हिंदी अभिव्यक्ति और व्यक्तित्व विकास का बेहतर माध्यम

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2020 10:15 PM IST
Hindi is a better medium for expression and personality development
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सोनभद्र। हिंदी दिवस पर सोमवार को जिले भर में कार्यक्रम आयोजित किए गए। कहीं किताब, कॉपी तो कहीं मास्क वितरित किया। सामाजिक संगठनों ने कवि गोष्ठी एवं विचार गोष्ठी हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला।
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शहीद स्थल प्रबंधन ट्रस्ट करारी की ओर से बार एसोसिएशन सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर की अध्यक्षता में कवि गोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता फरीद अहमद व विशिष्ट अतिथि डा.पारसनाथ मिश्र व असुविधा के संपादक रामनाथ शिवेन्द्र उपस्थित रहे। कवि जगदीश पंथी, प्रभात चंदेल, सुधाकर स्वदेश प्रेम, अमरनाथ अज्ञेय, प्रदुम्र तिवारी, राकेेश राय, आयुर्वेदाचार्य, जैराम सोनी ने कविताएं सुनाईं। इस मौके पर धीरज पांडेय, दिव्य ज्योति सच्चिदानंद, बेदमणि तिवारी, त्फारूख अली हाश्मी, ओमप्रकाश पाठक आदि उपस्थित रहे। संचालन अशोक तिवारी ने किया। राबट्र्सगंज ब्लॉक के उरमौरा स्थित फिटनेस मंत्रा हेल्थ क्लब में गोष्ठी हुई। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषा अभिव्यक्ति व व्यक्तित्व विकास का माध्यम होती है।

संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट की ओर से हिंदी दिवस के अवसर पर राबटर्सगंज नगर स्थित प्रधान कार्यालय में संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के निदेशक साहित्यकार अजय शेखर एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित, शिक्षक, साहित्यकार ओमप्रकाश त्रिपाठी को ट्रस्ट के संस्थापक दीपक कुमार केसरवानी ने सम्मानित किया। शेखर ने कहा कि विद्वानों, वैज्ञानिकों के अनुसार हिंदी साहित्य का इतिहास वैदिक काल से आरंभ होता है। वैदिक भाषा हिंदी थी लेकिन इस भाषा का दुर्भाग्य रहा कि उसका नाम परिवर्तित होता रहा कभी-कभी संस्कृत प्राकृत अभी अपभ्रंश अब हिंदी। ओमप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी के विकास में साहित्यकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। साहित्यकार भोलानाथ मिश्र, मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर साहित्यकार प्रतिभा देवी, तृप्ति केसरवानी, कवि सुशील, शिव नारायण, अमरनाथ, अनुपम त्रिपाठी, मानवेंद्र त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।
रामगढ़: चतरा ब्लाक के भुसौलियां गांव में हिंदी दिवस के अवसर पर नेहरू युवा केंद्र की ओर से विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सबसे पहले युवाओं में मास्क वितरण कर कोरोना जैसी बीमारी से बचने की सलाह दी गई और मातृ भाषा हिंदी पढने के लिए किताब वितरण किया गया। इस मौके पर आलोक देव पांडेय, प्रशान्त मिश्रा, अखिलेश, शनि, उपचंद, धर्मजीत, संतोष आदि मौजूद रहे।
हिंदी के जरिये हो सकती है देश की उन्नति
दुद्धी। भाऊराव देवरस राजकीय पीजी कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. रामसेवक सिंह यादव की अध्यक्षता में हिंदी दिवस पर गोष्ठी की गई। कार्यक्रम का संयोजन कर रहीं हिंदी विभागाध्यक्ष आरजू सिंह ने बताया कि आज ही के दिन 14 सितंबर 1949 को संविधान के अनुच्छेद 343 (1)के तहत हिंदी राजभाषा पद पर अधिष्ठित हुई। कहा कि राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के अनुरोध पर वर्ष 1953 से प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि साहित्य और देश की उन्नति अपनी भाषा में ही हो सकती है। राजभाषा पर विस्तार से चर्चा करते हुए इस पुनीत अवसर पर हिन्दी के संवद्र्धन को केंद्र में रखते हुए उन्होंने स्वरचित कविता भी सुनाई। इस अवसर पर डॉ. अजय कुमार, डॉ. राकेश कन्नौजिया, डॉ मिथिलेश गौतम, डॉ विवेकानन्द, श्री पवन सिंह, श्री अजय कुमार श्यामा, श्री मृत्युंजय यादव, श्री मनीष राज बावरे, मु. शहबाज खां, श्री संतोष कुमार सिंह , श्री अंगद प्रसाद एवं छात्र - छात्राएं उपस्थित रहे।

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