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भगवान गणपति की प्रतिमाएं गढ़ने में जुटा घुमंतु शिल्पकार परिवार

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 02 Aug 2021 12:40 AM IST
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शाहजहांपुर में भगवान गणपति की प्रतिमा को रंगरोगन कर अंतिम रूप देते मूर्ति शिल्पी सेवाराम। संवाद
शाहजहांपुर में भगवान गणपति की प्रतिमा को रंगरोगन कर अंतिम रूप देते मूर्ति शिल्पी सेवाराम। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। गणेश चतुर्थी का पर्व नजदीक आने के साथ ही राजस्थान से आए घुमंतु मूर्ति शिल्पी परिवार ने लोधीपुर में हथौड़ा चौराहा के पास डेरा डालकर प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से भगवान गणपति की नयनाभिराम मूर्तियां गढ़नी शुरू कर दी हैं। परिवार के मुखिया समेत उनकी पत्नी और चारों बच्चे प्रतिमाएं तैयार करने में अपना-अपना हस्तकौशल दिखा रहे हैं।
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कोई पीओपी का घोल बनाता है तो कोई उसे सांचों में भरकर सुखाने के बाद उन पर रंग-बिरंगी चित्रकारी करता है। हालांकि, परिवार के मुखिया का कहना है कि कच्चा माल महंगा होने की तुलना में ग्राहकों से उचित कीमत नहीं मिल रही और इसीलिए लाभांश घटने से परिवार का गुजारा करना कठिन हो रहा है।

इस वर्ष गणेश चतुर्थी का त्योहार दस सितंबर को मनाया जाएगा। एक दशक पहले तक इस पर्व की रौनक महाराष्ट्र, विशेषकर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और आसपास के कुछ अन्य दक्षिणी राज्यों तक सीमित रहती थी, लेकिन बाद में यहां रह रहे मराठा परिवारों ने भी यह त्योहार धूमधाम से मनाना शुरू कर दिया। शहर के चौक समेत अन्य कई मोहल्लों में बसे यह परिवार अपने घरों में पंडाल सजाकर विघ्नहर्ता का कई दिन तक पूजन करने के पश्चात प्रतिमाओं को नदियों में विसर्जन करते हैं। उनका अनुसरण करते हुए कई उत्तर भारतीय परिवारों ने भी घरों में गणेश प्रतिमा स्थापित कर यह त्योहार मनाना शुरू कर दिया।
पाली (राजस्थान) के एक छोटे से कस्बे से अपना कुनबा लेकर आए सेवाराम की कमाई की सारी उम्मीदें इन्हीं श्रद्धालुओं पर टिकी हैं। उनकी पत्नी सुआ देवी, बेटियां सुंदर, दरिया व नैनू और नौ वर्षीय बेटा विनोद भी मूर्तियां तैयार करने में मदद करते हैं। सेवाराम के अनुसार राजस्थान में पत्थर की मूर्तियों की मांग ज्यादा होने के कारण उन्हें परिवार पालने के लिए यहां आना पड़ा, लेकिन ग्राहकों से अच्छा भाव नहीं मिल रहा। उन्होंने बताया कि दस साल पहले पीओपी का 15 किलो वाला बैग 70-80 रुपये में मिल जाता था, लेकिन अब 150 रुपये का हो गया है। कच्चे माल पर दोगुने दाम बढ़ने के बावजूद तैयार मूर्ति की वाजिब कीमत देने में लोग आनाकानी करते हैं।
फिलहाल, यह परिवार हथौड़ा-पुत्तूलाल चौराहा मार्ग के किनारे तिरपाल तानकर मौसम की मार सहते हुए अपने हुनर को कमाई का जरिया बनाने में जुटा है। संवाद
शाहजहांपुर में भगवान गणपति की प्रतिमा को रंगरोगन कर रखी हुई । संवाद
शाहजहांपुर में भगवान गणपति की प्रतिमा को रंगरोगन कर रखी हुई । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR
 
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