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पढ़ाई से पहले छात्राओं की सुरक्षा की चुनौती

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jul 2021 12:30 AM IST
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चंपावत जीजीआईसी परिसर की क्षतिग्रस्त दीवार। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत जीजीआईसी परिसर की क्षतिग्रस्त दीवार। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। बेटे बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे के जरिये छात्राओं को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके चलते काफी छात्राएं स्कूलों का रुख भी कर रही हैं। लेकिन जिला मुख्यालय के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में पढ़ाई करने वाली छात्राओं के लिए ज्ञानार्जन करने से पहले सुरक्षित रहने की चुनौती है। कॉलेज के कमरों में छिटपुट खामियां तो हैं, लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यहां इन कमरों के नजदीक कॉलेज की टूटी दीवारों की है। जिनका मलबा कमरों तक पहुंचने का अंदेशा है।
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छठीं से इंटर तक की कक्षाओं वाले जीजीआईसी में इस वक्त 390 छात्राएं हैं। कोरोना काल में लंबे वक्त तक बंद स्कूलों को दो अगस्त से खोले जाने के आदेश के बाद स्कूल प्रबंधन भी तैयारी में जुट गया है। लेकिन मूसलाधार बारिश से कॉलेज परिसर की दीवार को नुकसान हुआ है। टूटी दीवार से गिरे मलबे के मुख्य भवन और कक्षाओं के भीतर पहुंचने का अंदेशा है। इसके चलते शिक्षण कार्य पर असर पड़ सकता है। प्रधानाचार्या निधि सक्सेना का कहना है कि क्षतिग्रस्त दीवार की मरम्मत के लिए उच्चाधिकारियों से आग्रह किया गया है।

चंपावत जीजीआईसी की आपदा में क्षतिग्रस्त दीवार को ठीक करने के लिए चार लाख रुपये की बजट की मांग की गई है। छात्राओं और स्टाफ की सुरक्षा के दृष्टिगत जरूरी कदम उठाने के प्रधानाचार्या को निर्देश दिए गए हैं।
आरसी पुरोहित,
सीईओ, चंपावत।
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