अब बन जाएगा पशुओं का ठिकाना

lalitpur Updated Wed, 24 Aug 2016 01:40 AM IST
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cattle - फोटो : demo pic
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ललितपुर। जमीन के अभाव में कांजी हाउस निर्माण का प्रस्ताव पांच महीनों से तैयार होने के बाद भी शासन को भेजने में विलंब हो रहा था। इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष ने डीएम से मुलाकात की। डीएम ने कांजी हाउस के निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराने के आश्वासन के साथ ही  प्रस्ताव भी शासन को भिजवा दिया है।
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शहर में आवारा घूम रहे पशुओं से शहरासियों को बहुत जल्द राहत मिल सकती है। कांजी हाउस के निर्माण के लिए शासन द्वारा कान्हा आश्रय पशु योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत शासन द्वारा केवल कांजी हाउस के निर्माण के लिए धनराशि आवंटित की जा रही है, जमीन की व्यवस्था के लिए नगरपालिका व जिला प्रशासन को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। नगरपालिका के पास जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण नगरपालिका ने जमीन उपलब्ध कराने का मामला जिला प्रशासन के पाले में डाल दिया  था। कांजी हाउस का निर्माण कराने के लिए प्रदेश सरकार की कान्हा आश्रय योजना पांच माह पहले मार्च माह से शुरू की गई है, इस योजना के तहत शासन ने अब तक कई नगर निकायों को कांजी हाउस के निर्माण के लिए बजट भी आवंटित कर दिया है। जिला प्रशासन द्वारा जमीन उपलब्ध नहीं कराने के कारण कांजी हाउस निर्माण का प्रस्ताव शासन में भेजने के लिए विलंब हो रहा था। स्थानीय अधिकारियों की लेटलतीफी के कारण पूर्व की अन्य योजनाओं की तहर शहर इस योजना के लाभ से भी वंचित न रहे, इस संबंध में अधिकारियों को सचेत करने के लिए अमर उजाला ने अपने 20 अगस्त के अंक में "जमीन के फेर में फंसा कांजी हाउस"  शीर्षक से इस समाचार को प्रमुख्ता से प्राकशित किया था। अमर उजाला की खबर का खासा असर देखने को मिला, समाचार का संज्ञान लेते हुए 20 अगस्त को ही नगरपालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने जमीन उपलब्ध कराने के संबंध में जिलाधिकारी डॉ. रुपेश कुमार से मुलाकात कर विचार-विमर्श किया। इस योजना का लाभ लेने के लिए कांजी हाउस निर्माण के  प्रस्ताव में विलंब न हो, इसके लिए जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से नगर पालिका द्वारा बनाया गया प्रस्ताव शासन में भिजवा दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि कांजी हाउस निर्माण के लिए शासन द्वारा बजट स्वीकृत होने के पहले ही नगर पालिका को पांच एकड़ जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी।




अमरपुर की जमीन प्राथमिकता में
जिलाधिकारी ने जमीन उपलब्ध कराने के लिए सदर उपजिलाधिकारी रमेशचंद्र तिवारी को जमीन तलाश करने की जिम्मेदारी सौंप दी है। शासनादेश के अनुसार कांजी हाउस के निर्माण के लिए जिला प्रशासन नगरपालिका को जमीन मुफ्त में उपलब्ध कराएगा। कांजी हाउस के निर्माण के लिए जिला  मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित ग्राम अमरपुर की जमीन को प्राथमिकता में लिया जा रहा है। नगरपालिका ने इस जमीन पर कांजी हाउस  निर्माण के लिए जिलाधिकारी को लिखित में प्रस्ताव देकर स्वीकृति भी मांगी हैं। ग्राम अमरपुर में स्थित ग्राम सभा की उक्त दस एकड़ जमीन पहले नगर पालिका को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के निर्माण के लिए मुफ्त में आवंटित की गई थी, लेकिन तकनीकी व विभागीय कारणों की वजह से अब यहां पर सॉलिड वेस्ट मेंनेजमेंट प्लांट का निर्माण नहीं किया जाना है। इसलिए नगर पालिका ने इस जमीन पर कांजी हाउस के निर्माण के लिए जिलाधिकारी से स्वीकृति मांगी है।


बायोगैस प्लांट भी बनेगा
नगर पालिका ने कांजी हाउस निर्माण के लिए 3.49 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजा है। कांजी हाउस में पशुओं के रहने के  लिए अलग-अलग शेड बनाए जाएंगे। पेयजल के लिए भी उचित व्यवस्था की जाएगी, ताकि गर्मी के मौसम में पेयजल की समस्या खड़ी न हो। बिजली की समस्या न हो इसके लिए सौर ऊर्जा प्लांट का निर्माण कराया जाएगा। जानवरों का भूसा रखने के लिए भंडारण कक्ष का निर्माण, कार्मिकों के रहने के लिए कक्ष व  कार्यालय का निर्माण कांजी हाउस परिसर में ही किया जाएगा। पशुओं के गोबर के निस्तारण के लिए परिसर में बायो गैस  प्लांट भी लगाया जाएगा, इस प्लांट से गोबर का निस्तारण होगा और कांजी हाउस के रखरखाव के लिए कुछ आय स्रोत भी बनेगा।
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 पशु निस्तारण के सख्त नियम होंगे लागू
 शासनादेश के अनुसार कांजी हाउस में  पकड़कर रखे गए जानवरों के निस्तारण की कान्हा पशु आश्रय योजना में समुचित  व्यवस्था की जाएगी। दुधारू पशुओं को छोड़कर अन्य पशुओं को कृषि कार्य के लिए डीएम द्वारा नीलाम किया जा सकता है। इसके लिए कृषकों से 100 रुपये के बांड पेपर व शपथ पत्र लेने के बाद ही पशुओं की सुपुर्दगी की जाएगी। पशुओं  को ले जाने वाले कृषकों का पूर्ण विवरण पृथक रजिस्टर पर रखा जाएगा। पशुओं की नीलामी के दौरान इस बात की खोजबीन की जाएगी कि पशु व्यापारी के  विरुद्ध किसी अवैध पशुवध के मामले में, पशु क्रूरता के मामले में या अवैध पशु परिवहन के मामले में मुकदमा पंजीकृत तो नहीं है और उसकी सामाजिक ख्याति अच्छी हो। इन बातों पर शर्त के आधार पर शपथ पत्र लेने बाद  ही पशुओं को सौंपा जाएगा। इसके अलावा पशुओं के क्रय करने के बाद व्यापारी को  यह भी बताना होगा कि वह पशुओं का क्रय किस उपयोग के लिए कर रहा है। इसके  बाद ही जिला प्रशासन के स्तर से निर्धारित शुल्क लेकर पशु परिवहन हेतु  लाइसेंस जारी किया जा जाएगा।
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इनका कहना है
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जिलाधिकारी द्वारा कांजी हाउस के निर्माण के लिए पांच एकड़ का आश्वासन दिया गया है। जमीन उपलब्ध कराने के लिए विभागीय कार्रवाई जरूरी है, जिसको पूरा करने की शुरुआत कर दी गई है। कांजी हाउस के निर्माण के लिए जल्द ही नगरपालिका को जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी।
रमेश चंद्र तिवारी, सदर उपजिलाधिकारी ।

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