उफान पर नदी: यमुना में छोड़ा 1.70 लाख क्यूसेक पानी, पश्चिमी यूपी के शहरों में मंडराया खतरा, अलर्ट जारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Thu, 22 Jul 2021 09:50 PM IST

सार

पश्चिमी यूपी में नदियां उफान पर हैं। इसके चलते कई शहरों में अलर्ट जारी किया गया है। वहीं कई गांवों पर खतरा मंडराया हुआ है।
गंगा में बढ़ा जलस्तर।
गंगा में बढ़ा जलस्तर। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

पहाड़ों से बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। हथिनीकुंड बैराज से गुरुवार सुबह यमुना नदी में एक लाख 70 हजार 600 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसके चलते शामली, सहारनपुर, बागपत, गाजियाबाद और दिल्ली राज्य को अलर्ट जारी किया गया है।
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शामली में अगले 24 घंटे के भीतर इस पानी के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। शिवालिक पहाड़ियों एवं मैदानी क्षेत्र में हुई तेज बारिश के बाद सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में बुधवार रात्रि 10 बजे उफान आ गया। पानी शंकराचार्य आश्रम, रैन बसेरा, अग्रवाल धर्मशाला तक जा पहुंचा। पूरी रात कई गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क कटा रहा। वहीं गुरुवार सुबह होने पर पानी उतर गया और श्रद्धालु अपने वाहन भूरा देव पर खड़े कर दर्शनों के लिए जा सके। 


इसके बाद गुरुवार दोपहर और शाम को करीब चार बजे पानी आने से नदियां उफन गईं। बादशाही बाग नदी में एक कार फंस गई। हालांकि इसमें सवार लोग सकुशल बाहर निकल आए। बाद में ग्रामीणों ने कार को किसी तरह से ट्रैक्टर से खींचकर बाहर निकाला। 

सहारनपुर में घाड़ की नदियों में आई बाढ़, शाकंभरी खोल में भी उफान 
सहारनपुर में शिवालिक पहाड़ियों एवं मैदानी क्षेत्र में हुई तेज बारिश के बाद सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में रात्रि 10 बजे उफान आ गया। हालांकि इससे सिद्धपीठ में कोई नुकसान नहीं हुआ। पानी शंकराचार्य आश्रम, रैन बसेरा, अग्रवाल धर्मशाला तक जा पहुंचा। हालांकि सुबह होने पर पानी उतर गया और श्रद्धालु अपने वाहन भूरा देव पर खड़े कर दर्शनों के लिए जा सके। इसके अलावा घाड़ की सभी बरसाती नदियों में भी बाढ़ आई जिसके चलते पूरी रात कई गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क कटा रहा।

बुधवार की रात्रि में 10 बजे सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में बाढ़ आ गयी। हालांकि सिद्धपीठ में गिनती के ही श्रद्धालु रुके थे। शंकराचार्य आश्रम प्रभारी संत सहजानंद महाराज ने बताया कि बाढ़ का पानी शंकराचार्य आश्रम की पांच सीढ़ियों तक जा पहुंचा। इसके अलावा रैन बसेरा, अग्रवाल धर्मशाला आदि की सीढ़ियों तक भी पानी पहुंचा। सिद्धपीठ में  बृहस्पतिवार की सुबह भी पानी आया। इसके अलावा दोपहर में और फिर शाम को 4 बजे के लगभग पानी आया। श्रद्धालु अपने वाहनों को भूरादेव पर ही छोड़ कर पैदल ही सिद्धपीठ तक पहुंचे। इसके अलावा रात्रि में घाड़ की सभी बरसाती नदियां उफान पर रहीं। बादशाही बाग खोल, शाहपुर गाड़ा, जैतपुर खुर्द, नौगांवा आदि गांवों की नदियों में भारी बाढ़ के चलते तहसील मुख्यालय से संपर्क कटा रहा। बादशाही बाग नदी में एक कार फंस गई जिसको ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद रेस्क्यू कर बाहर निकाला।

