मेराज की हत्या से बाहुबली मुख्तार के आर्थिक साम्राज्य पर लगेगी तगड़ी चोट, जानें कितने काम का था मेराज

शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 15 May 2021 12:26 PM IST

सार

पूर्वांचल में मुख्तार अंसारी के अवैध कारोबार को मेराज संचालित करता था । साथ ही सियासी मजबूती के लिए भी काम करता था। कोयला से लेकर जमीन पर कब्जा करने में भी मेराज का नाम था। मेराज की शुक्रवार को चित्रकूट जेल में गैंगवार में हत्या कर दी गई थी।
मुख्तार अंसारी, भाई मेराज।
मुख्तार अंसारी, भाई मेराज। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

पूर्वांचल के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के गैंग के सदस्य मेराज अहमद की जेल में हुई हत्या के बाद मुख्तार अंसारी सहित कई बाहुबलियों के आर्थिक साम्राज्य पर तगड़ी चोट लगेगी। कारण, बाहुबली मुख्तार अंसारी के अवैध कारोबार को मेराज ही पूरे पूर्वांचल में संचालित करता था। मुख्तार अंसारी को बसपा से जोड़ने और पहली बार विधायक बनाने में मेराज ने अहम भूमिका निभाई थी। इसी के बाद से वह मुख्तार अंसारी का बेहद करीबी हो गया था और मछली, कोयला और जमीनों के अवैध कारोबार पर मुख्तार के चेहरे पर काम करना शुरू कर दिया था।
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बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी गैंग जुड़े होने के साथ ही मेराज अहमद कुख्यात मुन्ना बजंरगी का बेहद करीबी था। वह जमीन पर कब्जा और कोयला के अवैध कारोबार के साथ ही रंगदारी और नशे के कारोबार से भी जुड़ गया था। इसके साथ ही वह वाराणसी के अलावा चंदौली के कोयला कारोबार, मिर्जापुर के अवैध खनन और गाजीपुर के मछली कारोबार के सिंडिकेट का सरगना बन गया। मुख्तार अंसारी के कारोबार को भी मेराज ने संभालना शुरू कर दिया और जरायम जगत में उसने अपनी अलग पहचान बना ली। जून 2006 में तत्कालीन एसएसपी ने कई थानों की फोर्स के साथ मेराज के घर पर छापा मारकर हेरोइन की बड़ी खेप पकड़ी थी।


हालांकि बाद में न्यायालय से वह बाइज्जत बरी हो गया। जेल से छूटने के बाद मेराज अहमद पूर्वांचल में दूसरे सक्रिय गैंग से मुख्तार गैंग के बीच का माध्यम बन गया। बसपा से सक्रिय राजनीति में जुटे मेराज ने पूर्वांचल में सरकारी तालाबों में प्रतिबंधित मांगूर मछली का उत्पादन शुरू कराया था और उसे सीधे एक्सपोर्ट शुरू किया था।

फर्जी दस्तावेजों से असलहा लाइसेंस बनवाने का था मास्टरमाइंड
मेराज अहमद को फर्जी दस्तावेजों पर असलहों का लाइसेंस बनवाने का मास्टरमाइंड माना जाता था। अक्टूबर 2020 में जैतपुरा पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। छानबीन में फर्जी तरीके से बनवाए गए नौ लाइसेंसी पिस्टल और रायफल की जानकारी हुई थी। साल 2015 में मुन्ना बजरंगी के खास तारिक की लखनऊ में गोली मारकर हत्या की गई। तारिक के घर से पुलिस को लाइसेंस रायफल बरामद हुई, जो बाद में फर्जी पाई गई। बताया जा रहा है कि इस रायफल का लाइसेंस भी मेराज ने ही नागालैंड से बनवाया था। फर्जी पते पर असलहा लाइसेंस जारी होने के आरोप में जेल जाने के बाद विकास प्राधिकरण ने उसके अवैध निर्माण को ढहाया था।

अनिल राय हत्याकांड में मेराज को बनाया था आरोपी
मुन्ना बजरंगी के करीबियों में शुमार रहे मेराज का नाम मलदहिया पर काशी विद्यापीठ के छात्रनेता रहे अनिल राय हत्याकांड में भी आया था। मेराज को साजिश का हिस्सा माना गया था और मुन्ना बजंरगी ने वर्ष 2002 में भाजपा नेता अनिल राय की हत्या की थी। इससे पहले 1997 में अनिल के बड़े भाई सुनील राय और राम प्रकाश पांडेय की भी हत्या मुन्ना बजरंगी ने की थी।

मेराज के कहने पर विहिप नेता का अपहरण और हत्या
पूर्वांचल में तैनात रहे एक पूर्व आईपीएस ने बताया कि अवैध कोयला कारोबार संभालने के बाद मेराज पूरे धंधे पर मुख्तार अंसारी का कब्जा जमाने में जुट गया था। उसने विहिप नेता नंद किशोर रूंगटा को अपने धंधे का सबसे बड़ा अवरोध बताया। 1997 में विहिप के तत्कालीन कोषाध्यक्ष और कोयला कारोबारी से रंगदारी मांगी गई थी। मना करने पर मुख्तार के गुर्गों ने रूंगटा का अपहरण किया और फिरौती की रकम लेने के बाद हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि उसने रूंगटा को कोयला कारोबार छोड़ने को भी कहा था। नहीं मानने पर उनकी हत्या की। हालांकि मुख्तार गैंग के सदस्य रहे इनामी अताउर्रमान उर्फ बाबू और शहाबुद्दीन को इसका आरोपी बनाया था। सीबीआई में जांच के बाद दोनों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया।
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