स्टाफ नर्स भर्ती में 50 लाख रिश्वत का गेम

अमर उजाला ब्यूरों Updated Tue, 02 Aug 2016 02:20 AM IST
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 लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की एक सीनियर स्टाफ नर्स द्वारा भर्ती के नाम पर मोटी रकम जमा करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। करीब 50 लाख रुपये बतौर रिश्वत के तौर पर अपने साथी स्टाफ से एकत्र करने वाले स्टाफ नर्स अब गायब है। चाइल्ड केयर लीव खत्म होने के बाद भी उसने ज्वाइन नहीं किया है। जबकि मेडिकल कालेज का स्टाफ और वे तमाम लोग रोजाना कॉलेज के चक्कर काट रहे हैं, जिन्होंने भर्ती के नाम पर तीन से पांच लाख रुपये बतौर रिश्वत दिए थे। आरोप लग रहे हैं कि भर्ती से जुड़े इस मामले में कॉलेज के कई लोगों की भूमिका है। अब वहीं लोग उसे हर संभव बचाने की कोशिशों में लगे हैं।
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 मामला साल 2014 का है। शासन की तरफ से कन्नौज, सहारनपुर व अन्य मेडिकल कालेजों में स्टाफ नर्स की स्थायी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। उसके बाद मेडिकल कालेज की एक सीनियर स्टाफ नर्स ने अपने साथी स्टाफ से यह कहना शुरू किया कि डीजी महानिदेशक  कार्यालय में उसके सीधे संपर्क हैं। वो नियुक्ति करा देगी। इस बीच मेडिकल के काफी स्टाफ ने अपने बेटे व बेटियों को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए उससे संपर्क करना शुरू कर दिया। आरोप हैं कि नौकरी के नाम पर बतौर रिश्वत देने के लिए कुछ स्टाफ की सेटिंग तीन से पांच लाख के बीच में हुई। इस तरह से करीब 50 लाख रुपया अकेले मेरठ मेडिकल कॉलेज से जुटाया गया।

मेडिकल कॉलेज से कुछ दूर एक निजी अस्पताल की दो स्टाफ नर्सों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने 6:50 लाख रुपया एकत्र कर दिया। इसी तरह से मेडिकल कॉलेज की ही एक स्टाफ ने अपने बेटे को नौकरी दिलाने के लिए तीन लाख रुपये अपने पीएफ एकाउंट से निकालकर देना बताया।

भर्ती ना होने पर फूटा बम
करीब आठ माह बाद जब यह साफ हो गया कि साल 2014 की भर्ती अब नहीं हो पाएगी तो लोगों ने अपना पैसा मांगना शुरू कर दिया। इस दौरान स्टाफ ने तत्कालीन अधिकारियों से शिकायत की और उस पर केस दर्ज करने तक की धमकी दी। सूत्रों का कहना है कि हंगामा बढ़ता देख ब्लड बैंक में बैठक बुलाई गई। जिसमें जहां सभी को चार-छह महीने में सारा पैसा लौटाने की बात कही तो मेडिकल स्टाफ को यह भी हिदायत दे दी गई कि आप सभी सरकारी कर्मचारी हैं और रिश्वत देने के मामले में आप पर भी कार्रवाई होगी। इस दौरान कुछ बाहर के लोगों ने हंगामा कर दिया और कोर्ट तक जाने की बात कही। जिसके कई दिनों बाद तक तनातनी रही। इस बीच स्टाफ नर्स चाइल्ड केयर लीव लेकर चली गई और अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर लिया।

 मुंह ना खोलने की हिदायत  
 लीव खत्म होने के बाद जहां स्टाफ नर्स ने ज्वाइन नहीं किया है तो वहीं सीएमएस डॉ. विभु साहनी का कहना है कि उसने ज्वाइन कर लिया है और मैंने उसे देखा है। लेकिन आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड देखने के बाद ही बता पाऊंगा। ऐसे में कयास लगाये जा रहे हैं कि मेडिकल के रजिस्टर में उसकी उपस्थिति शुरू हो गई है। लेकिन ड्यूटी पर वो कहीं नजर नहीं आ रही है। उधर, बताया जा रहा है कि जिन लोगों की रकम फंसी है, उन्हें मुंह ना खोलने की हिदायत दी जा रही है।
 

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