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पाकिस्तान-टीटीपी वार्ता: इमरान खान तो फेल रहे, क्या कामयाब होगी शहबाज शरीफ सरकार?

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 20 May 2022 05:15 PM IST
सार

अफगान सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने कहा- ‘इस्लामिक अमीरात की मध्यस्थता से पाकिस्तान और टीटीपी के बीच काबुल में बातचीत हुई। अफगानिस्तान का इस्लामी अमीरात अच्छी भावना के साथ बातचीत प्रक्रिया को सफल बनाने के प्रयास में जुटा है। उसे उम्मीद है कि दोनों पक्ष सहनशील और लचीला रुख अपनाएंगे।’

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

खबर है कि आतंकवादी गुट तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के साथ पाकिस्तान की नई सरकार की बातचीत का पहला दौर सकारात्मक रहा है। इस कारण टीटीपी ने युद्धविराम की अवधि 30 मई तक बढ़ाने का फैसला किया है। एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच बातचीत की मध्यस्थता अफगान तालिबान कर रहा है। बातचीत अफगानिस्तान की राजधानी में चल रही है।



पूर्व इमरान खान सरकार के साथ भी पिछले साल टीटीपी का युद्धविराम हुआ था। लेकिन बीते दिसंबर में दोनों पक्षों में बातचीत टूट गई। उसके बाद टीटीपी ने फिर हमले शुरू कर दिए। बीते महीनों में उसने कई घातक हमले पाकिस्तान के अंदर किए हैं। बताया जाता है कि पाकिस्तान में सरकार बदलने के बाद अफगान तालिबान की पहल पर फिर वार्ता शुरू हुई। टीटीपी के प्रवक्ता मोहम्मद खुरासानी ने एक बयान में इस बात की पुष्टि की है। उधर अफगान तालिबान ने इस बात की पुष्टि की की है कि दोनों पक्ष युद्धविराम की अवधि बढ़ाने पर राजी हो गए हैं।

काबुल में बातचीत

अफगान सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने कहा- ‘इस्लामिक अमीरात की मध्यस्थता से पाकिस्तान और टीटीपी के बीच काबुल में बातचीत हुई। अफगानिस्तान का इस्लामी अमीरात अच्छी भावना के साथ बातचीत प्रक्रिया को सफल बनाने के प्रयास में जुटा है। उसे उम्मीद है कि दोनों पक्ष सहनशील और लचीला रुख अपनाएंगे।’ अफगानिस्तान की तालिबान सरकार खुद को इस्लामी अमीरात कहती है। पाकिस्तान के सुरक्षा विशेषज्ञों ने अफगान तालिबान की पहल को महत्त्वपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक पिछले साल अगस्त में तालिबान का काबुल पर कब्जा होने से टीटीपी का हौसला बढ़ा और उसने पाकिस्तानी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए। तब तत्कालीन इमरान खान सरकार ने उससे बातचीत शुरू की। लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली।

टीटीपी पाकिस्तान में भी इस्लामी कानून लागू करवाना चाहता है। साथ ही उसने पाकिस्तान में कैद अपने कार्यकर्ताओं की रिहाई और कबीलाई इलाकों में पाकिस्तानी फौज की तैनाती घटाने की मांग सामने रखी है। खुरासानी के मुताबिक युद्धविराम की शुरुआत 10 मई को हुई। लेकिन इससे ज्यादा कोई ब्योरा खुरासानी ने नहीं दिया। इसलिए यह मालूम नहीं हो सका है कि बातचीत में टीटीपी और पाकिस्तान सरकार की तरफ से कौन शामिल हुआ। पाकिस्तान की सरकार या सेना ने इस बारे में अब तक कोई बयान नहीं दिया है। लेकिन सरकारी अधिकारियों ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बातचीत शुरू होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया है कि इसके लिए पाकिस्तान सरकार का एक दल काबुल गया है।

पाक सेना ने किए थे हमले

पाकिस्तान के सुरक्षा विशेषज्ञ इम्तियाज गुल के मुताबिक देश में लगातार जारी हमलों को लेकर पाकिस्तान ने सख्त रुख अपनाया। अफगान तालिबान को सख्त संदेश दिया गया कि अफगानिस्तान की जमीन से सक्रिय आतंकवादियों पर वह लगाम कसे। गुल ने कहा- ‘ताजा बातचीत पाकिस्तान की तरफ से सर्वोच्च स्तर पर दिए गए सख्त पैगाम का ही नतीजा है।’ पिछले महीने पाकिस्तान की वायु सेना ने सीमा पार कर अफगानिस्तान मौजूद आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए थे। उससे अफगान तालिबान से पाकिस्तान का तनाव काफी बढ़ गया था। लेकिन अब सभी संबंधित पक्षों ने एक बार फिर मसले का शांतिपूर्ण हल ढूंढने की कोशिश शुरू की है।

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