यूपीएससी में यूपी के होनहार: अमरोहा की सदफ की 23वीं तो रामपुर के प्रखर की 29वीं रैंक

अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद, चित्रकूट Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 25 Sep 2021 01:25 AM IST

सार

चित्रकूट जिले के रैपुरा गांव निवासी सोनाक्षी पटेल (नेहा )  का चयन आईएएस में होने से गांव समेत पूरे चित्रकूट जनपद में खुशी की लहर दौड़ गई है।
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सदफ... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

यूपीएससी की परीक्षा में अमरोहा की सदफ चौधरी ने 23 वीं तो रामपुर के प्रखर सिंह ने 29 वीं रैंक हासिल की है। दोनों ने बीटेक की डिग्री हासिल की है। अमरोहा की सदफ चौधरी ने एनआईटी जालंधर से बीटेक की डिग्री हासिल की तो है तो प्रखर सिंह ने आईआईटी रुड़की से। सिविल8 सेवा की परीक्षा में परचम लहरा कर दोनों ने साबित किया है कि छोटे शहरों के विद्यार्थी भी सफलता हासिल कर सकते हैं।
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चौधरी ने बताया कि दो साल तक नौकरी की है।  इसके बाद यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं। दूसरे प्रयास में उनको सफलता8 मिली है। रामपुर के प्रखर
सिंह का चयन इससे पहले यूपीपीसीएस की परीक्षा पास करन के बाद डिप्टी क्लेक्टर के पद पर हुआ था। प्रखर सिंह के पिता सीआरपीएफ के रिटायर्ड इंस्पेक्टर हैं।

चित्रकूट : जिले के रैपुरा गांव निवासी सोनाक्षी पटेल (नेहा )  का चयन आईएएस में होने से गांव समेत पूरे चित्रकूट जनपद में खुशी की लहर दौड़ गई है। इनकी सफलता में नाना डिप्टी साहब का अहम योगदान है। इनकी माता जी ने अपनी बिटिया की पढ़ाई के लिए छोड़ दी थी सरकारी टीचर की नौकरी ।


बाराबंकी : सिविल सेवा परीक्षा-2020 पास कर आदर्शकांत ने जिले का मान बढ़ाया है। पहले ही प्रयास में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले आदर्श को इस परीक्षा में 149वीं रैंक हासिल हुई है। आदर्श के पिता राधाकांत शुक्ल वाणिज्य कर के अधिवक्ता व माता गीता शुक्ला गृहिणी है। वहीं बड़ी बहन पारूल पीसीएस जे की तैयारी कर रही है।

लखनऊ : लखनऊ के विधु शेखर ने ऑल इंडिया 54वीं रैंक, शिवाक्षी दीक्षित ने 64वीं और परिचय कुमार ने 410वीं रैंक हासिल की है। विधु का यह तीसरा अटेंप्ट था। पहले ही अटेंप्ट में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में 173वीं रैंक हासिल की थी। वर्ष 2018 में उनका सेलेक्शन भारतीय राजस्व सेवा इनकम टैक्स में हुआ, लेकिन विधु शेखर ने अपना लक्ष्य केवल आईएएस को ही चुन रखा था। तीन माह पहले कोरोना से पिता को खोने वाले राजधानी के दिव्यांशु निगम ने देश की सर्वोच्च परीक्षा में 44वीं रैंक हासिल कर मिसाल कायम की।

कानपुर : नौबस्ता के हनुमंत विहार की रहने वाली दिव्या मिश्रा ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में ऑल इंडिया 28वीं रैंक हासिल कर कानपुर का परचम देशभर में लहराया है। दिव्या ने इससे पहले यूपीएससी-2019 में 312वीं रैंक हासिल की थी। वर्तमान में वे दिल्ली में इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस की ट्रेनिंग कर रही हैं। दिव्या के अलावा सर पदमपत सिंघानिया एजुकेशन सेंटर से पढ़े वैभव जिंदल ने 253वीं रैंक हासिल की है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने परिवार का सपना पूरा कर दिया। छत्तीसगढ़ में रह रहे वैभव के पिता प्रवीन जिंदल बिजनेसमैन और मां ममता जिंदल गृहिणी हैं। वैभव ने हाईस्कूल की पढ़ाई छत्तीसगढ़ से की। कानपुर से उनका गहरा लगाव है। 

सीतापुर : सीतापुर शहर के रोटी गोदाम निवासी उत्कर्ष नारायण ने 24 साल की उम्र में पहली बार में ही आईएएस की परीक्षा की उत्तीर्ण कर जिले का गौरव बढ़ाया है। बेटे की इस कामयाबी से उत्कर्ष के पिता प्रेम नारायण और उनका परिवार गदगद है। उनकी आईएएस परीक्षा में 740वीं रैंक आई है। 

फतेहपुर : जिले की जागृति ने किया महिला वर्ग में टॉप

जागृति अवस्थी
जागृति अवस्थी - फोटो : अमर उजाला
यूपीएससी में महिला वर्ग की टॉपर जागृति अवस्थी फतेहपुर जनपद की माटी की पैदाइश हैं। उनका पैतृक निवास अमौली क्षेत्र के नसेनिया गांव है। पिता भोपाल के होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं।

संघ लोक सेवा आयोग 2020 की परीक्षा में महिला वर्ग में टॉप करने वाली जागृति अवस्थी का भी दोआबा की धरती से गहरा ताल्लुक है। जागृति की जन्मभूमि होने के साथ ही उनके परिजनों की कर्मस्थली भी रही है। अमौली के नसेनिया गांव के प्रधान अवधेश अवस्थी अपनी भतीजी की सफलता पर फूले नहीं समा रहे हैं। जागृति का जन्म नसेनिया गांव में 1996 में हुआ था।

इन्होंने अपने पहले ही प्रयास में यह प्रतिष्ठित परीक्षा पास की है। पिता डॉक्टर सुरेश अवस्थी होम्योपैथी के सरकारी कॉलेज में कार्यरत हैं तो वहीं मां मधु अवस्थी गृहिणी हैं। भाई सुयश अवस्थी इन दिनों एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। जागृति चयनित होने से पूर्व भेल में अधिशाषी अभियंता थीं लेकिन आईएएस बनने की चाहत ने नौकरी से इस्तीफा दिला दिया।

नौकरी छोड़कर वह तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं। अपने प्रथम प्रयास में ही आईएएस बनकर इन्होंने मिसाल कायम कर दी। अब गांव वालों को इनके आने का इंतजार है। चाचा अवधेश अवस्थी बताते हैं कि पूरा परिवार त्योहारों और अन्य कार्यक्रमों में गांव आता है। उन्होंने कहा कि बिटिया की सफलता का जश्न गांव वालों व परिवार के साथ मिलकर मनाएंगे।
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