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लक्ष्मण के मूर्छित हो ने पर भावुक हुए दर्शक

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 Oct 2022 11:15 PM IST
अमिला कस्बे में चल रहे श्री ठाकुर द्वारा रामलीला समिति के तत्वाधान में रामलीला का मंचन करते कलाक?
अमिला कस्बे में चल रहे श्री ठाकुर द्वारा रामलीला समिति के तत्वाधान में रामलीला का मंचन करते कलाक? - फोटो : MAU
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मऊ। श्री रामलीला मेला समिति की ओर से नगर में चल रही रामलीला में रामेश्वर से लंकापुरी दशई पोखरा पर विभीषण शरणागत, सेतुबंधन, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, कुंभकर्ण वध सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। कुंभकर्ण वध होते ही जहां लोगों ने जयश्रीराम के जयकारे लगाए तो वहीं लक्ष्मण के मूर्छित होने से भावुक हो उठे। नगर के रेलवे मैदान में चल रही रामलीला में लक्ष्मण शक्ति तथा कुंभकर्ण वध का मंचन किया गया। मेघनाथ के बाण चलाने पर लक्ष्मण के मूर्छित हो जाने पर दर्शकों की आंखे नम हो गई। वहीं सुषेन वैद्य द्वारा बूटी पिलाते ही लक्ष्मण उठ जाते हैं। बाद में लक्ष्मण और मेघनाद युद्ध में मेघनाद मारा जाता है। रामलीला में रावण द्वारा अपने भाई विभीषण को लात मारकर लंका से निकाल देता है। विभीषण भगवान राम की शरण में जाता है। भगवान राम द्वारा समुद्र में सेतु बनाने की योजना बनायी जाता है। श्रीराम समुद्र से रास्ता मांगने की आराधना करते हैं। आराधना करते तीन दिन बीत जाने के बाद जब समुद्र रास्ता नहीं देता है तो श्रीराम लक्ष्मण से धनुष और बाण लाने को कहते है। जैसे ही श्रीराम धनुष की प्रत्यंचा पर बाण चढ़ाते है, समुद्र में उथल-पुथल मच जाती है। इसके बाद मेघनाथ-लक्ष्मण युद्ध का मंचन किया गया। मेघनाथ द्वारा शक्तिबाण चलाकर लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया जाता है। सुषेन वैद्य द्वारा बूटी पिलाते ही लक्ष्मण जीवित हो उठते हैं। फिर लक्ष्मण-मेघनाथ युद्ध शुरू होता है। मेघनाथ वध होते ही पूरा पंडाल एक बार फिर जयश्रीराम के जयकारे से गूंज उठता है। इसके बाद भगवान राम कुंभकर्ण का वध करते हैं। अमिला : श्री ठाकुर द्वारा रामलीला समिति के तत्वावधान में कस्बे में चल रही रामलीला में अंगद रावण संवाद, विभीषण शरणागत सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। विभीषण द्वारा रावण को समझाने पर प्रभु श्रीराम से बैर त्याग सीता जी को वापस कर दे। रावण द्वारा विभीषण को लात मार कर सभा से बाहर जाने को कहा गया। इस पर विभीषण राम के शरण में आ गए। राम व विभीषण का संवाद सुनकर दर्शक भावविभोर हो गए। राम, सुग्रीव, विभीषण, जामवंत, हनुमान आदि द्वारा विचार विमर्श के बाद अंगद को शांति का प्रस्ताव के साथ रावण के पास भेजा गया। लंका पहुचकर अंगद द्वारा रावण को समझाने का प्रयास किया गया, परंतु रावण ने शांति का प्रस्ताव को ठुकरा दिया। संवाद

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