भैंसवाल रोड पर डंपिंग ग्राउंड में बने कूड़े के पहाड़

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Sep 2021 12:05 AM IST
शामली भैसवाल रोड पर कूडे का ढेर
शामली भैसवाल रोड पर कूडे का ढेर - फोटो : SHAMLI
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शामली। शहर से रोज निकलने वाले कूड़े का निस्तारण न होने से भैंसवाल रोड पर डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के पहाड़ बने हुए हैं। दो साल से आधुनिक कूड़ा निस्तारण प्लांट की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अभी तक निर्माण शुरू नहीं हो सका। बताया गया है कि प्लांट का डिजाइन भी तैयार हो चुका और टेंडर भी निकाले हुए कई महीने हो चुके है, लेकिन इसके बाद भी निर्माण शुरू होने की अभी उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
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शहर से रोजाना लगभग 38 टन कूड़ा निकलता है। पालिका द्वारा भैंसवाल रोड स्थित डंपिंग ग्राउंड में कई साल से कूड़ा इकट्ठा किया जा रहा है। पालिका ने अपने स्तर से कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाया था, लेकिन वह कारगर साबित नहीं हो सका, जिस कारण कूड़ा लगातार इकट्ठा होता जा रहा है। हालात ये बने है कि हजारों टन इकट्ठा हुए कूड़े के पहाड़ नजर आने लगे हैं। पालिका के पास कूड़ा इकट्ठा करने के लिए दूसरी कोई भूमि भी नहीं है। शासन स्तर से आधुनिक कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने की प्रक्रिया करीब दो साल पहले शुरू हुई थी।

करीब साढ़े छह करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले प्लांट के लिए तीन करोड़ रुपये का बजट भी पिछले साल जारी हो गया था। सीएंडडीएस कंपनी को प्लांट का निर्माण कराया जाना है। कंपनी के अधिकारी डंपिंग ग्राउंड का सर्वे कर चुके हैं। इस साल फरवरी माह में प्लांट का डिजाइन भी तैयार कर लिया गया था और टेंडर भी निकाला जाना बताया गया था, लेकिन इसके बाद निर्माण के लिए आगे की कोई प्रक्रिया नहीं चल रही है। इस तरह से दो साल बाद भी आधुनिक कूड़ा निस्तारण प्लांट का निर्माण शुरू नहीं हो सका।
बताया गया है कि निर्माण एजेंसी ने पालिका से डंपिंग ग्राउंड से कूड़ा हटवाने के लिए कहा था, लेकिन अभी तक कूड़ा नहीं हटाया जा सका। कुल मिलाकर दो साल बाद कूड़ा निस्तारण प्लांट का निर्माण शुरू नहीं हो सका। पालिका के कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी सफाई एवं खाद्य निरीक्षक आदेश सैनी ने बताया कि आधुनिक प्लांट का निर्माण सीएंडडीएस कंपनी द्वारा किया जाना है। डंपिंग ग्राउंड पर एक हिस्से से कूड़ा हटवाया गया है ताकि निर्माण कार्य शुरू हो सके।
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एचटी लाइन बन गई थी बाधक
डंपिंग ग्राउंड के ऊपर से एचटी लाइन ला रही है। सीएंडडीएस कंपनी ने पिछले साल पहले सर्वे में विद्युत लाइन को लेकर प्लांट का निर्माण न होना बताया था। विद्युत लाइन हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई तो विद्युत निगम ने आसपास बस्ती होने के कारण लाइन हटाने से हाथ खड़े कर दिए थे। पालिका के पास दूसरी भूमि न होने के कारण प्रशासन की निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के साथ बैठक हुई और फिर दोबारा सर्वे किया गया, जिसके बाद लाइन से हटकर भूमि पर प्लांट का निर्माण होने पर सहमति बनी थी। विद्युत लाइन को लेकर भी कई महीने तक कार्रवाई लटकी रही थी।

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