प्रतापगढ़: पितरों को प्रसन्न करने के लिए आज से होगा पिंडदान और तर्पण

Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2020 11:06 PM IST
Pratapgarh: Pinddaan and Tarpan will be started from today to please the fathers
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पितरों को श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान कर प्रसन्न करने को लेकर 15 दिनों तक चलने वाला पितृपक्ष बुधवार से शुरू हो रहा है। पितृपक्ष 17 सितंबर तक चलेगा। मंगलवार को दिनभर बाजारों में तर्पण, पिंडदान व श्राद्ध के सामानों की खरीदारी की जाती रही।
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इस बार पितृपक्ष दो सितंबर से 17 सितंबर तक है। पितृपक्ष में पितरों का तर्पण, श्राद्ध व पिंडदान किया जाता है। मान्यता है कि इसमें पितर देव स्वर्ग लोग से धरती पर परिजनों से मिलने आते हैं।

तर्पण, श्राद्ध व पिंडदान से पितर प्रसन्न होकर सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। जो पितरों का तर्पण नहीं करता है, उसे पितृदोष लग जाता है। दोष के कारण परिजनों को धन, सेहत और कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
पितृपक्ष के एक दिन पूर्व बाजारों में लोग श्राद्ध व तर्पण की तैयारी में जुटे रहे। शहर के बाबगंज, पंजाबी मार्केट, सदर बाजार, घंटाघर, भगवाचुंगी सहित बाजारों में लोग तिल, कच्चा सूत, मिट्टी के बर्तन आदि की खरीदारी हुई। आचार्य आलोक मिश्र ने बताया कि कोरोना काल में नदियों पर तर्पण व पिंडदान के बजाए लोग घरों पर ही पिंडदान व तर्पण करें। तर्पण व पिंडदान से पितर प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं।
तर्पण, श्राद्ध व पिंडदान का क्या है महत्व
पितृपक्ष में श्राद्ध, पिंडदान व तर्पण करने का विशेष महत्व है। हालांकि हर महीने की अमावस्या तिथि पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया जाता है। मान्यता है कि पितृपक्ष के 15 दिनों में पितर धरती पर किसी न किसी रूप में अपने परिजनों के बीच में रहने के लिए आते हैं। श्राद्ध करने की कुछ खास तिथियां भी होती हैं।
पितृपक्ष से जुड़ीं कुछ खास बातें
- अगर किसी कारणवश अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि याद नहीं है तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करना उचित होता है।
- पिता के लिए अष्टमी तो माता के लिए नवमी की तिथि श्राद्ध करने के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
- ऐसी स्त्री जिसकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, उनका श्राद्ध मातृनवमी के दिन करना चाहिए।
- आत्महत्या, विष और दुर्घटना आदि से मृत्यु होने पर मृत पितरों का श्राद्ध चतुर्दशी को करना चाहिए।
- जिन लोगों के सगे संबंधियों और परिवार के सदस्यों की मृत्यु जिस तिथि पर हुई है, पितृपक्ष में उसी तिथि पर उनका श्राद्ध करना चाहिए।

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