Vijay Diwas 2020: 'दोस्त की शहादत याद आती है तो रात भर नींद नहीं आती', जांबाज योद्धा की जुबानी जानें कारगिल युद्ध की कहानी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 26 Jul 2020 12:29 PM IST
शहीद जयप्रकाश यादव।
शहीद जयप्रकाश यादव। - फोटो : अमर उजाला।
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आज कारगिल विजय दिवस मनाया जा रहा है। आज ही के दिन पाकिस्तान के साथ युद्ध में जीत दर्ज की थी। उस दिन देश के जवानों ने शहादत दी थी। जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उस कारगिल युद्ध के बारे में 22 ग्रेनेडियर के नायक श्रीकिशन यादव बता रहे हैं।
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1999 की गर्मियों के दिन थे। हम 22 ग्रेनेडियर रेजीमेंट में नायक के पद पर तैनात थे। मई में पाकिस्तानी सैनिकों की घुसपैठ की पुष्टि हुई। इसके बाद हमारी बटालियन को आदेश मिला कि जुबार हिल के शीर्ष पर जाकर दुश्मनों से लोहा लेना है। हम लोगों ने चढ़ाई शुरू की तो दुश्मन की तरफ से भारी गोलाबारी शुरू कर दी गई।



हम लोग पहाड़ में ही खुद को बचाते रहे और रात होने पर वापस नीचे उतरे। अगली रात हम लोगों ने फिर चढ़ाई कर दुश्मनों से मोर्चा लेना शुरू किया। इस दौरान एक बम धमाके में हमारे हाथ की एक अंगुली खराब हो गई थी। हमारे कई साथी शहीद हुए, जिसमें से आज भी हमें हमारे दोस्त गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद निवासी जयप्रकाश यादव की शहादत को लेकर बहुत दुख होता है।

यूं कहें तो जयप्रकाश की याद आती है तो फिर रात भर नींद ही नहीं आती है। हालांकि कारगिल युद्ध को लेकर आज भी मन रोमांचित हो उठता है कि हमने देश के दुश्मनों को उनकी औकात बता दी थी। हमें नीचे से ऊपर पहाड़ पर चढ़ना था, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी हम भारतीय सैनिक अपनी भारत भूमि की रक्षा के लिए जी-जान से लड़े और हमें जीत नसीब हुई।

भारतीय फौजी के जीवन की सबसे बड़ी बात यही है कि वह अपने वतन की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने में तनिक भी नहीं हिचकिचाता है। इसीलिए हमारी भारतीय सेना दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेना में से एक मानी जाती है।

बेटे भानु को भेजेंगे सेना में, करा रहे तैयारी
वाराणसी में रोहनिया क्षेत्र के दरेखू गांव निवासी श्रीकिशन (रिटायर्ड फौजी) ने बताया कि परिवार में पत्नी सितारा देवी, दो बेटे और दो बेटियां हैं। छोटे बेटे भानु को सेना में भेजेंगे और उसी के लिए तैयारी भी करा रहे हैं। भारतीय सेना सच्चे मायने में देश सेवा के लिए एक बहुत बड़ा मंच है। हमें सरकार से कोई शिकायत नहीं है। ऊपर वाले की मेहरबानी से जो कुछ भी मिला बहुत मिला। अब भी यदि भारतीय सेना की ओर से देश की सेवा का अवसर मिलेगा तो हम कभी पीछे नहीं हटेंगे।

भारत-पाकिस्तान कारगिल युद्ध : 1999
पाकिस्तान ने कश्मीर की पर्वत श्रृंखलाओं में सर्दियों में खराब मौसम के कारण छोड़ी गई भारतीय चौकियों पर गुपचुप तरीके से अपने सैनिकों को बैठा दिया। भारत सरकार को इसका पता चला तो कार्रवाई के लिए सेना को भेजा गया।

चोटियों पर बैठे पाक सैनिकों के लिए ढलानों से ऊपर बढ़ते भारतीय सैनिकों को मार गिराना बहुत आसान था। शुरू में भारतीय सैनिक काफी हताहत हुए लेकिन बाद में देश के रणबांकुरों ने रात के अंधेरे में हमले करना शुरू किया। अंतत: दुश्मन पीछे हटने पर मजबूर हो गए।

इस लड़ाई को बोफोर्स के इस्तेमाल, युवा भारतीय अफसरों और जवानों की शहादत के किस्सों, सबसे ज्यादा मीडिया कवरेज के लिए जाना गया, तो उधर पाकिस्तान सरकार की बुजदिली के लिए भी जाना गया जिसने अपने शहीदों की लाशों को भी राजनीति का मोहरा बनाया।

युद्ध की अवधि: 74 दिन
युद्ध क्षेत्र: 520 किलोमीटर
भारतीय सैनिकों की तैनाती: 20,000
पाक घुसपैठिए: 1500
शहीद हुए भारतीय सैनिक: 500 से अधिक
मारे गए घुसपैठिए: 696 से अधिक
कुल खर्च: 5000 करोड़ रुपये
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