जिजीविषा: चिराग के जज्बे से हारी मूक बधिरता

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Sep 2021 11:47 PM IST
- हकीकतनगर स्थित दिव्यांगजन विभाग का बचपन डे केयर सेंटर
- हकीकतनगर स्थित दिव्यांगजन विभाग का बचपन डे केयर सेंटर - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। जब चिराग ढाई साल का हुआ तो, बोल नहीं पाया और कुछ सुन भी नहीं पाता था। माता पिता को पता चला कि चिराग मूक बधिर है तो, घबरा गए। सोच में पड़ गए, अब बेटे का भविष्य क्या होगा, यह कैसे अपना जीवन बिताएगा।
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ऐसी तमाम उलझनों के बावजूद माता पिता ने चिराग की दिव्यांगता को दूर करने का प्रयास किया और मूक बधिर विद्यालय की अध्यापिका यशोदा से उसकी पढ़ाई शुरू कराई। चिराग ने भी जिजीविषा का परिचय दिया और हर परेशानी का सामना कर आगे बढ़ता रहा। अब चिराग 30 साल का हो चुका है। लिप रीडिंग से लोगों की बोली समझता है और पिता सुभाष के साथ दुकान भी संभालता है।

चिराग हुरिया सहारनपुर में जैन कॉलेज रोड स्थित किशोर बाग का रहने वाला है। पिता सुभाष हुरिया मटिया महल के निकट गुच्छा मार्केट में आर्टिफिशियल ज्वेलरी की दुकान करते हैं। सुभाष हुरिया बताते हैं कि चिराग की जिजीविषा ने ही उसकी परेशानियों को कम किया है। क्योंकि रुड़की स्थित मूक बधिर विद्यालय से पढ़ाई करने के बाद उसने हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई पत्राचार के माध्यम से की। इसके बाद 2010 से 2013 तक चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से ईसीई में डिप्लोमा किया। सुभाष हुरिया बताते हैं कि चिराग की शादी सहारनपुर की ही रहने वाली पलक से हुई और अब उनका बेटा भी है जो सवा साल का है। वह अपने पिता की तरह अक्षम नहीं है, बल्कि सामान्य बच्चों की तरह बोलने लगा है।
च और ट सीखना रहा मुश्किल
चिराग हुरिया ने लिप रीडिंग के जरिये अधिकांश शब्द समझे, लेकिन बोलने में उसे सबसे ज्यादा च और ट अक्षर ने परेशान किया। सुभाष हुरिया ने बताया कि करीब चार महीने में उसने यह दोनों अक्षर सीखे।
40 बच्चों को संवार रहा बचपन डे केयर सेंटर
सहारनपुर। शहर के हकीकतनगर में दिव्यांगजन कल्याण विभाग की तरफ से बचपन डे केयर सेंटर संचालित किया जा रहा है। इसमें 40 मूक बधिर बच्चे पंजीकृत हैं। उन्हें पढ़ाने के लिए तीन अध्यापक अध्यापिका कार्यरत हैं। अधिकांश बच्चे सामान्य बच्चों की तरह ही लिखते और पढ़ते हैं। कोरोना की वजह से अभी बच्चों को विद्यालय नहीं बुलाया जा रहा है, इसलिए अध्यापिका घर जाकर बच्चों को पढ़ाती है। सेंटर की समन्वयक अक्षमा ने बताया कि इस सेंटर में सात साल के बच्चों को प्ले स्कूल की तरह ही अक्षर ज्ञान कराया जाता है। वह संकेतकों के रूप में भी होता है और इशारों से भी। इसके बाद अभिभावक अपनी मर्जी से बच्चे को रुड़की, मेरठ अथवा लखनऊ के विद्यालयों में पढ़ने भेज देते हैं। उन्होंने बताया कि शासन से बजट आवंटित होने पर बच्चों को सुनने और बोलने में सक्षम बनाने के लिए ऑपरेशन भी कराए जाते हैं। दो वर्ष के दौरान पांच बच्चों के ऑपरेशन कराए गए हैं।
- छात्रा एलीसा
- छात्रा एलीसा- फोटो : SAHARANPUR
-- चिराग हुरिया निवासी किशोर बाग
-- चिराग हुरिया निवासी किशोर बाग- फोटो : SAHARANPUR

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