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इन तीन राशियों के लिए निवेश का शुभ समय, भाग्यफल से जानें अन्य राशियों का हाल
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हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी : राम भरोसे चल रही है उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के छोटे शहरों, कस्बों व ग्रामीण इलाकों में संक्रमण तेजी से बढ़ने तथा मरीजों के इलाज में हो रही लापरवाही पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है। कोर्ट ने मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कोविड मरीज संतोष कुमार के लापता होने में डाक्टरों और मेडिकल स्टॉफ की लापरवाही को गंभीर मानते हुए अपर मुख्य सचिव चिकित्सा व स्वास्थ्य को जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को चार माह में प्रदेश के अस्पतालों में चिकित्सकीय ढांचा सुधारने और पांच मेडिकल कॉलेजों को एसजीपीजीआई स्तर का संस्थान बनाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है। 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट

लखनऊ: जीएसटी असिस्टेंट कमिश्नर संजय शुक्ला ने खुद को मारी गोली, जांच में जुटी पुलिस

गोमतीनगर विस्तार में सरयू अपार्टमेंट में रहने वाले संजय शुक्ला ने सोमवार देर रात करीब 12 बजे खुद को गोली से उड़ा लिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पड़ताल शुरू किया है। संजय शुक्ल जीएसटी असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर वाराणसी में तैनात थे। उनके घर में कुछ दिन पहले चोरी की वारदात हुई थी। जिसमें लाखों रुपये के जेवरात व नकदी साफ हो गया। वारदात के बाद ही वह वाराणसी से लखनऊ पहुंचे थे। सोमवार को उनको कार्यालय में वापस ज्वाइन करना था।

मूलरुप से आजमगढ़ के रहने वाले संजय शुक्ला जीएसटी में असिस्टेंट कमिश्नर है। उनकी तैनाती वाराणासी में है। गोमतीनगर विस्तार के सरयू अपार्टमेंट में उनका एक फ्लैट है। सोमवार रात परिवार के सभी सदस्यों ने खाना खाया। इसके बाद अपने कमरे में सोने चले गये। रात करीब 12 बजे संजय शुक्ला ने अपने लाइसेंसी असलहे से खुद को गोली मार ली। गोली की आवाज सुनकर परिवार के सदस्य कमरे की तरफ भागे। कमरे में संजय शुक्ला बेड पर खून से लथपथ पड़े थे। 

आनन-फानन में परिवारीजन उनको लेकर पास के अस्पताल गये। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पड़ताल शुरू कर दिया है। एसीपी गोमतीनगर श्वेता श्रीवास्तव के मुताबिक लाइसेंसी असलहे से गोली मारने की सूचना है। पड़ताल की जा रही है। अभी कारण के बारे में पता नहीं चल सका है।

कुछ दिन पहले हुई थी चोरी, घोषित किया था 50 हजार का इनाम
जीएसटी असिस्टेंट कमिश्नर संजय शुक्ला के घर में कुछ दिन पहले चोरी की वारदात हुई थी। वारदात के वक्त पूरा परिवार वाराणसी में था। चोरी की जानकारी होने के बाद वह लखनऊ पहुंचे थे। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दिया था। वह लगातार पुलिस के अधिकारियों के संपर्क में थे। पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर से भी इस संबंध में मुलाकात की थी।

एसीपी श्वेता श्रीवास्तव के मुताबिक रविवार को अंतिम बार बात हुई थी। उस समय उन्होंने सोमवार को वाराणसी में कार्यालय में फिर से ज्वाइन करने की बात कही थी। वहीं परिवारीजनों के मुताबिक चोरी में काफी सामान चला गया था। खुलासा कराने के लिए पुलिस से लगातार संपर्क करते रहे। उन्होंने खुलासा करने वाली टीम को अपनी तरफ से 50 हजार रुपये का इनाम देने की भी घोषणा की थी। वारदात के बाद से वह डिप्रेशन में थे। इसी डिप्रेशन उन्होंने यह कदम उठाया है। हालांकि पुलिस अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं।
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ब्लैक फंगस कर रहा वार, मेरठ में पैर रहा पसार, अब तक मिल चुके हैं 20 मरीज, तीन की  हुई मौत

