बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

मिठास की नर्सरी से ला रहीं घर में खुशहाली

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 28 Feb 2021 11:31 PM IST
मशीन से गन्ने की गांठों (आंख) को निकाली स्वयं सहायता समूह की महिला।-खास खबर की फोटो
मशीन से गन्ने की गांठों (आंख) को निकाली स्वयं सहायता समूह की महिला।-खास खबर की फोटो - फोटो : AZAMGARH
विज्ञापन
ख़बर सुनें
मिठास की पौध से ला रहीं घर में खुशहाली
विज्ञापन

पांच समूहों की 50 से ज्यादा महिलाएं तैयार कर रही हैं गन्ने की पौध
फोटो संख्या----
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। जिले की कुछ महिलाओं ने गन्ने की पौध तैयार करके न सिर्फ अपनी तरक्की का रास्ता खोला है, बल्कि दूसरों की थाली की मिठास भी बढ़ा रही हैं। स्वयं सहायता समूह की 50 से ज्यादा महिलाएं गन्ना विभाग के सहयोग से नर्सरी तैयार कर रही हैं। इससे किसानों के साथ महिलाएं भी कमाई कर रही हैं।
अहरौला के दनियालपुर गांव निवासी मालती श्रीवास्तव ने सतगुरु स्वयं सहायता समूह का गठन किया था। उनका कहना है कि समूह गठित करने का मकसद है कि गांव की हर महिला आत्मनिर्भर बने, ताकि उन्हें कभी किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े। उनके समूह में 11 महिलाएं शामिल हैं। सभी घर का काम निबटाकर आती हैं और चार घंटे मिलजुल कर काम करके कुछ पैसे कमा लेती हैं। समूह ने 35 हजार पौध तैयार करके किसानों को उपलब्ध कराए हैं। एक पौध पर करीब तीन रुपये की लागत आती है, जिसमें डेढ़ रुपये का अनुदान मिलता है। अब तक किसान तीन आंख वाले गन्ने के टुकड़े को बीज के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। इसमें ज्यादा बीज लगता है और पैदावार भी कम होती है। समूह में एक आंख वाले पौधे को बीज की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है और वह भी पौधा बनाकर दिया जा रहा है। महिला समूहों को गन्ने का बीज गन्ना विभाग मुहैया कराता है।

क्षेत्र में सतगुरु स्वयं सहायता समूह जैसे पांच समूह गन्ने की नर्सरी तैयार करने में लगे हैं। जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल ने बताया कि गिरी बाबा स्वयं सहायता समूह (सजनी, अहिरौला), सतगुरु स्वयं सहायता समूह ( दनियालपुर), जय मां काली महिला स्वयं सहायता समूह (आराजी संकल्प, लेदौरा), मां अंबे स्वयं सहायता समूह (बनकट) व महिला प्रगतिशील स्वयं सहायता समूह (देवरा जदीद) को गन्ने के पौध बनाने का काम सौंपा गया है। इन समूहों में 50 महिलाएं शामिल हैं। पांचों समूहों ने अब तक करीब 75 हजार पौध तैयार किए हैं।
मिट्टी भरी पॉलिथीन में तैयार हो रही पौध
स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं गन्ने की गांठों को कोकोपिट (मिट्टी भरी पॉलिथीन) में डालकर पौध तैयार कर रहीं हैं। महिलाओं को एक पौध (सीडलिंग) तैयार करने के लिए 1.50 रुपया़ दिया जा रहा है। एक महिला प्रतिदिन डेढ़-दो सौ सीडलिंग तैयार कर 300-400 रुपये आसानी से कमा सकती है।
000000000000000000
शासन का जोर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है। शासन के निर्देश पर महिलाक़े स्वयं सहायता समूहों से गन्ना नर्सरी तैयार कराई जा रही है। इससे हजारों महिलाओं के लिए स्वावलंबन के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही गन्ने का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे किसानों को भी लाभ होगा। -अशर्फी लाल, जिला गन्ना अधिकारी, आजमगढ़।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00