Euthanasia Device: इस देश ने दी मौत की मशीन को मंजूरी, बिना दर्द एक मिनट में निकलेंगे प्राण

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 07 Dec 2021 06:59 PM IST

सार

Switzerland Approves Euthanasia Device: स्विटजरलैंड ने ताबूत के आकार की एक मशीन के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इच्छा मृत्यु चाहने वालों को यह मशीन बिना दर्द मौत की नींद सुला देगी। 
 
बिना दर्द मौत की नींद सुलाएगी यह 'सूसाइड मशीन'
बिना दर्द मौत की नींद सुलाएगी यह 'सूसाइड मशीन' - फोटो : social media
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विस्तार

इच्छा मृत्यु चाहने वालों के लिए स्विटजरलैंड ने ताबूत के आकार की एक मशीन (euthanasia device) को कानूनी मंजूरी दे दी है। इस मशीन की मदद से लोग मात्र एक मिनट में बिना दर्द के मौत की नींद सो सकेंगे। 
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बताया जा रहा है कि मशीन के अंदर ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम हो जाता है जिससे संबंधित व्यक्ति की मौत हो जाती है। इस मशीन को सूसाइड मशीन भी कहा जा रहा है। इस ताबूत रूपी मशीन को अंदर बैठकर भी चलाया जा सकता है। यह मशीन ऐसे मरीजों के लिए मददगार है जो बीमारी के कारण बोल नहीं पाते हैं या बिस्तर से हिल भी नहीं पाते हैं। 


मशीन इस तरह करेगी काम
इच्छा मृत्यु चाहने वाले को यह मशीन अपनी पसंदीदा जगह पर ले जाना होगी। इसके बाद सूसाइड मशीन का नष्ट होने योग्य कैप्सूल अलग हो जाता है। उसे ताबूत की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।इस मशीन को 'सारको' नाम दिया गया है। इसका इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति में हाइपोक्सिया और हाइपोकेनिया की स्थिति पैदा हो जाती है। यानी संबंधित व्यक्ति के टिश्यू में अपर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है और खून में कार्बन डाइऑक्साइड की कमी से मृत्यु हो जाती है।  

डॉक्टर डेथ ने दिया मशीन का विचार
बताया जा रहा है कि सूसाइड मशीन बनाने का विचार एनजीओ 'एक्जिट इंटरनेशनल' के निदेशक और 'डॉक्टर डेथ' कहे जाने वाले डॉक्टर फिलीप निट्श्के का है। 

लोग बता रहे गैस चेंबर जैसी
इसे लेकर उनकी कड़ी आलोचना भी हो रही है। लोग मशीन में इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके को गलत बता रहे हैं। उनके अनुसार यह गैस चेंबर जैसी है। यह मशीन आत्महत्या को बढ़ावा देगी। वर्तमान समय में दो प्रोटो टाइप बनकर तैयार हो गए हैं। अब एक तीसरी मशीन को बनाया जा रहा है। यह अगले साल तक तैयार हो जाएगी।

आत्महत्या करना गैर कानूनी नहीं
स्विटजरलैंड में मदद के साथ आत्महत्या करना कानूनी माना जाता है। भारत समेत कई देशों में आत्महत्या को गैर कानूनी माना गया है। पिछले साल 1300 लोगों ने इस प्रावधान के तहत आत्महत्या की। 

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