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क्वैड का जवाब ‘हिमालयन क्वैड’ से देने की तैयारी में है चीन? इन देशों का मिला साथ

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 17 Apr 2021 05:50 PM IST

सार

हिमालयन क्वैड का फिलहाल रूस हिस्सा नहीं है। लेकिन उसके अलावा नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान शामिल होंगे...
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क्वैड के भागीदार देश
क्वैड के भागीदार देश - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

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विस्तार

अमेरिका के क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग (क्वैड) के जवाब में चीन अपना ‘क्वैड’ (चतुर्गुट) बनाने की तैयारी में है। अमेरिकी नेतृत्व वाले क्वैड में उसके अलावा भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। बताया जाता है कि क्वैड का गठन चीन की बढ़ती ताकत का मुकाबला करने के लिए किया गया है। यहां के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक क्वैड की पिछले महीने हुई पहली बैठक के बाद चीन ने अपना गुट बनाने की तैयारियां तेज कर दी हैं।
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अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशल स्टडीज की तरफ से प्रकाशित एक आलेख में भी ये कयास लगाया गया है कि रूस और चीन मिल कर अपना गुट बना सकते हैं। पिछले दिनों रूस और चीन के नेताओं में हुई बैठक और उसके साथ ही साझा सैनिक अभ्यासों को इसका संकेत बताया गया है। औपचारिक रूप से चीन या रूस ने ऐसे किसी गुट को बनाने की बात नहीं की है।


बल्कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पिछले हफ्ते भारत यात्रा के दौरान ये कहा कि रूस ऐसे गुटों को हानिकारक मानता है। मार्च के आरंभ में चीन के रक्षा मंत्रालय ने भी कहा था कि रूस के साथ सैनिक गठबंधन बनाने का चीन का कोई इरादा नहीं है। चीन ने कहा था कि ये दोनों देश गुटनिरपेक्षता और टकराव टालने की नीति का पालन करते हैं और वे किसी तीसरे देश को निशाना बनाने के पक्ष में नहीं हैं।

लेकिन अभी जिस हिमालयन क्वैड की चर्चा है, रूस उसका हिस्सा नहीं है। इस महीने बेलारशियन इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक रिसर्च के विश्लेषक यूरी यार्मोलिनस्की ने एक लेख में कहा कि चीन ‘हिमालय क्वैड’ (हिमालय क्षेत्र का चतुर्गुट) बनाने की तरफ जा रहा है, जिसमें उसके अलावा नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान शामिल होंगे। इसके पहले नई दिल्ली स्थित मनोहर पार्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज के रिसर्च फेलॉ जगन्नाथ पांडा ने हिमालयन क्वैड की संभावना जताई थी। पिछले नवंबर प्रकाशित एक लेख में उन्होंने इससे जुड़े मिल रहे संकेतों का जिक्र किया था।

यार्मोलिनस्की ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा है कि अभी हिमालयन क्लैड सिर्फ सिद्धांत रूप में मौजूद है। लेकिन अगर दक्षिण चीन सागर में सैनिक हस्तक्षेप हुआ या ताइवान की आजादी का समर्थन किया गया, या चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की सत्ता को सीधी चुनौती दी गई, तो यह एक हकीकत बन सकता है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रलिया इन जैसी कुछ लक्ष्मण रेखाओं को पार नहीं करते हैं, तो फिर मुमकिन है कि हिमालय क्वैड महज एक सिद्धांत ही बना रहे। यार्मोलिनस्की ने ध्यान दिलाया कि चीन ने नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के समझौते पहले से कर रखे हैं।

कुछ दूसरे जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिकी सेनाएं अगले सितंबर तक अफगानिस्तान से वापस गईं, तो उसके बाद इस क्षेत्र में नए हालात बन सकते हैं। चीन ने वहां पहले से अपनी पैठ बना रखी है। 2018 में चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि वह रक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों में अफगानिस्तान को मदद दे रहा है। 2016 से 2018 तक चीन ने अफगानिस्तान को सात करोड़ डॉलर की सहायता मुहैया कराई।

अमेरिका की जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर मार्क एन काट्ज ने कहा है कि पाकिस्तान चीन का एक उत्साही और सक्षम सहयोगी है। उन्होंने कहा कि जब तक भारत के साथ पाकिस्तान और चीन के संबंध तनावपूर्ण बने रहते हैं, तब तक इन देशों के आपसी रिश्ते मजबूत बने रहेंगे। जगन्नाथ पांडा ने ध्यान दिलाया है कि चीन कोरोना महामारी से निपटने में सहयोग के नाम पर साझा वार्ता प्रक्रिया में नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान को शामिल कर चुका है। पांडा ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि हिमालयन क्वैड के गठन का मकसद इस क्षेत्र में भारत की पहुंच को सीमित करना होगा।

पांडा का कहना है कि मुमकिन है कि आगे चल कर चीन इस गुट में रूस को भी शामिल कर ले। संभव है कि वह ईरान और टर्की को भी इसका हिस्सा बनाने की कोशिश करे। इन सभी देशों के साथ उसके मजबूत रिश्ते हैं। विश्लेषकों ने क्वैड के सदस्य देशों को सलाह दी है कि वे चीन की इस कोशिश को नजरअंदाज ना करें। ये प्रयास आगे चल कर उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

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