विवाद : महामारी के एक माह पहले ही संक्रमित हो गया था वुहान लैब का स्टाफ, अस्पताल में कराया इलाज

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Mon, 24 May 2021 07:08 PM IST

सार

एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि वुहान की जिस लैब में कोरोना वायरस की शुरुआत बताई जाती है, वहां के तीन कर्मचारी को तब अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जब दुनिया को कोरोना के बारे में पता नहीं था। लेकिन अब चीन ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है।
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wuhan lab - फोटो : social media
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विस्तार

कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर शक की सुई एक बार फिर चीनी प्रयोगशाला वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पर आ टिकी है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया के सामने कोरोना महामारी उजागर होने के एक माह पहले ही इस प्रयोगशाला के तीन कर्मचारी न सिर्फ बीमार पड़े थे, बल्कि उन्होंने अस्पताल में इलाज भी कराया था।
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वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित इस रिपोर्ट में प्रयोगशाला के बीमार शोधकर्ताओं की संख्या, उनके बीमार पड़ने के समय और अस्पताल जाने से जुड़ी विस्तृत जानकारियां दी गई हैं। खास बात है कि यह अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की कोरोना उत्पत्ति पर अगले चरण की जांच संबंधी चर्चा को लेकर होने वाली बैठक के ठीक पहले आई है। इसके चलते माना जा रहा है कि डब्ल्यूएचओ के लिए इसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।


खुफिया रिपोर्ट को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की प्रवक्ता ने कहा कि बाइडेन प्रशासन  कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों समेत चीन में इसकी उत्पत्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाता रहा है। अखबार के मुताबिक, कई मौजूदा और पूर्व खुफिया अधिकारियों ने प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं को लेकर अपना मत जाहिर करते हुए वायरस उत्पत्ति पर गहन जांच और अतिरिक्त सहयोग की जरूरत बताई है। हालांकि, रिपोर्ट को लेकर वॉशिंगटन में चीनी दूतावास ने अभी कोई टिप्पणी नहीं की है।

फिर जोर पकड़ेगी जांच की मांग
जानकारों का कहना है कि ताजा खुलासे के बाद प्रयोगशाला से वायरस फैलने की आशंका को लेकर डब्ल्यूएचओ के समक्ष व्यापक जांच की मांग फिर जोर पकड़ सकती है। गौरतलब है कि इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में वुहान प्रयोगशाला से वायरस लीक होने को लेकर चीन पर आरोप लगता रहा है। 
पूर्व में ट्रंप प्रशासन ने भी वुहान प्रयोगशाला से वायरस लीक होने की बात पुरजोर ढंग से उठाई थी, जिसे बीजिंग ने सिरे से खारिज कर दिया था। साथ ही चीन ने महामारी के शुरुआती दिनों से जुड़ा डाटा भी डब्ल्यूएचओ की जांच टीम को देने से इनकार कर दिया था। 

डब्ल्यूएचओ में अगले चरण पर चर्चा संभ
 अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट से पहले भी अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, ब्रिटेन और कई अन्य देशों ने मार्च में डब्ल्यूएचओ की जांच को लेकर सवाल उठाए थे और इस बारे में आगे भी जांच करने की मांग की थी। भारतीय समयानुसार मंगलवार को डब्ल्यूएचओ एक बैठक करने जा रहा है जिसमें वायरस की उत्पत्ति को लेकर अगले चरण की जांच पर चर्चा हो सकती है। माना जा रहा है कि इस खुफिया रिपोर्ट से डब्ल्यूएचओ को वायरस की उत्पत्ति के बारे काफी मदद मिल सकती है। इस रिपोर्ट को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी दिनों में विदेश मंत्रालय ने फैक्ट शीट में जारी किया था।

 डॉ. फौसी ने कहा, प्राकृतिक नहीं है वायरस
अमेरिकी वायरस विशेषज्ञ और राष्ट्रपति जो बाइडन के शीर्ष स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. एंथनी फॉसी ने कहा है कि कोरोना एक प्राकृतिक बीमारी है, यह स्वीकार नहीं किया जा सकता। एक साक्षात्कार में जब उनसे पूछा गया कि क्या यह वायरस प्राकृतिक है तो उन्होंने कहा, मैं इस पर भरोसा नहीं करूंगा। उन्होंने कहा, इसकी जांच जरूरी है कि चीन की लैब में इसकी उत्पत्ति कैसे हुई।

 ध्यान बंटाने की कोशिश कर रहा अमेरिका : अमेरिका
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, डब्ल्यूएचओ की टीम फरवरी में ही कह चुकी है कि इसके वुहान से फैलने की आशंकाएं बहुत कम हैं। चीन ने कहा, अमेरिका वुहान लैब से वायरस लीक होने के सिद्धांत को जरूरत से ज्यादा हवा दे रहा है। लगता है कि अमेरिका स्रोत खोजने को लेकर चिंतित होने के बजाय ध्यान बंटाने की कोशिश कर रहा है।

वुहान थ्योरी पर भारत का अभी फैसला नहीं
कोरोना वायरस की इस वुहान थ्योरी पर भारत ने अभी तक कोई फैसला नहीं किया है।  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव कुमार अग्रवाल ने सोमवार को कहा कि हमें अभी तक उतना ही पता है, जितना कि बाकी देशों को। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से टीमें निरीक्षण के लिए गई थीं, लेकिन वर्तमान में भारत महामारी से जूझ रहा है। हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता देश के लोगों को बचाना है। वायरस की वुहान थ्योरी को लेकर अब तक हमने कोई निर्णय नहीं किया है। भविष्य में भी इस मामले में अंतरराष्ट्रीय विचार के आधार पर देखा जाएगा।



चीन ने मिटा दिए सबूत, डब्ल्यूएचओ के हाथ लगी निराशा
बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक टीम कोरोना वायरस के तथ्यों की जांच के लिए वुहान भी गई थी, लेकिन चीन ने कुछ क्षेत्रों में जांच नहीं करने दी या फिर सभी सबूत मिटा दिए। इस जांच में डब्ल्यूएचओ के हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लग पाया, जिसके चलते यह पुष्टि नहीं हो पाई कि कोरोना वायरस वुहान की लैब से फैला है। वहीं अब वॉल स्ट्रीट जनरल की खुफिया रिपोर्ट में वुहान लैब से ही कोरोना वायरस के फैलने को लेकर खुलासा किया गया है, जिसके बाद एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि क्या वुहान से ही कोरोना वायरस की शुरुआत हुई?

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