुरवा में भी घाघरा नदी कटान कर रही है। कई घर कटान की जद में हैं। बाछेपारा में घाघरा नदी ने अब तक बुधई, ओमप्रकाश, भगवानदीन, अशोक, सुरेंद्र, दिनेश, बाबू, दुलारे, सोहन, मुकेश, मौजीलाल, महेश, श्रीराम, भगीरथ, कपिल, सुरेश, भगौती, मनोज, बालगोविंद, गयाप्रसाद आदि के घरों को निगल लिया है। करीब 40 घर कटान की जद में है। वहीं बिंजहा, भटपुरवा, बांछेपारा के किसानों की सैकड़ों बीघा फसल भी नदी में समा गई है। घाघरा नदी के विकराल रूप को देखकर ग्रामीण सहमे हुए हैं और उन्हें कटान का खतरा सता रहा है। खून-पसीने की कमाई से बनाए आशियाने को वह स्वयं अपने हाथों से उजाड़कर सुरक्षित स्थान पर पलायन करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी ऐसे ही कटान करती रही तो कुछ समय में ही नदी बाछेपारा गांव का अस्तित्व मिटा देगी।

कटान रोकने के लिए शुरू की गई परियोजना घाघरा में बही
सिंचाई विभाग द्वारा बाछेपारा, भटपुरवा, बिन्जहा, धारीदासपुरवा सहित आसपास के गांवों को घाघरा नदी के कटान से बचाने के लिए शुरू की गई पांच करोड़, 18 लाख की परियोजना भी कटान की भेंट चढ़ गई। ग्रामीणों का आरोप है कि अगर बाढ़ खंड समय से परियोजना का काम पूरा कर लेता तो आज यह नौबत नहीं आती।
प्राथमिक विद्यालय में रह रहे कटान पीड़ित
बाछेपारा के कटान पीड़ितों को तहसील प्रशासन ने भटपुरवा के प्राथमिक विद्यालय में ठहरवाया है, कटान पीड़ित सामान लेकर विद्यालय में रह रहे हैं। तहसील प्रशासन इन्हें सुरक्षित बसाने के लिए जमीन की तलाश की कर रहा है।
घाघरा नदी का कटान रोकने का प्रयास बाढ़ खंड कर रहा है, लेखपाल को भेजकर कटान पीड़ितों का सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही उन्हें रहने के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।
- रेनू, एसडीएम धौरहरा

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