UP Election 2022 : लाइव शो में क्यों रो पड़ीं हाथरस की शिक्षिका? मुख्यमंत्री योगी से कर दी ये बड़ी मांग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Mon, 29 Nov 2021 01:26 PM IST

सार

चाय पर चर्चा के बाद 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' हाथरस की महिलाओं के बीच पहुंचा। यहां बड़ी संख्या में जुटी महिलाओं ने खुलकर चुनावी मुद्दों पर बात की। 
हाथरस में चुनावी चर्चा के दौरान शिक्षिका डॉ. नीरू (दाएं से पहली साड़ी पहने हुए) स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा उठाते हुए रो पड़ी।
हाथरस में चुनावी चर्चा के दौरान शिक्षिका डॉ. नीरू (दाएं से पहली साड़ी पहने हुए) स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा उठाते हुए रो पड़ी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

एक साल पहले जिस हाथरस को पूरे देश और दुनिया में महिलाओं के लिए असुरक्षित बताया जाता था, आज वहां की महिलाएं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खुश हैं। हाथरस के  'अमर उजाला' के कार्यक्रम 'सत्ता का संग्राम' में जुटी बड़ी संख्या में महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि वह पहले के मुकाबले अब ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं।
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हालांकि, इस बीच स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा उठाते हुए एक शिक्षिका रो पड़ीं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हाथरस में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर करने की मांग की। कहा कि यहां अच्छा हॉस्पिटल होना चाहिए, जहां सब तरह की सुविधाएं हों। आम लोगों को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े। पढ़िए महिलाओं ने कौन-कौन से मुद्दे उठाए? 


क्यों रो पड़ी शिक्षिका?
शिक्षिका नीरू गुप्ता ने हाथरस में स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा उठाते हुए रो पड़ीं। बोलीं, यहां अत्याधुनिक हॉस्पिटल होने चाहिए। अपनी आपबीती सुनाई। बोलीं- कोरोनाकाल में अच्छा इलाज न मिलने के चलते मेरे पति की मौत हो गई। उस वक्त हर कोई परेशान था।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग किया कि हाथरस में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होनी चाहिए। अस्पतालों में हर तरह का इलाज मिल सके इसके लिए काम करना  चाहिए। नीरू ने आगे हाथरस के विकास कार्यों के बारे में बताया। कहा कि यहां पहले से तो बहुत कुछ बदला है। पहले यहां बेटियों के लिए सिर्फ एक कॉलेज हुआ करते थे। अब कई डिग्री कॉलेज खुल चुके हैं। हर क्षेत्र में विकास कार्य हुए हैं। पहले के मुकाबले रोड कनेक्टिविटी भी बेहतर हुई है। 

शिक्षा व्यवस्था और विकास कार्यों पर क्या बोलीं महिलाएं? 

हाथरस में चुनावी मुद्दों पर चर्चा करतीं महिलाएं।
हाथरस में चुनावी मुद्दों पर चर्चा करतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

स्वच्छता को लेकर सवाल उठाया

हाथरस, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022
हाथरस, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 - फोटो : अमर उजाला
प्रीती वर्मा ने साफ-सफाई को लेकर सवाल उठाया। कहा कि कॉलोनियों में काफी गंदगी रहती हैं। नालियां भरी हुई हैं। जरा सी बारिश में सड़कों पर पानी भर जाता है। रिटायर्ड शिक्षिका डॉ. ऊषा पाठक ने कहा कि पहले गंदगी का बहुत ढेर रहा करता था। भाजपा की सरकार आने के बाद इसमें काफी बदलाव आया है। सीवर पर काम चल रहा है। कोरोना के चलते काम प्रभावित हुआ है। 

अंजली ने कहा कि नालियों और गंदगी की बहुत बुरी स्थिति है। नाली का पानी सड़कों पर बहता है। समाजसेविका डॉ. अनु विमल ने कहा कि पहले के मुकाबले साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर हुई है। हालांकि सड़कों की स्थिति बहुत खराब हो गई है। कोई नेता-मंत्री आता है तो सड़कें बेहतर हो जाती हैं। सुरक्षा व्यवस्था के मामले में डॉ. अनु ने योगी सरकार की तारीफ की। बताया कि हाल ही में वह खुद रात में डेढ़ बजे बेटे को स्कूटी पर लेकर स्टेशन से घर आई थीं। कहीं पर भी डर नहीं लगा। महिलाएं काफी सुरक्षित हैं। 

सरोज गर्ग ने कहा कि 45 पहले मैं यहां आई थी तो यहां बहुत गंदगी थी। महिलाएं घर से नहीं निकल सकती थी। सड़कें, स्वच्छता, बिजली समेत कई मामलों में पहले के मुकाबले बहुत अच्छा काम हुआ है। हम तो उसी को वोट देंगे जो हमारे देश, प्रदेश और हाथरस के बारे में सोचेगा।  

महिलाओं ने और क्या कहा?

हाथरस, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022
हाथरस, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 - फोटो : अमर उजाला
  • दीप्ति अग्रवाल ने कहा कि सुरक्षा के दृष्टि से काफी बदलाव आया है। हाथरस अच्छा हो रहा है। हालांकि कुछ विकास कार्य और अधिक होने चाहिए। 
  • एक अन्य महिला ने कहा कि हाथरस में महिलाएं काफी अधिक एक्टिव हैं। हर क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़कर काम कर रहीं हैं। हर घर में बुटिक खुले हुए हैं। शिक्षिकाएं हैं। स्वरोजगार को लेकर काफी काम हो रहा है। 
  • अनीता ने कहा कि अलीगढ़ के मुकाबले हाथरस काफी अच्छा है। यहां जितनी महिलाओं को आजादी है, वहां नहीं है। यहां घरवाले पूरी तरह से सहायता करते हैं। 
  • चंचल गोयल ने हाथरस में महिलाओं की काफी अच्छी स्थिति है। यहां महिलाएं सुरक्षित हैं। 
  • बीनू ने पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की। 
  • राजबाला ने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों को पहले की तरह मानदेय मिलना चाहिए। 
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