व्यापार घाटा बना सिरदर्द: अमेरिका के पास इस पहेली का कोई हल नहीं कि कैसे रोके चीन से आयात

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 16 Oct 2021 03:29 PM IST

सार

ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले 12 महीनों में चीन से दक्षिण कोरिया को निर्यात में 50 फीसदी, ताइवान को निर्यात में 60 फीसदी, और जर्मनी के लिए निर्यात में 61 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन इन तीनों देशों से चीन लगभग उतना ही आयात करता है, जितना वह उन्हें निर्यात करता है...
चीन
चीन - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

जनवरी 2018 में जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर व्यापार प्रतिबंध लगाए थे, उसके बाद से अमेरिका के लिए चीनी निर्यात में 31 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। एक ताजा अनुमान में कहा गया है कि अब अमेरिका औसतन हर साल चीन से 635 अरब डॉलर की चीजें खरीद रहा है। यह अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 27 फीसदी के बराबर है।
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वेबसाइट एशिया टाइम्स के एक विश्लेषण के मुताबिक वस्तु आयात के मामले में अब अमेरिका की चीन पर लगभग वैसी ही निर्भरता बन गई है, जैसा पहले गरीब देशों की धनी देशों पर होती थी। इस विश्लेषण के मुताबिक पिछले 12 महीनों में अमेरिका ने चीन से जितना आयात किया, उसके सिर्फ 30 के बराबर ही उसने चीन को निर्यात किया। इस तरह उसका व्यापार घाटा और बढ़ गया है।


ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले 12 महीनों में चीन से दक्षिण कोरिया को निर्यात में 50 फीसदी, ताइवान को निर्यात में 60 फीसदी, और जर्मनी के लिए निर्यात में 61 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन इन तीनों देशों से चीन लगभग उतना ही आयात करता है, जितना वह उन्हें निर्यात करता है। विश्लेषकों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के कारण चीनी व्यापार को फायदा हुआ है। ये महामारी सबसे पहले चीन में आई, लेकिन उसने दूसरे प्रमुख औद्योगिक देशों की तुलना में जल्दी इस पर काबू पा लिया। इसी का नतीजा है कि उसके उत्पादों पर अमेरिका लगाए गए 20 फीसदी अतिरिक्त शुल्क के बावजूद अमेरिका के लिए चीन का निर्यात बढ़ा है।

जानकारों का कहना है कि इस रूझान का दूसरा बड़ा कारण अमेरिका में सप्लाई चेन की कमजोर स्थिति है। अमेरिका में मैनुफैक्चरिंग उपकरणों को बनाने वाली कंपनियों को मिलने वाले ऑर्डर आज लौट कर 1992 के स्तर पर पहुंच गए हैं। जबकि 1999 में उन कंपनियों को अब तक के सबसे ज्यादा ऑर्डर मिले थे। ताजा विश्लेषण में बताया गया है कि 2018 में ट्रंप प्रशासन ने कॉरपोरेट टैक्स में जो भारी कटौती की, उससे भी देश में निवेश नहीं बढ़ा। बल्कि कंपनियों ने टैक्स कटौती से हाथ में आई ज्यादा रकम का इस्तेमाल शेयर बाइ-बैक (अपने ही शेयरों को शेयर होल्डर्स से खरीदने) में किया। इससे शेयर बाजार में तेजी आई, लेकिन असली अर्थव्यवस्था को कोई फायदा नहीं हुआ।

ट्रंप के दौर में लगाए गए शुल्कों को बाइडन प्रशासन ने भी जारी रखा है। लेकिन उससे अमेरिकी मैनुफैक्चरिंग उद्योग को कोई फायदा नहीं पहुंचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस हाल में अमेरिका के पास चीन से ज्यादा आयात करने के अलावा कोई चारा नहीं है। अतिरिक्त शुल्कों का सिर्फ यह असर हुआ कि चीन से आई वस्तुओं के लिए अमेरिकी उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ी। उसकी वजह से देश में महंगाई दर बढ़ी है।

एशिया टाइम्स के मुताबिक कोविड महामारी के दौरान पहले ट्रंप प्रशासन और फिर बाइडन प्रशासन ने अमेरिका वासियों को 5.8 ट्रिलियन डॉलर की नकद सहायता दी थी। इससे घर बैठे लोगों के पास पैसा आया। उसकी वजह से चीजों की मांग बढ़ी। इस बढ़ी मांग का फायदा भी चीनी निर्यातकों को हुआ है।
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