मुजफ्फरनगर जिले का हाल
मुजफ्फरनगर के पुरकाजी खादर क्षेत्र में किसानों के खेतों में पानी भरा होने से ग्रामीणों के समक्ष पशुओं के लिए चारे की समस्या बनी हुई है। कई दिनों से ग्रामीण पशुओं को भूसा खिलाने के लिए मजबूर हैं। नदी में करीब दस फुट व कई रास्तों पर पानी होने से ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सोमवार को उत्तराखंड से छोड़े गए पानी से सोलानी नदी के उफान पर आ जाने से पानी नदी से बाहर निकलकर आसपास खेतों में भर गया। पानी गांवों के रास्तों पर आ जाने से ग्रामीणों का आवागमन भी प्रभावित हो गया था, जिससे कुछ ग्रामीणों का घरों से निकलना भी मुश्किल हो गया था। पानी ज्यादा आ जाने से पुरकाजी लक्सर मार्ग पर रपटे पर भी पानी आ जाने से राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बुधवार को पानी काफी कम होने से ग्रामीणों ने राहत तो महसूस की है। मगर, नदी में अभी भी करीब दस फुट पानी होने से ग्रामीणों को नाव में बैठकर नदी पार करनी पड़ रही है।

इसके अलावा जंगलों व खेतों में करीब तीन फुट पानी भरा होने से ग्रामीण खेतों पर नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीणों के समक्ष पशुओं के लिए चारे की विकट समस्या बनी हुई है। ग्रामीण पशुओं को भूसा खिलाने पर मजबूर हैं। उधर, गांव रजगल्लापुर, नंगला, रामनगर आदि गांवों के रास्तों पर पानी होने से ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रधान प्रमोद कुमार, राजू प्रजापति, राजेंद्र पांचली, साधू राम, यादराम, महकार सिंह आदि ग्रामीणों ने बताया कि सोलानी नदी में पानी तो कम हो गया है, मगर अभी भी नदी में करीब दस फुट पानी है। 

बिजनौर के गांवों में पहुंचा नदी का पानी, रास्ते जलमग्न

बिजनौर जिले में हर साल बाढ़ परियोजना तो बनती हैं, लेकिन बाढ़ से निपटने के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते हैं। रावली के रपटे और ब्रह्मपुरी में पानी आने से कई गांवों से संपर्क कट जाता है। नाव के सहारे लोगों को रपटा पार करना पड़ता है। यह समस्या कई सालों से बनी हुई है। बरसात में लोगों को भारी मुसीबत झेलनी पड़ती है।

जिले में हर साल बाढ़ से निपटने की योजना बनाई जाती है, लेकिन पिछले 20 सालों से चली आ रही समस्या से निजात दिलाने का कोई इंतजाम नहीं किया जाता। रावली के रपटे पर हर साल पानी आ जाता है। मालन नदी जब कहर बरपाती है तो उसका पानी इस रपटे पर चढ़ता है। गांव ब्रह्मपुरी में भी पानी भरा रहता है। रावली, ब्रह्मपुरी, शहजादपुर, भोगपुर, मानशाहपुर समेत कई गांवों का संपर्क कट जाता है। लोगों को नाव के सहारे रपटा पार करना पड़ता है। यह समस्या एक दिन की नहीं रहती, बल्कि पूरी बरसात यही हाल रहता है। गांव में जब भी कोई जनप्रतिनिधि या अधिकारी आता है तो गांव वाले उसके सामने हर बार इस समस्या को उठाते हैं, लेकिन यह समस्या जस की तस बनी हुई है। बरसात आने पर जरूर सबका ध्यान इस समस्या की ओर जाता है। रावली की ग्राम प्रधान राजबाला के अनुसार करीब 20 सालों से मालन का पानी रावली के रपटे पर आ जाता है। कई गांवों का संपर्क कट जाता है। रपटा नदी के स्तर से नीचे बना है। इसका भराव होकर नए सिरे से रपटा बनना चाहिए। तभी इस समस्या से निजात मिल पाएगी।
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