राकेश टिकैत की चेतावनी : 2022 विधानसभा चुनाव में सरकार को सबक सिखाएंगे किसान, ऐसे मजबूत होगा आंदोलन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 19 Jun 2021 06:35 PM IST

सार

राकेश टिकैत ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार गूंगी व बहरी हो चुकी है। सरकार को किसान हित की कोई चिंता नहीं है।
सिवाया टोल पर धरने में पहुंचकर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते राकेश टिकैत
सिवाया टोल पर धरने में पहुंचकर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते राकेश टिकैत - फोटो : amar ujala
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विस्तार

मेरठ के सिवाया टोल प्लाजा पर कृषि कानून के विरोध में चल रहे भाकियू के धरने के 25वें दिन भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत कार्यकर्ताओं को संबोधित करने पहुंचे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव- गांव जाकर किसानों से संपर्क कर आंदोलन को मजबूत बनाने के निर्देश दिए। साथ ही मेरठ के एक अस्पताल पर प्रशासनिक कार्रवाई न होने पर सील लगाने की चेतावनी दी।
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कृषि कानून के विरोध में सिवाया टोल प्लाजा पर पिछले 25 दिन से धरना चल रहा है। किसान व कार्यकर्ता बारिश में भी धरने पर डटे हुए हैं। शनिवार को भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत गाजीपुर बॉर्डर से छुर्र गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे।


शादी समारोह से लौटते समय वह कुछ देर टोल प्लाजा पर रुके। राकेश टिकैत के टोल पर पहुंचने के बाद कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

राकेश टिकैत ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार गूंगी व बहरी हो चुकी है। सरकार को किसान हित की कोई चिंता नहीं है। सरकार में बैठे नुमाइंदे खुद को किसान हितैशी बताते हैं। जबकि, सत्ता में बैठे किसी भी जनप्रतिनिधि ने कृषि कानून का विरोध नहीं किया।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि अब आंदोलन में ओर तेजी लानी होगी। इसके लिए कार्यकर्ता गांव गांव जाकर किसानों से संपर्क साधे और अधिक से अधिक संख्या में धरना स्थल पर पहु्ंचने की अपील करें। उन्होंने धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया और धरना जारी रखने के निर्देश दिए।

बता दें कि आंदोलन को मजबूती देने के लिए अब नई रणनीति बनाई गई है। अब आंदोलन को मजबूती देने के लिए हर एक गांव का दिल्ली बॉर्डर पर कैंप लगाया जाएगाए जिसमें बॉर्डर पर प्रत्येक गांव की उपस्थिति अनिवार्य होगी। किसान नेताओं का कहना है कि जब तक कृषि कानून वापस नहीं होंगे और एमएसपी पर गारंटी कानून नहीं बनेगा तब तक किसान आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।

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