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घर के साथ सता रही पेट की चिंता

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 11:49 PM IST
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रेउसा इलाके के फौजदारपुरवा में अनीता अपने भाई रामचन्द्र के सहयोग से लकड़ी के बोझ को भोजन लेने आई?
रेउसा इलाके के फौजदारपुरवा में अनीता अपने भाई रामचन्द्र के सहयोग से लकड़ी के बोझ को भोजन लेने आई? - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर/रेउसा। तराई इलाके के लोगों के सामने बाढ़ के खतरे ने दोहरी मुसीबत पैदा कर दी है। रहने के लिए घर के साथ अब भूख की भी चिंता सताने लगी है। कटान तेज होने से बच्चे लकड़ी इकट्ठा कर रहे हैं। कोई नदी के किनारे लकड़ी ला रहा है तो कोई गांव के लगे पेड़ों को ही काटकर लकड़ी इकट्ठा कर रहा है। कटान पीड़ित बेबस हैं। उनकी आंखों में आंसू और मन में घर छोड़ने का गम है। लेकिन पानी के कहर के आगे सब बेबस हैं।
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तराई इलाके का फौजदारपुरवा सबसे प्रभावित गांव है। गांव के करीब 20 परिवार कटान की आशंका को देखते हुए पलायन कर गए है। यहां पर दिनभर लोग अपने घरों पर हथौड़ा चलाने को मजबूर हैं। गांव की अनीता अपने भाई रामचंद्र के साथ लकड़ी इकट्ठा करती हुई दिखाई दी। अनीता बोली, अब तो अपना घर छोड़ना पड़ेगा। घर में गैस चूल्हा नहीं है, ऐसे में लकड़ी से ही भोजन पकाएंगे। जहां भी जाएंगे वहां पर लकड़ी नहीं होगी।

इसी वजह से लकड़ी इकट्ठा करके अपने साथ लिए जा रहे है। गांव के शत्रोहन भी लकड़ी की व्यवस्था करते दिखे। परमेश्वरपुरवा के रामधीरा ने बताया घर छोड़ दिया है। सड़क पर घर बनाएंगे तो लकड़ी की जरूरत पड़ेगी। उस लकड़ी पर ही छप्पर डालकर रहेंगे। इसलिए गांव से लकड़ी के बड़े बोट काटकर लिए जा रहे है।
फौजदारपुरवा की इंद्रावती लहरों से भयभीत होकर भोजन के लिए उपलों का इंतजाम किया। ट्राली में लकड़ी के साथ उपले भी ले गई। इंद्रावती ने बताया, साल भर मेहनत करके उपले पाथे थे। अब भोजन पकाने के लिए यही काम आएंगे। गांव में रुकना खतरे से खाली नहीं है। रामनरायन राजपूत का मकान कटान की कगार पर आ गया है। शनिवार को यह माथे पर हाथ रखकर बस पानी पर ही नजर बनाए हुए थे। बोले, भगवान यह कैसी लीला है। जो हर बरस बाढ़ परेशान करती है।
बच्चों ने खाई सूखी रोटी
परमेश्वरपुरवा के लोग परिवार व घर बचाने के लिए दिनभर तमाम व्यवस्थाएं करते रहे। इसके कारण यह लोग बाजार नहीं जा सके। इससे घर में सब्जी नहीं आ पाई। जब बच्चों को भूख लगी तो घर में सब्जी नहीं थी। ऐसे में बच्चों ने घर में जो भी बचा था। उसी को खाकर अपनी भूख मिटाई।
गांव के निर्मल ने बताया कि पानी की वजह से घर का सामान नहीं खरीद सका था। ऐसे में घर के बच्चे आलू संग रोटी खाते हुए दिखाई दिए। बच्चे बोले, अब तो दो माह तक कुछ इसी तरह से जीवन जीना पड़ेगा। परमेश्वरपुरवा के गोमती के दो बच्चे एक ही थाली में सूखे पराठे खाते मिले। बच्चे बोले, घर में जो बचा था मां ने उसी को पकाकर हम लोगों को दे दिया है। इसी से भूख मिटा रहे है।
बाढ़ प्रभावित इलाके में लेखपालों की ड्यूटी लगा दी गई है। ड्रोन कैमरे से नजर रखी जा रही है। पलायन कर रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
अभिचल प्रताप सिंह, तहसीलदार बिसवां
नदियों में पानी बढ़ने की आशंका
शारदा प्रखंड के अधिशाषी अभियंता विशाल पोरवाल ने बताया कि लखीमपुर के बैराजों से 2.93 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। परमेश्वरपुरवा व फौजदारपुरवा में परक्यूपाइन व बम्बू क्रेट लगाकर कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है। देर रात तक नदियों में पानी बढ़ने की आशंका है।

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