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मरीजों को नहीं मिल रही एंबुलेंस

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 31 Jul 2021 11:54 PM IST
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जिला अस्पताल में ऑटो रिक्शा से मरीज लेकर आए परिवारीजन। (संवाद)
जिला अस्पताल में ऑटो रिक्शा से मरीज लेकर आए परिवारीजन। (संवाद) - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। 102 व 108 एंबुलेंस सेवा जिले में चार दिन बीत जाने के बाद भी पटरी पर नहीं लौट सकी है। ऑटो रिक्शा व बाइकें ही मरीजों का सहारा बन गई है। जिला प्रशासन भले ही सभी ब्लॉकों में एंबुलेंस चलने का दावा कर रहा हो, लेकिन अधिकतर मरीजों को यह सुविधा समय से नहीं मिल पा रही है। इसकी तस्दीक जिला व महिला अस्पताल के बाहर आने वाले मरीज खुद कर रहे हैं।
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कोई ऑटो से आ रहा है तो कोई बाइक से ही अस्पताल पहुंच रहा है। इन हालातों में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही है। 102 व 108 एंबुलेंस कर्मी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चिकालीन हड़ताल पर हैं। ऐसे में अनट्रेंड चालकों के जरिए एंबुलेंस चलवाई जा रही है। लेकिन इनका संचालक सिर्फ कागजों पर ही हो रहा है। मरीजों को इनका लाभ मिलना मुश्किल हो गया है।

अमर उजाला टीम ने शनिवार को जिला व महिला अस्पताल आने वाले मरीजों से बातचीत करके रियलटी चेक की। शहर के शास्त्री नगर से आए लालजी प्रसाद ने बताया कि कई बार एंबुलेंस को फोन किया था लेकिन एंबुलेंस समय से नहीं आई। इस पर बाइक से ही अस्पताल आ गए।
तालगांव इलाके के खुर्शीदपुरवा निवासी सुशील अपनी मां को लेकर जिला अस्पताल आए थे। सुशील ने बताया कि दो दिन पहले एंबुलेंस न आने से एक मरीज की हालत बिगड़ गई थी। एंबुलेंस नहीं मिल सकी। ऐसे में ऑटो से चले आए। मानपुर इलाके के पकरिया से आई निर्मला ने बताया कि सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही है। वह अपने साधन से ही अस्पताल आई।
इसी तरह जिला महिला अस्पताल के बाहर भी मरीज ऑटो रिक्शा व बाइक से आते जाते हुए दिखाई दिए। सीएमओ डॉ. मधु गैरोला ने बताया एंबुलेंस बराबर चल रही है। धीरे-धीरे पटरी पर सेवाएं आ रही है।
अस्पताल में स्ट्रेचर मिलना भी मुश्किल
जिला अस्पताल में मरीजों को स्ट्रेचर मिलना भी मुश्किल हो रहा है। शनिवार को हरिनाम सड़क हादसे में घायल हो गया था। इस पर परिजन उनको जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। चिकित्सकों ने एक्स-रे कराने की बात कही। इस पर परिजनों ने पहले स्ट्रेचर तलाशा। जब कहीं स्ट्रेचर नहीं मिला तो हरिनाम को गोदी में ही लेकर एक्स-रे कराने चल दिए।

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