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Varanasi: वाराणसी कमिश्नरेट के पहले पुलिस आयुक्त का 20 माह तक रहा कार्यकाल, अपराधियों और जालसाजों पर कसी नकेल

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 29 Nov 2022 10:39 AM IST
सार

इन 20 माह के कार्यकाल में पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने अपराधियों पर करारी चोट की। आर्थिक अपराधियों से लेकर भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की।

पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

एडीजी रैंक के अफसर आईपीएस ए सतीश गणेश का बतौर वाराणसी कमिश्नरेट में पहले पुलिस आयुक्त का कार्यकाल 20 माह का रहा। 26 मार्च 2021 को कमिश्नरेट गठन के दौरान 27 मार्च 2021 को उन्होंने पुलिस आयुक्त का पदभार ग्रहण किया था।



पदभार ग्रहण के दौरान लॉकडाउन फेज दो की चुनौतियों से निपटना और शहर की सुरक्षा, कानून व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर अधिक जोर रहा। इन 20 माह के कार्यकाल में पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने अपराधियों पर करारी चोट की। आर्थिक अपराधियों से लेकर भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की। वहीं, देश के भविष्य के संग खिलवाड़ करने वाले नीट सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश कर मास्टरमाइंड पीके समेत 18 से अधिक आरोपियों को जेल भिजवाया। इस कार्रवाई की गूंज प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर नॉर्थ ईस्ट तक रही।


प्रदेश और पूर्वांचल भर के हजारों निवेशकों की अरबों रुपए हड़पने वाली शाइन सिटी के खिलाफ ठप पड़ी कार्रवाई को पुलिस आयुक्त ने धार दी। धोखाधड़ी की आरोपी शाइन सिटी के कर्ता धर्ता को पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में पुलिस ने बिहार, राजस्थान, कोलकाता और नई दिल्ली से दबोचा था। जमीन, टूर पैकेज और गोल्ड स्कीम समेत अन्य लुभावने ऑफर देकर जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाली नीलगिरी इंफ्रासिट के एमडी विकास सिंह, सीएमडी रितु सिंह समेत 6 आरोपियों को जेल भिजवाया। वाराणसी में यह सबसे बड़ी कार्रवाई रही।

हाल ही में बिहार के दो कुख्यात बदमाशों मनीष सिंह और रजनीश सिंह का एनकाउंटर हुआ। दोनों बदमाश पटना कोर्ट से फरार थे और रोहनिया में दरोगा अजय यादव को गोली मारकर सर्विस पिस्टल लूट ली थी। 13 दिन के अंदर पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में कमिश्नरेट पुलिस ने दोनों को ढेर कर दिया था। एक दशक बाद वाराणसी में दोहरी मुठभेड़ हुई थी।

विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के बने साक्षी, ज्ञानवापी प्रकरण में दिखी कुशलता
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश अपने कार्यकाल में ऐतिहासिक श्रीकाशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर उद्घाटन के साक्षी बने। वहीं, संवेदनशील मामले ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी प्रकरण में उनकी कुशलता भी वाराणसी की जनता ने देखी। एक ओर कानपुर , बरेली में जहां बवाल हुआ था तो वहीं, वाराणसी में सब शांति ही शांति रहा। 

ट्रैफिक मुद्दे पर नहीं बन सकी बात
पुलिस आयुक्त के लिए वाराणसी की ट्रैफिक व्यवस्था शुरू से चुनौती रही। कार्यभार ग्रहण करने से लेकर अंतिम समय तक ट्रैफिक मुद्दे पर अभिनव प्रयोग करते रहे लेकिन सफलता हद तक नहीं मिल सकी। शहर गाहे बगाहे जाम में जूझता ही रहा।
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