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डीटीआर ने स्मार्ट पेट्रोलिंग में देश के 50 टाइगर रिजर्व को पछाड़ा

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 27 Jul 2021 12:56 AM IST
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संपूर्ण लॉकडाउन 2020 के दौरान देश के 50 टाइगर रिजर्व में कराई गई थी स्मार्ट पेट्रोलिंग
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राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान ने जारी किए आंकड़े

लखीमपुर खीरी। संपूर्ण लॉकडाउन 2020 के दौरान देश के 50 टाइगर रिजर्व में की गई एम स्ट्राइप्स स्मार्ट पेट्रोलिंग में दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) को पहला स्थान मिला है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, दूसरे नंबर पर सिमिलीपाल (ओड़िशा) और तीसरे नंबर पर मेलघाट टाइगर (महाराष्ट्र) रिजर्व रहा है।
संपूर्ण लॉकडाउन 2020 में जब लोग अपने घरों में थे उस समय दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) समेत देश के 50 अन्य टाइगर रिजर्व के वनकर्मी बाघों और दूसरे वन्यजीवों को बचाने के लिए जंगल की स्मार्ट पेट्रोलिंग में जुटे थे। स्मार्ट पेट्रोलिंग की निगरानी दिल्ली में बैठे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और देहरादून में बैठे भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के अधिकारी कर रहे थे। एनटीसीए और डब्ल्यूआईआई के मुताबिक, मार्च और अप्रैल 2020 के दौरान की गई स्मार्ट पेट्रोलिंग में डीटीआर पहले स्थान पर रहा है।

जारी परिणामों के मुताबिक, डीटीआर में मार्च 2020 में 78000 किलोमीटर और अप्रैल 2020 में 79000 किलोमीटर एम स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग की गई है, जो कि इस दौरान देश के सभी 50 टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा है। दूसरे नंबर पर सिमिलीपाल और तीसरे नंबर पर मेलघाट टाइगर रिजर्व को स्थान मिला है।

एनटीसीए और डब्ल्यूआईआई ने चार साल पहले कराई थी स्मार्ट पेट्रोलिंग की शुरूआत

बाघों और दूसरे वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतवास को सुरक्षित रखने के लिए एनटीसीए और डब्ल्यूआईआई ने मिलकर करीब चार साल पहले स्मार्ट पेट्रोलिंग की शुरुआत देश के सभी टाइगर रिजर्व में कराई थी। शुरुआती दौर में जंगल के अंदर नेटवर्क मिलने में दिक्कतों के चलते कुछ परेशानी जरूर आई, लेकिन बाद में उन दिक्कतों को भी दूर कर लिया गया। शुरूआत से ही डीटीआर स्मार्ट पेट्रोलिंग में बेहतर माना जा रहा था।

कैसे होती है स्मार्ट पेट्रोलिंग

स्मार्ट पेट्रोलिंग के लिए एम स्ट्राइप्स एप तैयार किया है। जीपीएस सिस्टम से लैस यह एप पेट्रोलिंग टीम में शामिल वनकर्मियों, फील्ड अधिकारियों के मोबाइल पर लोड कर दिया गया है। इनके मोबाइल इस एप के जरिए वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के कंप्यूटर और मोबाइल से जुड़े रहते हैं। पेट्रोलिंग के दौरान एप खोलते ही वह जीपीएस से जुड़ जाता है। इससे यह पता चल जाता है कि कौन सी टीम कहां पर गश्त कर रही है। पेट्रोलिंग के दौरान पेट्रोलिंग का एक नक्शा भी साथ में बनता रहता है।

एम स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग से हैं कई फायदे

एम स्ट्राइप्स एप के जरिए टीम दिन भर में कितने किलोमीटर चली, कहां विश्राम किया सब कुछ रिकार्ड हो जाता है। इससे वनकर्मियों के गश्त के नाम पर ड्यूटी छोड़कर गायब होने की गुंजाइश नहीं रहती। गश्त के दौरान टीमें रास्ते में मिलने वाले दुर्लभ वन्यजीव की फोटो खींच कर अपलोड भी करते हैं। यदि कहीं कोई अवांछित गतिविधि दिखाई देती है तो उसकी सूचना भी एप के जारिए अपने अधिकारियों को दे सकते है। यदि कोई पेट्रोलिंग टीम कहीं मुसीबत में फंस जाती है तो इसकी सूचना भी अधिकारियों तक तत्काल पहुंच जाती है और समय पर उसे सहायता मिल जाती है। टाइगर रिजर्व प्रशासन को स्मार्ट पेट्रोलिंग की साप्ताहिक रिपोर्ट एनटीसीए और डब्ल्यूआईआई को भेजता है।

एनटीसीए और डब्ल्यूआईआई ने वर्ष 2020 के मार्च और अप्रैल की एम स्ट्राइप्स स्मार्ट पेट्रोलिंग का परिणाम घोषित किया है। इसमें दुधवा टाइगर रिजर्व देश के सभी 50 टाइगर रिजर्व में प्रथम स्थान पर रहा है। इसके लिए टाइगर रिजर्व के अधिकारी और कर्मचारी बधाई के पात्र हैं।- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व

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