संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं है

अमर उजाला

Wed, 28 September 2022

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जो सुख-शांति व्यक्ति को आध्यात्मिक शान्ति के अमृत से संतुष्ट होने पर मिलती है वो लालची लोगों को बेचैनी से इधर-उधर घूमने से नहीं मिलती...

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वह जो हमारे चिंतन में रहता है वह करीब है, भले ही वास्तविकता में वह बहुत दूर ही क्यों ना हो; लेकिन जो हमारे ह्रदय में नहीं है वो करीब होते हुए भी बहुत दूर होता है

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जब तक आपका शरीर स्वस्थ और नियंत्रण में है और मृत्यु दूर है, अपनी आत्मा को बचाने कि कोशिश कीजिए, जब मृत्यु सर पर आ जाएगी तब आप क्या कर पाएंगे?

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कोई काम शुरू करने से पहले, स्वयं से तीन प्रश्न कीजिए–मैं ये क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल होऊंगा, और जब गहराई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जाएं, तभी आगे बढ़िए

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वेश्याएं निर्धनों के साथ नहीं रहतीं, नागरिक कमजोर संगठन का समर्थन नहीं करते, और पक्षी उस पेड़ पर घोंसला नहीं बनाते जिस पे फल ना हों

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संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं है, संतोष जैसा कोई सुख नहीं है, लोभ जैसी कोई बीमारी नहीं है, और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है

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नवरात्र में जौ उगना देता है शुभ संकेत

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