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धान न खरीदने वाले कच्चा आढ़तियों के कोड होंगे निरस्त

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 06 Oct 2022 11:40 PM IST
गदरपुर में तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते किसान।
गदरपुर में तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते किसान। - फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। जिले में छह दिनों से धान खरीद न होने और पराली जलाने पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ बृहस्पतिवार को रुद्रपुर गल्ला मंडी में किसानों ने सभा की। किसानों ने धान खरीद शुरू न होने पर हाईवे पर जाम लगाने की चेतावनी दी। आरएफसी कुमाऊं भवान सिंह चलाल, जिला धान खरीद अधिकारी जयभारत सिंह व मंडी सचिव लवकेश गिरी के समझाने पर भी किसान नहीं माने। बाद में आरएफसी कुमाऊं की ओर से शुक्रवार से धान न खरीदने वाले कच्चा आढ़तियों के कोड निरस्त करने के आश्वासन पर किसान शांत हुए।

रुद्रपुर गल्ला मंडी में दोपहर करीब 12 बजे से तराई किसान संगठन की ओर से आयोजित सभा में जिलेभर के साथ ही उत्तर प्रदेश के किसान भी पहुंचे। उन्होंने धान खरीद नीति में दूसरे राज्यों के धान की खरीद न करने, जिले की सीमाओं पर सीसीटीवी लगाने और जिला प्रशासन की ओर से पराली जलाने पर प्रतिबंध का विरोध किया।

तराई किसान संगठन के अध्यक्ष तजिंदर सिंह विर्क ने कहा कि पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाना किसानों का उत्पीड़न है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को फैक्टरियों से निकलने वाली जहरीली गैसें और केमिकल नजर नहीं आ रहा है सिर्फ किसानों के पराली जलाने से उठने वाला थोड़ा धुआं दिख रहा है। विर्क ने कहा कि प्रदेश में एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू हो चुकी है लेकिन कच्चा आढ़ती किसानों का धान खरीदने को तैयार नहीं हैं।
किसान आयोग के प्रदेश उपाध्यक्ष राजपाल सिंह ने कहा कि किसानों का धान न खरीदना गंभीर समस्या है। इस पर सरकार से वार्ता की जाएगी। इसी बीच सभा में पहुंचे आएफसी कुमाऊं भवान सिंह चलाल व जिला धान खरीद अधिकारी जयभारत सिंह ने किसानों को समझाने का प्रयास किया लेकिन किसान अपनी मांगों पर अडिग रहे। किसानों ने आरएफसी कुमाऊं से कच्चा आढ़तियों व धान मिल मालिकों का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की। साथ ही मांग पूरी न होने पर हाईवे जाम करने की चेतावनी दी।
इस पर आरएफसी कुमाऊं ने किसानों को आश्वासन दिया कि शुक्रवार को बिगवाड़ा स्थित मंडी समिति परिसर समेत जिलेभर में कच्चा आढ़ती धान खरीदेंगे। उन्होंने कहा कि धान न खरीदने वाले कच्चा आढ़तियों व मिल मालिकों का कोड निरस्त कर दिया जाएगा जिसके बाद किसान शांत हुए। बाद में किसानों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन आरएफसी व एडीएम को सौंपा। इस दौरान विक्रमजीत सिंह, अमनदीप सिंह ढिल्लो, कुलदीप सिंह, हीरा सिंह, सतनाम सिंह, इकबाल सिंह, गुरजीत सिंह, जसबीर सिंह, अमृतपाल सिंह, मनजिंदर सिंह समेत कई किसान मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री को गुमराह कर रहे भ्रष्ट अधिकारी
रुद्रपुर। तराई किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष तजिंदर सिंह विर्क ने कहा कि वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ईमानदारी पर संदेह नहीं कर रहे लेकिन कुछ भ्रष्ट अधिकारी लगातार उन्हें गुमराह कर रहे हैं। इस कारण धान खरीद में गड़बड़ी होने की आशंका है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री को कई शिकायतें कीं। संवाद
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किसान बोले - हरियाणा व पंजाब की तर्ज पर मिले पराली का अनुदान
पराली को जलाने पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। यदि खेतों में धान काटने के बाद अवशेष नहीं जलाए जाएंगे तो अगली फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। - गुरनाम सिंह।
हरियाणा और पंजाब सरकार किसानों को पराली के एवज में ढाई से पांच हजार रुपये तक का अनुदान देती है। उत्तराखंड सरकार को भी किसानों को पराली का अनुदान देना चाहिए। - मक्खन सिंह।
यदि पराली को खेत में ही जोत देंगे तो इससे अगली फसल का उत्पादन कम होगा। इससे किसानों के सामने नई समस्या खड़ी जाएगी। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। - मलूक सिंह।
पराली जलाने के प्रतिबंध के आदेश के साथ ही किसानों पर गहरा संकट आ गया है। जिला प्रशासन ने करीब 10 विभागों को पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। - जगदीश सिंह।
तौल न होने से नाराज किसानों ने दिया धरना
गदरपुर। धान की तौल न होने से नाराज भारतीय किसान यूनियन से जुड़े किसानों ने अनाज मंडी में धरना दिया। बाद में डीएम को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार देवेंद्र सिंह बिष्ट को सौंपा।
भाकियू से जुड़े किसान बृहस्पतिवार को सलविंदर सिंह कलसी के नेतृत्व में अनाज मंडी पहुंचे। धान की तौल न होने से नाराज किसानों ने अनाज मंडी में दरी बिछाकर धरना शुरू कर दिया। किसानों का कहना था कि प्रशासन अपने वादे के अनुरूप धान की तौल कराने में विफल साबित हो रहा है। मंडी समिति सचिव कैलाश शर्मा से मिले व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के आश्वासन के बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया। इसके बाद किसान तहसील मुख्यालय पहुंचे और डीएम को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा।
किसानों का कहना था कि पराली फसल का 25 प्रतिशत अवशेष मात्र होता है। अवशेष को जलाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है अगर ऐसा न किया जाए तो हैरो चलाना मुश्किल हो जाता है। जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह गोराया का कहना था कि जब तक अध्यादेश नहीं बनता है तब तक किसानों को पराली जलाने से न रोका जाए अन्यथा किसान फसल अवशेषों को ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर डीएम कार्यालय पर लेकर पहुंचेगा।
इस दौरान रविंदर सिंह, साहिब सिंह, सविंदर सिंह, सुरजीत डाबर, रंजीत सिंह, अंग्रेेेेज सिंह, संदीप सिंह, चंचल सिंह, सुखविंदर सिंह बठला, जगमोहन सिंह, गुरमेल सिंह, सुबेग सिंह, बिक्रमजीत सिंह, शमशेर सिंह आदि किसान थे।
ये हैं किसानों की मांगें
धान की खरीद तुरंत शुरू कराई जाए।
पराली जलाने पर लगाई गई रोक को हटाया जाए।
प्रति एकड़ 5000 रुपये पराली एकत्र करने के लिए दिए जाएं।
बेलर की निशुल्क व्यवस्था कराई जाए।
कृषि उपकरण निशुल्क या रियायतों पर दिए जाएं।
सुपर सीडर के लिए 60 एचपी का ट्रैक्टर उपलब्ध कराया जाए।

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