अमर उजाला एक्स्क्लूसिव: 35 साल से तय नहीं हो पाई हस्तिनापुर सेंक्चुरी की सीमा, वन विभाग की उदासीन

सचिन त्यागी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 04 Mar 2021 12:51 PM IST

सार

  • एनजीटी में याचिका दायर करने के बावजूद वन विभाग की उदासीनता बरकरार
बारहसिंहा
बारहसिंहा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दुनियाभर में लुप्त हो रही वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए तीन मार्च को विश्व वन्य जीव दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा हर साल अलग-अलग थीम पर दिवस को मनाता है।
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बावजूद इसके भारत में वन्य जीवों की फिक्र ही नहीं की जाती है। जिले में 35 साल पहले बनी हस्तिनापुर सेंक्चुरी की चहारदीवारी तय न हो पाना इसका प्रमाण है। चहारदीवारी तय न होने यहां मौजूद बारहसिंघा और तेंदुओं समेत अन्य वन्य जीवों का जीवन आए दिन संकट में पड़ रहा है।


1986 में गंगा नदी के दोनों तटों पर अवस्थित खादर मैदानों एवं खोला पहाड़ियों को मिलाकर 2073 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल को हस्तिनापुर वन्य जीव विहार के रूप में संरक्षित करने का निर्णय लिया गया था। धारा 18 ए के तहत वन विभाग की तरफ से सेंक्चुरी के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई थी। इसके बाद धारा 26 ए की कार्रवाई पूरी कर अंतिम अधिसूचना जारी नहीं की गई।

मामले में दो साल पहले राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में याचिका दायर गई थी। इसमें कहा गया कि हस्तिनापुर वन अभयारण्य क्षेत्र में मेरठ के साथ ही बिजनौर और अमरोहा जिले की सीमा लगती है। सरकार की ओर से अधिसूचना में देर किए जाने से अभयारण्य के अंतर्गत बिजनौर और चांदपुर शहर विकसित हो गए। वन विभाग द्वारा विकास कार्यों, रिहायशी इलाकों के विस्तार और औद्योगिक गतिविधियों पर रोक नहीं लगाने से विभिन्न प्रजाति के हिरण खतरे में पड़ रहे हैं। इसके बाद भी अंतिम अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

सर्वे में मिले थे 25 से अधिक बारहसिंघा  
वन विभाग और वन्य जंतु विभाग ने बारहसिंघा को लेकर सेंक्चुअरि क्षेत्र में सर्वेक्षण कराया गया था। सर्वे में बारहसिंघा का रहवास गंगा किनारे के अलावा उन इलाकों में भी मिला, जहां पास में आबादी है। कहीं-कहीं जंगल में भी रहवास मिला। 25 से अधिक बारहसिंघा चिह्नित किए गए थे।

लगातार बढ़ रही तेंदुओं की भी संख्या  
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में सात तेंदुए चिह्नित किए जा चुके हैं। यहां फिशिंग कैट, काला हिरन, शूकर हिरन, पाड़ा, नपरोज, सांभर, चीतल, सियार, मोर, नील गाय, जंगली बिल्ली, बिज्जू, सेही, गोह समेत सैकड़ों प्रजाति के पक्षी हैं। यही नहीं, गंगा में डॉल्फिन, घड़ियाल और कछुओं की कई प्रजातियां भी हैं।

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