हिंदी को गौरवशाली बनाने के लिए घर से करें पहल

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 14 Sep 2021 12:57 AM IST
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बच्चों को शुरुआत से हिंदी बोलने और हिंदी में ही कामकाज की डलवाएं आदत
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लखीमपुर खीरी। हिंदी को उसका अपना गौरवशाली स्थान मिले इसके लिए शुरूआत अपने घर से ही करनी होगी। बच्चों को शुरुआत से हिंदी बोलने और हिंदी में कामकाज करने की आदत डलवाएं, लेकिन परेशानी यह है कि लोग अंग्रेजी को संभ्रांत लोगों की भाषा मान बैठे हैं। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे आज न तो ठीक से हिंदी लिख पाते हैं और न बोल पाते हैं। यह प्रवृति बदलनी चाहिए।
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हिंदी को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करना पड़े इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता। हिंदी हमारी मातृभाषा है इसे स्वाभाविक रूप से अपनाना और अंगीकार करना चाहिए। संपूर्ण भारत में पढ़ाई का माध्यम हिंदी होना चाहिए। अंग्रेजी या अन्य भाषाएं पाठ्यक्रम में विषय के रूप में शामिल हों तो अपने आप हिंदी जन जन की भाषा बनेगी। कितनी बड़ी विडंबना है कि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ने वाले हिंदी भाषी क्षेत्रों के बच्चे भी ठीक से हिंदी बोल और लिख तक नहीं पाते।

- डॉ. राम जानकी, शिक्षाविद एवं प्राचार्य गायत्री शक्तिपीठ, ऐरा
प्रशासन स्तर पर न सिर्फ प्रशासनिक कार्य अपितु न्यायालय के आदेश भी हिंदी भाषा में किए जाते हैं। प्रशासनिक व्यवस्था में पूर्व में अंग्रेजी और उर्दू का चलन ज्यादा था, लेकिन जैसे-जैसे हिंदी की लोकप्रियता बढ़ती गई प्रशासनिक कार्यों में इसका चलन भी बढ़ता गया। आज प्रशासनिक प्रणाली हिंदी के विकास में प्रत्यक्ष/परोक्ष रूप से सहयोग दे रही है। दिन प्रतिदिन शासन और प्रशासन की ओर से हिंदी को समृद्ध बनाने के बेहतर से बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं।
-अखिलेश यादव, एसडीएम गोला
हिंदी हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक है। हिंदी सरल, सहज, सुगम के साथ आत्मिक है और विज्ञान की कसौटी पर सबसे सिद्ध है। यह विश्व की तीसरी सबसे अधिक वाचिक भाषा के साथ अपने बोलने और चाहने वालों की ह्रदय हार भाषा है। हिन्दी आंग्ल भाषा से दोगुनी समृद्ध है आंग्ल भाषा की वर्णमाला में छब्बीस शब्द हैं तो अपनी हिन्दी भाषा बावन शब्द अर्थात आंग्ल भाषा से दोगुनी सामर्थ्यवान है। हिंदी को और अधिक समृद्घ और सर्वग्राही बनाने के लिए अपने घर से ही पहल करनी होगी।
- कनक तिवारी कवि/ साहित्यकसार
अंग्रेजी के बढ़ते चलन से हिंदी के प्रति लोगों में लगाव कम हुआ है। इसके लिए जरूरत है लोगों के हृदय में हिंदी के प्रति प्रेम जागृत करना। हम सभी को गर्व के साथ हिंदी बोलनी चाहिए। हिंदी भारतीय सभ्यता और संस्कृति की प्रतीक है। हिंदी से मुंह मोड़ने का मतलब अपनी सभ्यता और संस्कृति से मुंह मोड़ना है। जिस तरह मां सबको सबसे ज्यादा प्रिय होती है उसी तरह अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम होना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि हम बच्चों को हिंदी बोलने के लिए प्रेरित करें। भले ही वह अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में पढ़ रहे हों लेकिन उनका लगाव हिंदी से रहना चाहिए।
- शाबरीन बानो, हिंदी में शतप्रतिशत अंक पाने वाली छात्रा, महेवागंज

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