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Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jul 2021 12:21 AM IST
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उन्नाव। हड़ताल पर चल रहे एंबुलेंस कर्मी अधिकारियों के बार बार कहने पर भी अपने फैसले से नहीं रहे। अधिकारियों के कहने पर चालकों ने सभी 87 एंबुलेंस की चाभियां सौंप दीं। प्रशासन ने आनन फानन में प्राइवेट चालकों की व्यवस्था कर एंबुलेंस चलाने के लिए थमा दी है। इनमें टेंपो, बस व अन्य चार पहिया वाहन चालक भी हैं। फिलहाल बिना ईएमटी के ही चलाई गईं एंबुलेंस में पैरामेडिकल स्टॉफ को तैनात करने की तैयारी है।
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जिले में 108, 102 और एएलएस की 87 एंबुलेंस हैं। चालक व ईएमटी मिलाकर सभी में करीब 300 से ज्यादा कर्मचारी हैं। जिगित्सा कंपनी को टेंडर मिलने के बाद नौकरी से हटाए जाने के विरोध में 25 जुलाई की रात 12 बजे से एंबुलेंस कर्मी हड़ताल पर चले गए। तीन दिनों में अधिकारियों के कहने पर उन्होंने 24 एंबुलेंस का संचालन कराया। दबाव के बाद भी हड़ताल खत्म न होते देख गुरुवार सुबह एडीएम राकेश सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट चंदन पटेल, सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश, एएसपी शशि शेखर सिंह, एआरटीओ आदित्य कुमार त्रिपाठी, सीओ सिटी कृपाशंकर फिर जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने एंबुलेंस कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों और कर्मियों से बात की। लेकिन वह सभी अपनी मांगों पर अड़े रहे और हड़ताल खत्म न करने की बात कही।

कोई रास्ता न निकलते देख अधिकारियों ने चाभी और आईडी जमा करने के लिए कहा तो सभी ने जमा कर दीं। इसके बाद एडीएम ने एआरटीओ को एंबुलेंस संचालक के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए। एआरटीओ ने टेंपो स्टैंड के ठेकेदार व ट्रांसपोर्टरों से संपर्क कर एचएमवी (हैवी मोटर व्हीकल) व एलएमवी (लाइटर मोटर व्हीकल) लाइसेंस धारक 140 चालकों की व्यवस्था की। उनका आधार कार्ड व ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो कापी जमा कर उन्हें एंबुलेंस दे दी गई।
एआरटीओ ने बताया कि एक एंबुलेंस पर दो चालकों की जरूरत है। अभी 66 चालकों की और व्यवस्था करनी है। इसके प्रयास किए जा रहे हैं।
सेवा प्रदाता कंपनी ने दिया प्रशिक्षण
वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर लगाए गए चालकों को सेवा प्रदाता कंपनी की ओर से प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया गया। चालकों को कॉल सेंटर से फोन आने पर उन्हें क्या करना है। फोन पर उन्हें मरीज की लोकेशन दी जाएगी, लोकेशन पर कैसे पहुंचना है। मरीज को लेने के बाद उसे नजदीकी अस्पताल तक कैसे पहुंचाना है।
स्ट्रेचर तक नहीं खोल पाए, मरीज परेशान
चालकों को एंबुलेंस मिलने के बाद सबसे अधिक परेशानी मरीजों को उठानी पड़ी। ईएमटी न होेने से उसे यह भी पता नहीं है कि मरीज को कैसे एंबुलेंस से लाना है। उसे रास्ते में ऑक्सीजन कैसे लगानी है और कौन सी दवा देनी है इससे मरीज परेशान हैं। गुरुवार देर शाम लखनऊ-कानपुर हाईवे पर सड़क हादसे में घायल युवक को 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया। इमरजेंसी वार्ड के बाहर एंबुलेंस खड़ी कर स्टाफ को बुलाने चला गया। काफी देर तक स्टाफ नहीं आया। स्टाफ आने के बाद चालक स्ट्रेेचर नहीं खोल पाया।
फोटो- 21
प्राइवेट एंबुलेंस से लाए गए मरीज
चालकों की हड़ताल के चलते मरीजों को प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी तक लोग निजी वाहन या फिर प्राइवेट एंबुलेंस से पहुंचे। जिसका चालकों ने मनमाना किराया वसूला।
क्या बोले सिटी मजिस्ट्रेट
एंबुलेंस कर्मचारी रात तक काम पर वापस नहीं लौटते हैं तो उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा। फिलहाल 140 चालकों की व्यवस्था कर ली गई है। रही ईएमटी की बात तो उनके स्थान पर स्वास्थ्य केंद्रों से पैरामेडिकल स्टाफ बुलाया गया है। उनकी तैनाती एंबुलेंस में कर दी जाएगी।
चंदन पटेल, सिटी मजिस्ट्रेेट
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