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क्षेत्र के निर्धारण से पहले चल गईं निजी चीनी मिलें

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 22 Nov 2022 01:17 AM IST
Private sugar mills started before the determination of the area
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आदेश के अभाव में अनचाही चीनी मिलों को करना पड़ रहा है गन्ना सप्लाई

गन्ना सुरक्षण आदेश से तय होगा चिह्नित केंद्रों का किस मिल को हुआ आवंटन
लखीमपुर खीरी। जनपद की नौ चीनी मिलों में से निजी क्षेत्र की सात मिलों में नया पेराई सत्र 2022-23 शुरू हो गया है, बावजूद इसके अब तक गन्ना सुरक्षण आदेश जारी नहीं हुआ है। इससे किसानों को उन चीनी मिलों को भी गन्ने की सप्लाई देनी पड़ रही है, जिन्हें वह सप्लाई देना नहीं चाहते हैं।
जनपद में 3,48,677 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना उत्पादित है। गन्ना आपूर्ति के लिए सभी 12 किसान सहकारी गन्ना समितियों में करीब 5.54 लाख किसान पंजीकृत हैं। नया पेराई सत्र शुरू हो गया है, लेकिन अभी तक गन्ना सुरक्षण और गन्ना मूल्य दोनों ही घोषित नहीं हुए हैं। इससे किसानों में रोष है। कई चीनी मिलें नए स्थानों पर क्रय केंद्रों को खोलने की मांग कर रही हैं। वहीं, कई गांवों के किसान गन्ना मूल्य भुगतान देने में लेटलतीफी करने वाली चीनी मिलों की जगह जल्द भुगतान करने वाली दूसरी चीनी मिलों से उनका क्रय केंद्र जोड़ने की मांग रहे हैं। इसको लेकर किसान संगठनों ने जिला गन्ना अधिकारी से लेकर गन्ना आयुक्त तक ज्ञापन भी दिया था, लेकिन गन्ना सुरक्षण आदेश जारी न होने से उनकी मांगे खटाई में पड़ गई हैं। क्योंकि देर से भुगतान करने वाली मिलों ने भी पेराई सत्र प्रारंभ करके गन्ना खरीदना प्रारंभ कर दिया है, जिसमें बजाज ग्रुप की चीनी मिलें गोला, खंभारखेड़ा व पलिया हैं। बताते चलें कि सबसे ज्यादा गोला व खंभारखेड़ा मिलों के करीब दो दर्जन गन्ना क्रय केंद्र बदलने की मांग की जा चुकी है।

किसानों का लंबा होता जा रहा इंतजार
गोला निवासी किसान नेता श्रीकृष्ण वर्मा ने बताया कि उन्होंने गोला और खंभारखेड़ा मिल के करीब दो दर्जन क्रय केंद्र समिति बोर्ड से दूसरी चीनी मिल से जोड़ने का प्रस्ताव बनाकर जिला गन्ना अधिकारी को दे रखा है। गन्ना सुरक्षण आदेश नहीं होने से सैकड़ों किसान गन्ना आपूर्ति को लेकर परेशान हैं। सुरक्षण आदेश का इंतजार लंबा होता जा रहा है। समय पर गन्ना आपूर्ति नहीं होने से गेहूं बोवाई भी प्रभावित हो जाएगी।
चार सौ रुपये घोषित हो गन्ना मूल्य
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष अंजनी कुमार दीक्षित ने कहा कि सीजन शुरू हो गया है। अब सरकार को लागत देखते हुए चार सौ रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का भाव घोषित कर देना चाहिए। साथ ही भुगतान समय से कराया जाएं। इस बार मौसम की मार से गन्ना उत्पादन कम है, जबकि फसल में लागत ज्यादा आई है। सरकार को चाहिए कि किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा और फसल की लागत को देखते हुए उचित गन्ना मूल्य घोषित करना चाहिए।
गन्ना सुरक्षण की बैठक लखनऊ में चल रही है। लखीमपुर खीरी का नंबर अभी नहीं आया है। गन्ना सुरक्षण आदेश जारी होते ही गन्ना किसानों को इसकी जानकारी दी जाएगी।
- वेदप्रकाश सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
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