कोविड-19 के साथ साथ अब धीरे-धीरे ब्लैक फंगस यानी म्यूकर माइकोसिस भी मेरठ में पैर पसारने लगा है। अब तक 20 केस मिल चुके हैं और तीन की मौत हो चुकी है। 

मेडिकल के कोविड प्रभारी डॉ. सुधीर राठी ने बताया कि जिन लोगों को कोविड-19 दौरान स्ट्रॉयड दवाएं जैसे डेक्सामेथासोन मिथाइलप्रेडनीसोलोन आदि का सेवन कराया गया है या काफी दिन तक ऑक्सीजन पर रखना पड़ा है या आईसीयू में रखा गया है, ऐसे मरीजों को ब्लैक फंगस का इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज के मरीज, कैंसर और किडनी इत्यादि के मरीजों में खतरा ज्यादा है।

आनंद अस्पताल में इन मरीजों का इलाज करने वाले डॉ. पुनीत भार्गव ने बताया कि कोरोना होने पर स्ट्रॉयड का प्रयोग बिना डॉक्टर की सलाह के न करें। कोरोना होते ही तुरंत स्ट्रॉयड शुरू न करें। यह बीमारी शुरू होने के 7 दिनों बाद डॉक्टर लक्षण देखकर शुरू करते हैं।

अपनी देखरेख में 5 से 10 दिनों के लिए देते हैं और कोरोना के हर मरीज को स्ट्रॉयड नहीं दिए जाते हैं। इसमें थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। अगर हम शुरुआत में ही खांसी, जुकाम और बुखार जैसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह ले लें तो शुरुआती लक्षणों में ही कोरोना कंट्रोल हो जाता है।

मरीज किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी से बच जाता है। लिहाजा शुरुआती लक्षणों में ही डरने और छिपाने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। 
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वाराणसी का हाल: टीकाकरण केंद्रों पर कोरोना वैक्सीन का होता रहा इंतजार, नाराज लोगों का हंगामा

वाराणसी  में कोरोना टीकाकरण को लेकर सोमवार को केंद्रों की संख्या तो बढ़ा दी गई लेकिन कई केंद्रों पर टीके का इंतजार होता रहा। अधिकांश केंद्रों पर वैक्सीन देर से पहुंचने पर लोगों ने हंगामा भी किया। इस कारण मामला शांत कराने पुलिस को पहुंचना पड़ा।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से शुरुआती दिनों में जहां शहरी और ग्रामीण इलाकों में 75 केंद्रों पर टीकाकरण की व्यवस्था की गई थी, वहीं सोमवार को संख्या बढ़ाकर 92 कर दी गई। इसमें 18 से 44 साल वालों के लिए 18 की जगह अब 26 केंद्र हो गए हैं जबकि 45 साल से अधिक के लोगों के लिए 57 से बढ़ाकर संख्या 66 कर दी गई।

सोमवार को लोग केंद्रों पर समय से पहुंच गए लेकिन वैक्सीन के लिए  इंतजार करना पड़ा। कुछ केंद्रों पर सुबह 11 तो कहीं दोपहर 12 बजे तक वैक्सीन नहीं पहुंच पाई। इस वजह से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। सोमवार को राजातालाब के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जखिनी में 230, रोहनिया में 240 और पीएचसी चिरईगांव पर 271 लोगों को टीका लगाया गया।
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आजमगढ़: पुलिस ने माना- जहरीली शराब से गई आठ की जान, अब तक हो चुकी है 39 की मौत

कोरोना का टीकाकरण
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में पिछले रविवार से जहरीली शराब से मौत का तांडव शुरू हुआ, जो अभी भी जारी है। अब तक कुल 39 लोगों की मौत हो चुकी है। मामले की जांच के लिए सोमवार को एडीजी जोन वाराणसी बृजभूषण शर्मा पहुंचे। पहली बार एडीजी ने जिले में आठ लोगों की जहरीली शराब से मौत होने की बात को स्वीकार किया।

