यूरोपियन यूनियन से नाराजगी: अमेरिका और यूरोप में टकराव का एक नया मुद्दा- वेनेजुएला

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 16 Oct 2021 05:55 PM IST

सार

वेनेजुएला में क्षेत्रीय चुनाव 21 नवंबर को होंगे। ईयू ने इसके पहले आखिरी बार चुनाव निगरानी के लिए अपना दल 2006 में भेजा था। उससे वेनेजुएला में होने वाले चुनावों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने की शुरुआत हुई थी। 2018 में वेनेजुएला में राष्ट्रपति का चुनाव हुआ....
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने अगले महीने लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला में होने वाले क्षेत्रीय चुनावों की निगरानी के लिए अपना पर्यवेक्षक दल भेजने का फैसला किया है। इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ उसका एक नया टकराव पैदा होने की आशंका पैदा हो गई है। अमेरिका का आरोप है कि वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने तानाशाही कायम कर ली है। इसलिए वह वेनेजुएला में होने वाले चुनावों को मान्यता नहीं देता। जबकि ईयू ने कहा है कि वह अपना दल भेज कर प्रत्यक्ष रूप से देखना चाहता है कि वेनेजुएला में चुनाव किस हद तक स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं।
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वेनेजुएला में क्षेत्रीय चुनाव 21 नवंबर को होंगे। ईयू ने इसके पहले आखिरी बार चुनाव निगरानी के लिए अपना दल 2006 में भेजा था। उससे वेनेजुएला में होने वाले चुनावों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने की शुरुआत हुई थी। 2018 में वेनेजुएला में राष्ट्रपति का चुनाव हुआ। उसमें मादुरो जीते। लेकिन अमेरिका ने आरोप लगाया कि मादुरो ने ये चुनाव गलत तरीकों से जीता। इसलिए उस चुनाव में हारे विपक्षी उम्मीदवार को हुआन गुआइदो को उसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति के रूप में मान्यता दे दी। अमेरिका अभी भी उन्हें ही वेनेजुएला का वैध राष्ट्रपति मानता है।


ईयू के अगले महीने फिर चुनाव पर्यवेक्षक दल भेजने के फैसले से अमेरिका में नाराजगी है। इस बारे में छपी एक रिपोर्ट में अमेरिकी अखबार मयामी हेराल्ड ने लिखा है कि ईयू दल संभवतया यही एलान करेगा कि चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। उसके आधार पर मादुरो घोषणा करेंगे कि वे निष्पक्ष चुनाव में विजयी हुए हैं। टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मयामी हेराल्ड की रिपोर्ट में असल में अमेरिकी राजनयिकों की चिंताएं जाहिर हुई हैं।

अमेरिकी विश्लेषकों ने सवाल उठाया है कि अपने एक महत्वपूर्ण सहयोगी को नाराज करने की कीमत पर ईयू ने ये फैसला क्यों किया? इस बारे में ईयू के अधिकारियों का कहना है कि ईयू के दल के जाने भर से वेनेजुएला के चुनावों पर वैधता की मुहर नहीं लग जाएगी। इन अधिकारियों के मुताबिक ईयू को वेनेजुएला की राष्ट्रीय चुनाव परिषद से आमंत्रण मिला। उसमें पूछा गया था कि क्या 2005 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ईयू अपना पर्यवेक्षण दल भेज सकता है। इस पर ये राय बनी की एक दल वहां भेजना चाहिए। इन्हीं दिशानिर्देशों के आधार पर ईयू ने 2006 में अपना दल भेजा था।

ईयू के एक अधिकारी ने सीएनएन से कहा- ‘इराक, पेरू, पाकिस्तान या माली में चुनावों की निगरानी करने और वेनेजुएला में ऐसा करने के बीच कोई फर्क नहीं है। ईयू के पर्यवेक्षक दलों की मान्यता दुनिया भर में है। इन मामलों में हम अपने तर्क से चलते हैं। इस बारे में किसी और को हमें सफाई देने की जरूरत नहीं है।’

उधर इस बारे में एक सवाल पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी राय में वेनेजुएला में स्वतंत्र और निष्पक्ष क्षेत्रीय, राष्ट्रीय संसद के लिए और राष्ट्रपति चुनाव होना जरूरी है। तभी वहां मौजूदा संकट का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक समाधान निकलेगा। ईयू ने इस साल 25 जून और 14 अगस्त को अपने बयानों में कहा था कि वह इस अमेरिकी रुख से सहमत है। प्रवक्ता ने कहा- ‘अब उसने अपना दल वहां क्यों भेजने का फैसला किया है, इस बारे में ईयू के अधिकारियों से ही पूछा जाना चाहिए।’
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