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करवा चौथ: छलनी की ओट से हुआ चांद का दीदार, पति-पत्नी ने व्रत रखकर की खुशहाल दाम्पत्य जीवन की कामना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 25 Oct 2021 10:46 AM IST

सार

करवाचौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं ने काफी उत्साह के साथ मनाया। पश्चिमी यूपी के सभी जिलों में शहर से लेकर देहात तक चंद्र दर्शन के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर पति को देखकर सुहागिनों ने अपना व्रत तोड़ा।
करवाचौथ का पर्व
करवाचौथ का पर्व - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पश्चिमी यूपी के सभी जिलों में शहर से लेकर देहात तक में करवाचौथ का पर्व रविवार को उल्लास के साथ मनाया गया। सुहागिनों ने पति की दीर्घायु और अपने अखंड सौभाग्य की कामना के लिए निर्जला उपवास रखा। खास बात यह है कि पतियों ने भी पूरे उल्लास के साथ अपनी पत्नियों के लिए व्रत रखा। इसके बाद रात में चंद्र दर्शन के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर पति को देखकर सुहागिनों ने अपना व्रत तोड़ा। पर्व को लेकर नवदंपति में काफी उत्साह देखा गया। पूरे दिन बाजारों में काफी भीड़ रही।
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करवाचौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं ने काफी उत्साह के साथ मनाया। शाम होते ही सुहागिन घरों की छतों पर पहुंच गईं और चांद निकलने का इंतजार करने लगीं। चांद निकलने के बाद सुहागिनों ने छलनी में चांद का दीदार किया। गंगाजल से चंद्रदेव को अर्घ्य दिया। दीपक जलाकर आरती उतारी गई। इसके बाद पतियों ने अपनी पत्नियों के अपने हाथ से पानी पिलाकर उनका व्रत तुड़वाया।


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बागपत के बड़ौत में शाहमल एन्क्लेव कॉलोनी निवासी सुहागिनों में रूपाली सैनी, रश्मि, रीना, गीता आदि ने सोलह श्रंगार करके करवाचौथ की कहानी सुनी। माता गणगौर की पूजा अर्चना कर अपने सुहाग की रक्षा और सुख समृद्धि की कामना की। चांद का दीदार और पूजा के बाद सुहागिनों ने निर्जला उपवास को तोड़ा। 

वहीं चांद निकलने से पहले पति अपने घर पहुंच गए। उनमें पत्नियों के प्रति समर्पण का भाव दिखा। करवाचौथ पर पतिव्रत नारियों ने अपना धर्म निभाया तो पतियों ने उन्हें गिफ्ट दिए। आधुनिकता की चकाचौंध ने भले ही सभी तीज-त्यौहार को प्रभावित किया हो, लेकिन सदियों पुराना करवाचौथ का व्रत सुहागिन स्त्रियां पति की दीर्घायु के लिए श्रद्वा एवं विश्वास के साथ करती है। बदलते दौर में पति भी अपने सफल दाम्पत्य जीवन के लिए इस व्रत का पालन करने लगे है।

मोबाइल फोन और इंटरनेट के दौर में करवाचौथ के प्रति महिलाओं में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आयी है, ब्लकि इसमें और आकर्षण बढ़ा है।  करवाचौथ पर्व पति के प्रति समपर्ण का प्रतीक हुआ करता था, लेकिन आज यह पति-पत्नी के बीच सामंजस्य और रिश्ते की उष्मा से दमक और महक रहा है। आधुनिकता होता दौर भी इस पंरपरा को डिगा नहीं सका है, ब्लकि इसमें अब ज्यादा संवेदनशील, समर्पण और प्रेम की अभिव्यक्ति दिखाई देती है।

ये बोले पति
गुड्डू उर्फ रवि बालियान व सुशील कुमार बताते है कि पर्व की महत्ता न केवल महिलाओं के लिए पुरूष के लिए भी है। पति और पत्नी गृहस्थी रूपी रथ के दो पहिया है। किसी एक ने भी बिखरने से पूरी गृहस्थी टूट जाती है। धीरज व सचिन राठी का कहना है कि करवाचौथ का त्याहौर पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक है। इसलिए व्रत रखा।
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