अन्य मौतों को उन्होंने बीमारी आदि से बताया और जिलाधिकारी व एसपी को निर्देशित किया कि समाचार पत्रों में प्रकाशित मृतकों की सूची तैयार कर सभी की पड़ताल कराएं और उनकी मौत कैसे हुई है इसकी स्पष्ट रिपोर्ट तैयार करें।

बता दें कि जहरीली शराब के कारण बीते कुछ दिनों में आजमगढ़ के पवई थाना क्षेत्र में 22 तो 17 मौतें  दीदारगंज थाना क्षेत्र में हुई है। शुरू से जिले की पुलिस जहरीली शराब से मौत की घटना को छिपाने की कवायद में जुटी रही। शुरूआत के तीन दिन तक तो पुलिस न तो जहरीली शराब से जिले में मौत मान रही थी न ही जहरीली शराब की बिक्री की ही बात स्वीकार रही थी।

 
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सीएम योगी ने सहारनपुर में बताई संपूर्ण यूपी में लाॅकडाउन न लगाने की वजह, कही ये बात

सहारनपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कलक्ट्रेट परिसर स्थित इंटीग्रेटेड कोविड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि कोरोना संक्रमण को लेकर निगरानी की व्यवस्था क्या है और होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों से किस तरह फीडबैक लिया जाता है। अधिकारियों ने उन्हें यह सभी जानकारियां दीं। 

मुख्यमंत्री सोमवार को अपराह्न 1:40 बजे पुलिस लाइन में राजकीय हेलीकॉप्टर से पहुंचे। इसके बाद करीब पौने दो बजे वाया कार से कलक्ट्रेट परिसर आए। कोविड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण करते हुए उन्होंने संक्रमण की स्थिति के बारे में भी पूछा। यह भी पूछा कि होम आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना संक्रमितों को समय पर कोविड दवा किट पहुंचने की क्या व्यवस्था है और किस तरह से मरीजों से इसकी जानकारी ली जाती है।

डीएम अखिलेश सिंह ने उन्हें यहां की व्यवस्था के बारे में बताया। इस दौरान गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा, आयुष मंत्री धर्म सिंह सैनी, मंडलायुक्त एवी राजमौलि, डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल, एसएसपी डाक्टर एस चनप्पा भी मौजूद रहे। करीब 15 मिनट तक निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सर्किट हाउस की तरफ रवाना हो गए। 
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कितनी चिताएं... कितनी आहें, गंगा तू ये चुपचाप सहना, किसी से न कहना

सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड भी दसवीं के बच्चों का रिजल्ट जारी करेगा

सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड ने भी दसवीं (हाईस्कूल) का परीक्षाफल जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है। बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल की ओर से प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजकर उनके हाईस्कूल के छात्रों के छमाही एवं प्री बोर्ड के अंक वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है। निर्देश पर जिला  विद्यालय निरीक्षकों ने स्कूलों के प्रधानाचार्यों को पत्र भेजकर 18 मई तक अंक अपलोड करने के लिए कहा है। 

सचिव दिव्यकां की ओर से कहा गया है कि 18 मई तक छमाही एवं प्री बोर्ड परीक्षा के अंक वेबसाइट https://upmsp.edu.in/ पर अपलोड किए जाएं। इससे पहले सीबीएसई ने इंटरनल असेसमेंट के आधार पर दसवीं के छात्रों का रिजल्ट तैयार करने का निर्णय लिया है।

बोर्ड के एक अधिकारी की मानें तो प्रदेश के बहुत कम स्कूलों में छमाही और प्री बोर्ड परीक्षा कराई गई है। ऐसे में स्कूलों के बाद छमाही एवं प्री बोर्ड परीक्षा के अंक नहीं हैं। अब स्कूल स्कूल वाले बोर्ड की ओर से छमाही एवं प्री बोर्ड के अंक मांगे जाने के बाद जल्दबाजी में अंक तो भेज देंगे परंतु उसमें कोई सच्चाई नहीं होगी। स्कूलों के इस नियम के चलते बोर्ड परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन करने वाले बच्चों को औसत के आधार पर अंक देकर पास कर दिया जाएगा। इससे मेरिट वाले बच्चों को लाभ नुकसान होगा।
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