चीन के नक्शे कदम पर अमेरिका: बड़ी टेक कंपनियों पर लगाम कसने की तैयारी, अमेजन, फेसबुक और गूगल की बढ़ी परेशानी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 16 Oct 2021 06:06 PM IST

सार

बड़ी टेक कंपनियों की संस्था चैंबर ऑफ प्रोग्रेस ने दोनों सीनेटरों चक ग्रैसली और एमी क्लोबुचर के बयानों की आलोचना की है। उसने दावा किया है कि प्रस्तावित बिल के जरिए उन उत्पादों पर हथौड़ा चलाने की कोशिश की जा रही है, जिन्हें उपभोक्ता पसंद करते हैं। चैंबर ऑफ प्रोग्रेस की सदस्य कंपनियों में अमेजन, फेसबुक और गूगल शामिल हैं...
अमेरिकी सीनेट
अमेरिकी सीनेट - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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चीन के बाद अब अमेरिका में भी हाई टेक बड़ी कंपनियों पर लगाम कसने की कवायद शुरू हो गई है। दोनों प्रमुख पार्टियों के सीनेटरों के एक समूह ने इस बारे में एक साझा बिल पेश करने का एलान किया है। इसका मकसद बड़ी छोटी कंपनियों को उभरने से रोकने की बड़ी कंपनियों की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। सीनेटरों ने कहा है कि वे हाई टेक क्षेत्र में एकाधिकार (मोनोपॉली) कायम होने के मौजूदा रूझान को पलटना चाहते हैं।
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सीनेट की न्यायपालिका समिति के तहत एंटी-ट्रस्ट (मोनोपॉली विरोधी) कमेटी की अध्यक्ष एमी क्लोबुचर और वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर चक ग्रैसली ने कहा है कि वे दोनों साझा तौर पर इस बारे में अगले हफ्ते एक बिल पेश करेंगे। क्लोबुचर डेमोक्रेटिक पार्टी की हैं। क्लोबुचर ने एक बयान में कहा- ‘वर्चस्व जमा चुकी डिजिटल कंपनियों में अपने उत्पादों और सेवाओं को तरजीह देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसलिए हमें ऐसी नीतियां अवश्य लागू करनी होंगी, जिससे छोटे कारोबारियों और उद्ममियों को लगे कि डिजिटल बाजार में उनके सफल होने के अवसर अभी भी मौजूद हैं।’


वेबसाइट निक्कईएशिया-कॉम के मुताबिक अगर इस बिल ने कानून का रूप ले लिया, तो अमेजन, एपल, फेसबुक और गूगल के अपने प्लेटफॉर्म्स पर अपने उत्पादों या सेवाओं और दूसरी कंपनियों के उत्पादों या सेवाओं के बीच भेदभाव करने पर रोक लग जाएगी। अभी ये कंपनियां अपने सर्च इंजन को एल्गोरिद्म के जरिए इस रूप में रखती हैं कि सर्च करने पर वहां सबसे पहले उनके अपने उत्पाद या सेवाएं ही यूजर्स को देखने को मिलते हैं।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसी हफ्ते बुधवार को अपनी एक खोजी रिपोर्ट जारी की थी। उसमें बताया गया था कि अमेजन कंपनी ने कैसे भारत में अपनी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के उत्पादों की नकल कर ली और फिर सर्च में दूसरे ब्रांड्स के ऊपर अपने उत्पादों को दिखाना शुरू किया। सीनेटर ग्रैसली ने एक अलग बयान में कहा है- ‘बड़ी कंपनियों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। अगर वे भेदभाव वाले तरीके अपनाती हैं, तो उसका समाधान हमारा बिल पेश करेगा। वह सुनिश्चित करेगा कि छोटे कारोबारियों को उन प्लेटफॉर्म पर प्रतिस्पर्धा करने के समान धरालत मिलें।’

बड़ी टेक कंपनियों की संस्था चैंबर ऑफ प्रोग्रेस ने दोनों सीनेटरों के बयानों की आलोचना की है। उसने दावा किया है कि प्रस्तावित बिल के जरिए उन उत्पादों पर हथौड़ा चलाने की कोशिश की जा रही है, जिन्हें उपभोक्ता पसंद करते हैं। चैंबर ऑफ प्रोग्रेस की सदस्य कंपनियों में अमेजन, फेसबुक और गूगल शामिल हैं। चैंबर के सीईओ ऐडम कोवासेविच ने कहा कि बिल में उन विचारों को शामिल नहीं किया गया है, जो मतदाताओं के बीच लोकप्रिय हैं। बल्कि यह कॉरपोरेट लॉबिंग का परिणाम है, जिससे प्रतिस्पर्धा में अमेरिकी उत्पादों को नुकसान होगा।  

वेबसाइट निक्कई एशिया के मुताबिक क्लोबुचर ने इस साल एंटी-ट्रस्ट के मुद्दों पर एक किताब भी प्रकाशित की है। इसमें उन्होंने कहा है कि अमेरिका में अपनाई गई नीतियों का ही नतीजा यह हुआ है कि अमेरिका बिग टेक कंपनियों को नियंत्रित रखने के मामले में अमेरिका दूसरे देशों खास कर पश्चिमी यूरोप से पिछड़ गया है।
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