बाढ़ से फिर घिरेंगे कई गांव!

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2020 09:03 PM IST
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श्रावस्ती। परसा डेहरिया तिलकपुर तटबंध का निर्माण अधूरा है। इसी के साथ तिलकपुर के पास बाढ़ के कारण हुई कटान से गैप बन गया है। इससे अशरफनगर गांव भी कटान के मुहाने पर है। पूरा वर्ष बीतने के बाद भी विभाग केवल कागजी खाना पूर्ति करता रहा।
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वहीं अब जब बरसात का संकेत मिल रहा है तो विभाग को इस गैप की याद आई है। अब विभाग यदा कदा स्थानों पर कटर बना कर बाढ़ को रोकने का कोरम पूरा कर रहा है। वहीं ग्रामीण बाढ़ को लेकर अभी से भयभीत हैं। उन्हें डर है कि इस गैप से बाढ़ का पानी यदि आया तो रास्ते में पड़ने वाले कई गांव तो खत्म ही हो जाएंगे साथ ही भिनगा नगर भी बाढ़ से अछूता नहीं रहेगा।

श्रावस्ती में जब बरसात का आगाज होने लगता है तो विभाग बाढ़ से बचाव का रास्ता ढूंढने लगता है। ऐसा ही कुछ परसा डेहरिया तिलकपुर तटबंध पर कई वर्ष से देखने को मिल रहा है। यह तटबंध अभी अधूरा है। जो तटबंध बना है वह भी ग्रामीणों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है।
कुछ वर्ष पूर्व आई राप्ती में बाढ़ के कारण तिलकपुर गांव के पास यह तटबंध कट गया था। इससे इतनी तबाही हुई कि जिला मुख्यालय भिनगा में भी कई दिनों तक पानी भरा रहा। एसएसबी बटालियन में लगभग एक मंजिला इमारत डूब गई। इस दौरान भारी मात्रा में विस्फोटक व अन्य जरूरी सामान भी खराब हो गए। वहीं कलेक्ट्रेट व पुलिस लाइंस में भी बाढ़ की तबाही साफ तौर पर देखी गई।
लेकिन यह तबाही जिले के अधिकारियों को कोई सीख नहीं दे पाई जिसके चलते यह गैप आज तक नहीं भरा जा सका। जबकि राप्ती तटबंध से सट कर बह रही है। वहीं विभाग अनुरक्षण के नाम पर तीन कटर का निर्माण कर रहा है। जिससे तटबंध को बचाया जा सके।
देखा जाए तो इस तटबंध में ग्राम-तिलकपुर के पास स्थित गैप से बाढ़ का पानी आस पास की आबादी में फैल जाता है। यही स्थिति बाढ़ के मुहाने पर रहने वाले अतिसंवेदनशील ग्राम अशरफ नगर व वीरपुर लौकिहा है। यह वह गांव हैं जहां राप्ती के बाढ़ का पानी सबसे पहले प्रवेश करता है और सबसे बाद में निकलता है।
अशरफ नगर में राप्ती गांव से सटकर बह रही है। इस गांव के पास भी तटबंध में गैप है। इसे अभी तक भरा नहीं जा सका। लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए विभाग यहां तीन अदद बल्ली से कटर का निर्माण करके अपने जिम्मेदारी को पूरा समझ रहा है। विभाग के इस काम को ग्रामीण ठीक नहीं मानते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक तटबंध का गैप नहीं भरा जाएगा तब तक किसी भी हाल में तटबंध के दूसरी ओर बसे गांवों को बाढ़ से नहीं बचाया जा सकता। कार्य कराने वाले बाढ़ खंड मूल समस्या की ओर ध्यान देने के बजाए केवल कटर व अन्य छोटी छोटी चीजों को बनवाने में व्यस्त है।
परसा डेहरिया तिलकपुर तटबंध में गैप होने से जहां गांव व भिनगा जिला मुख्यालय बाढ़ के निशाने पर है। वहीं जिला मुख्यालय को जमुनहा से जोड़ने वाले सबसे महत्वपूर्ण पुल मधवापुर घाट का अस्तित्व भी खतरे में बताया जा रहा है। इस पुल की सुरक्षा के लिए बना यूएस राइट साइड गाइड बंध के पास राप्ती लूप बना रही है। इससे गाइड बंध में कटान का खतरा मंडरा रहा है। इस लूप से सड़क की दूरी मात्र सौ मीटर ही रह गई है। ऐसे में यदि इस लूप को ठीक न किया गया तो सड़क तो कटेगा ही, साथ ही पुल को भी नुकसान पहुंच सकता है। इससे जिला मुख्यालय का जमुनहा से संपर्क टूट सकता है।
ग्रामीण ओम प्रकाश, राम सहाय, रियासत अली, गुल्ले, असलम अली, राहुल सिंह, राजेश मिश्रा, सद्दाम अली व इबरार अली का कहना है कि प्रशासन यह चाहता ही नहीं कि गांव को बाढ़ से बचाया जाए। उसकी मंशा तो शायद यह है कि जब गांव में तबाही हो तो राहत पैकेज के नाम पर मदद का दिखावा किया जाए। इसीलिए जब काम करने का समय होता है तो काम शुरू नहीं होता। जब बरसात की शुरूआत होनी होती है तो बाढ़ से बचाव के लिए दिखावे के नाम पर बैठकें व अन्य कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। इससे आम लोगों को कोई लाभ नहीं होता। हमें तो बस अपने भरोसे ही राप्ती का सामना करना पड़ता है।
अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड विनोद गुप्ता बताते हैं कि जितना पैसा मिला था, उसके सापेक्ष कार्य कराया गया है। कुछ स्टीमेट शासन में लंबित है, पैसा मिलते ही कार्य पूरा कराया जाएगा। -

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