उत्तर प्रदेश में वेटरनेरी कोर्सेज की सीट बढ़ाने की आवश्यकता : डॉ. बालियान

Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2020 07:39 PM IST
मथुरा। वेटरनरी विश्वविद्यालय में आयोजित सेमिनार में मंचासीन केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, उत?
मथुरा। वेटरनरी विश्वविद्यालय में आयोजित सेमिनार में मंचासीन केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, उत? - फोटो : MATHURA
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मथुरा। वेटरनेरी यूनिवर्सिटी में पशु चिकित्सा विभाग द्वारा कुक्कुट विकास एवं किसानों की आय दोगुना करने संबंधी सेमिनार को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वेटरनेरी कोर्सेज की सीट बढ़ाने की आवश्यकता है। पशु चिकित्सक अपने को किसी भी दृष्टि में कम न समझें।
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बृहस्पतिवार को वेटरनेरी यूनिवर्सिटी के सभागार में आयोजित सेमीनार और उत्तर प्रदेश पशुचिकित्सा संघ की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री मत्स्य, पशुधन एवं डेयरी डा. संजीव बालियान ने कहा कि पशुचिकित्सकों की अनेक समस्याओं की जानकारी उन्हें मिली है। कोशिश करेंगे कि मुख्यमंत्री के स्तर से इनका समाधान कराया जाए। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री मत्स्य, पशुधन एवं डेयरी चौधरी लक्ष्मीनारायण ने कहा कि देश का विकास किसान से ही संभव है और किसान की आय दोगुनी पशुपालन से हो सकती है। पशुपालन के लिए पशुचिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम में प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. श्यामनंदन सिंह, पशु चिकित्सा परिषद के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक डॉ. डीसी वर्मा, यूपी वेटरनेरी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. केएमएल पाठक एवं भारतीय पशु चिकित्सा संघ के अध्यक्ष डॉ. उमेश शर्मा ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो जीके सिंह ने की।
इस दौरान संघ की नवीन कार्यकारिणी में अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शुक्ला, महामंत्री डॉ. संजीव सिंह चौटाला, कोषाध्यक्ष डॉ. विनय राजपूत, उपाध्यक्ष डॉ. आशीष सिंह एवं संयुक्त मंत्री डॉ. दिग्विजय यादव ने शपथ ली। इस दौरान संघ ने शासन के समक्ष अपनी मांगें उठाईं। इनमें पशु चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग का नामकरण करने सहित डायनैमिक एसीपी, एनपीए, आपातकालीन एवं टैक्नीकल सेवा घोषित करने, अस्थायी गो आश्रय स्थलों पर अलग स्टाफ की व्यवस्था, मेडिकल के समकक्ष पीजी एवं पीएचडी एलाउंस देने आदि मांग शामिल थी। इसमें प्रदेश के 75 जिलों से पशु चिकित्साविदों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में निदेशक डॉ. एसके श्रीवास्तव, अपर निदेशक डॉ. एसके मलिक, डॉ. बी गोयल, डॉ. केके सारस्वत, डॉ. कपिलेश वार्ष्णेय, डॉ. अंशुल अग्रवाल, डॉ. नेहा गुप्ता, डॉ. रवींद्र चौधरी, डॉ. सतवीर सिंह, डॉ. पुनीत वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे।

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