संपूर्णानंद विवि दीक्षांत समारोह: मेधावियों को मिले स्वर्ण पदक, राज्यपाल बोलीं- भारतीय संस्कृति की आत्मा है संस्कृत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 02 Mar 2021 04:32 PM IST
राज्यपाल ने मेधावियों को बांटे पदक।
1 of 5
विज्ञापन
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 38वें दीक्षांत समारोह में 29 मेधावियों में 58 स्वर्ण पदक वितरित किए गए। बतौर मुख्य अतिथि मालदीव में पूर्व राजदूत और विदेश मंत्रालय में अपर सचिव अखिलेश मिश्र ने मेधावियों को स्वर्ण पदक वितरित कर जीवन मे सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत का भारतीय संस्कृति से अटूट संबंध है। यह विश्व कल्याण की भाषा है। देववाणी में शब्दों की उतपत्ति गुणों से होती है। देखें अगली स्लाइड्स...।
Sampoornananda University convocation: governor distributed gold medal to students said Sanskrit is not only language its Indian culture soul
2 of 5
भारत की एकजुटता की परंपरा देखनी हो तो केवल संस्कृत में ही मिलती है। अखिलेश मिश्र ने कहा कि संस्कृत की वजह से ही भारत विविधता वाला देश है। संस्कृत के प्रभाव से ही विश्व बंधुत्व की भावना विकसित होती जा रही है। दीक्षांत का अर्थ शिक्षा का अंत नही बल्कि दायित्व निर्वहन की जिम्मेदारी अब और बढ़ गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Sampoornananda University convocation: governor distributed gold medal to students said Sanskrit is not only language its Indian culture soul
3 of 5
देश की सांस्कृतिक आत्मा की रक्षा के लिए आगे आने की जरूरत है। समारोह में आचार्य परीक्षा में सर्वाधिक 10 पदक पाकर मीना कुमारी विश्वविद्यालय टॉपर रही। इसके बाद आचार्य परीक्षा में ही सुमित्रानंदन चतुर्वेदी-आशुतोष मिश्र को 5-5 पदक मिले। इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने पंडित रामयत्न शुक्ल को महामहोपाध्याय की उपाधि प्रदान की।
राज्यपाल ने मेधावियों को बांटे पदक।
4 of 5
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि संस्कृत भाषा और सनातन संस्कृति की वजह से ही भारत एकता के सूत्र में बंधा है। यह खेद का विषय है कि लंबे समय से संस्कृत भाषा उपेक्षित है। अब नई शिक्षा नीति में संस्कृत अध्ययन को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए विद्वानों को आगे आना होगा। सरकार भी संस्कृत भाषा के संवर्धन के लिए प्रयासरत है। संस्कृत केवल भाषा ही नही भारतीय संस्कृति की आत्मा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
5 of 5
नई पीढ़ी को संस्कृत के प्रति जागरूक करने की जरूरत है और इस दिशा में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की अहम भूमिका है। कुलपति प्रो.राजाराम शुक्ल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को बताया। कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव राजबहादुर ने किया।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
  • Downloads
    News Stand

Follow Us

  • Facebook Page
  • Twitter Page
  • Youtube Page
  • Instagram Page
  • Telegram
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00