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‘खुद को मनवाने का मुझको भी हुनर आता है, मैं वो दरिया हूं, समंदर मेरे घर आता है’

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 23 Sep 2022 11:49 PM IST
मेला गुघाल द्वारा जनमंच में आयोजित मुशायरे में कलाम पढ़ते शायर
मेला गुघाल द्वारा जनमंच में आयोजित मुशायरे में कलाम पढ़ते शायर - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। ‘खुद को मनवाने का मुझको भी हुनर आता है, मैं वो दरिया हूं समंदर मेरे घर आता है’ प्रख्यात गजलकार प्रोफेसर वसीम बरेलवी ने इन पंक्तियों से खूब दाद बटोरी। मौका था मेला गुघाल के तहत जनमंच प्रेक्षागृह में आयोजित अखिल भारतीय मुशायरा का। मुशायरा सुबह पांच बजे तक चला।

पार्षद मंसूर बदर के संयोजन में आयोजित मुशायरे का आगाज शायर नदीम शाद ने नाते पाक से किया। उन्होंने कहा कि नाते नबी के शौक को इस दिल में पालके, बख्शीश का कुछ तो रख लूं असासा संभाल के, लफ्जों में क्या बयां करूं उनकी शान को, जी चाहता है रख दूं कलेजा निकाल के। नामचीन शायर नवाज देवबंदी ने - जलते घर को देखने वालों फूस का छप्पर आपका है, आग के पीछे तेज हवा है आगे मुकद्दर आप का है, उसके कत्ल में मैं भी चुप था मेरा नंबर अब आया, मेरे कत्ल पर आप भी चुप हैं, अगला नंबर आपका है, सुनाकर वाहवाही लूटी। अल्ताफ जिया ने पढ़ा- उसकी आंखों में उतर जाने को जी चाहता है, जिंदगी देख के मर जाने को जी चाहता है, वो ना रास्ता, ना मंजिल ना मंजिल का निशां, फिर क्यों मेरा उधर जाने को जी चाहता है।

हाशिम फिरोजाबादी ने सुनाया, जिनके हाथों से तिरंगा न संभाला जाए, ऐसे नेताओं को संसद से निकाला जाए, न मैं जापान वाला हूं, न पाकिस्तान वाला हूं, वतन पर जान लुटा दे मैं वो ईमान वाला हूं। इसी आबो हवा में सांस लेता हूं मै सदियों से, मैं सदियों से इस मिट्टी का बेटा हूं। खुर्शीद हैदर ने पढ़ा कि भला कैसे रुकेंगे उस मां के आंसू, बुढ़ापे का सहारा जा रहा है, घटाओं में सियासत हो रही है, हवाओं पर इशारा जा रहा है, वतन की सरहदों ने खून मांगा, हमें फिर से पुकारा जा रहा है।
निकहत अमरोही ने मेरा तन मन ही क्या जान कुर्बान है, इससे उल्फत मेरा इश्क ईमान है, मैं तिरंगे को झुकने न दूंगी कभी, ये तिरंगा मेरे मुल्क की शान है सुनाया। इकबाल अशर ने, किसी को कांटों से चोट पहंची, किसी को फूलों ने मार डाला, जो इस मुसीबत से बच निकले उन्हें उसूलों ने मार डाला, सुनाकर तारीफ पाई। महमूद असर ने कहा बात इंसान के किरदार की होती है मियां, वरना पैसे तो तवायफ भी कमा लेती हैं। जौहर कानपुरी ने अपनी नज्मों से लोगों की तालियां बटोरीं। उन्होंने सुनाया- इरादा हो जवां जिनके वही बाजी पलटते हैं, मुखालिफ के लिए हर आंधी नहीं होती, हवेली छोड़ कच्चे मकां में रहना पड़ता है, पख्त चरखा चलाने से कोई गांधी नहीं बनता।
शायरा शबीना अदीब ने कहा- जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नरम अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई नई है। सिकंदर हयात गड़बड़ ने अपनी शायरी से खूब हंसाया। अंत में प्रोफेसर वसीम बरेलवी ने पढ़ा कि- बातों बातों में जहां बात बिगड़ जाती है, फिर बनाओ भी तो वो बात कहां आती है, वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीके से, मैं एतबार ना करता तो क्या करता। इससे पूर्व मुशायरे का उद्घाटन सांसद हाजी फजलुर्रहमान, एसपी सिटी राजेश कुमार, मेला अधिकारी अपर नगरायुक्त राजेश यादव, पूर्व मंत्री संजय गर्ग, योगेश दहिया, औसाफ गुड्डू, मसूद बदर, नासिर खान आदि ने फीता काटकर और शमा रोशन कर किया। मुशायरे में पार्षद शहजाद मलिक, डॉ. अहसान, सईद सिद्दीकी, पुनीत चौहान, आशुतोष सहगल, सुनील शर्मा, मसरूर बदर, दानिश खान, नदीम खान ,शोएब, सुहेल, आरिफ खान आदि मौजूद रहे। संयोजक मंसूर बदर ने सभी का आभार जताया।

मेला गुघाल द्वारा जनमंच में आयोजित मुशायरे में मौजूद शायर

मेला गुघाल द्वारा जनमंच में आयोजित मुशायरे में मौजूद शायर- फोटो : SAHARANPUR

मेला गुघाल द्वारा जनमंच में आयोजित मुशायरे में कलाम पढ़ते शायर आनंद लेते लोग

मेला गुघाल द्वारा जनमंच में आयोजित मुशायरे में कलाम पढ़ते शायर आनंद लेते लोग- फोटो : SAHARANPUR

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