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Siddharthnagar News: जन्म के बाद नवजात की आंत शरीर से बाहर

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 25 Nov 2022 09:24 PM IST
भनवापुर पीएचसी पर जन्मा बच्चा।
भनवापुर पीएचसी पर जन्मा बच्चा। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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जन्म के बाद नवजात की आंत शरीर से बाहर

- डॉक्टरों ने पीएचसी से जिला अस्पताल और वहां से गोरखपुर किया रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर(सिद्धार्थनगर)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भनवापुर में शुक्रवार सुबह नौ बजे हुए प्रसव में नवजात की आंत शरीर से बाहर निकली हुई पाई गई। डॉक्टरों ने नवजात को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल में रेफर कर दिया। परिजन जिला अस्पताल पहुंचे तो पीडियाट्रिक सर्जरी की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार ऐसे नवजात की सर्जरी 24 घंटे की भीतर हो जानी चाहिए।
ब्लॉक क्षेत्र के कटरिया बाबू गांव निवासी शत्रुघ्न की 26 वर्षीय पत्नी मनीषा को शुक्रवार सुबह प्रसव पीड़ा होने लगी। परिजन एंबुलेंस की सहायता से लेकर मनीषा को प्रसव के लिए पीएचसी भनवापुर ले गए। स्टाफ नर्स सविता मौर्या ने मनीषा का प्रसव कराया। मनीषा ने एक बच्चे को जन्म दिया। जन्म के बाद बच्चे की हालत देख वहां मौजूद सभी लोग परेशान हो गए। बच्चे का आंत बाहर निकली हुई थी। ड्यूटी पर तैनात डॉ. एलबी यादव ने जिला अस्पताल सिद्धार्थनगर के लिए रेफर कर दिया। वहां पीडियाट्रिक सर्जन नहीं होने की वजह से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

रुपये नहीं थे, मायूस होकर गए घर
शुक्रवार शाम चार बजे ने नवजात के पिता शत्रुघ्न ने बताया कि वे नवजात को लेकर संयुक्त जिला अस्पताल गए थे, लेकिन वहां से भी रेफर कर दिया गया। गोरखपुर जाने और इलाज के लिए रुपये नहीं हैं, इसलिए घर जा रहा हूं। कर्ज लेकर शनिवार को इलाज कराऊंगा।
गर्भाशय में ही पता चलनी चाहिए थी मासूम की स्थिति
शत्रुघ्न ने बताया कि उसने अपने पत्नी मनीषा की सरकारी अस्पताल में नियमित जांच और टीकाकरण कराई थी, लेकिन जब बच्चा मां की पेट में था तो इसके बारे में जानकारी नहीं हो सकी। डॉक्टरों के अनुसार जानकारी होती तो गर्भाशय में ही इलाज हो जाता।
हर सप्ताह रेफर होते हैं दो से तीन नवजात
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद भी पीडियाट्रिक सर्जन की नियुक्ति नहीं है। इस कारण एसएनसीयू (नवजात शिशु गहन चिकित्सा ईकाई) से एक सप्ताह में दो से तीन नवजातों को रेफर किया जाता है। वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि जन्मजात विकृतियां होने के कारण आए दिन बच्चों को रेफर किया जाता है।
जन्मजात विकृति वाले नवजात के मामले में मैंने जिला अस्पताल में जानकारी की तो पता चला कि वह गोाखपुर गया है। उसके मोबाइल नंबर पर भी संपर्क करने की कोशिश की गई। उसके वापस घर जाने के बारे में मुझे जानकारी नहीं है।
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- डॉ. बीके अग्रवाल, सीएमओ
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