छोड़ी नागरिकता: पुतिन राज में 50 लाख लोग छोड़ गए रूस, आबादी घटने की समस्या से परेशान है देश

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 14 Oct 2021 07:08 PM IST

सार

जानकारों का कहना है कि रूस से लोगों के बाहर जाकर बसने का ट्रेंड सोवियत संघ के जमाने में ही शुरू हो गया था। तब लोग अधिक समृद्ध जिंदगी की तलाश में पश्चिमी देशों में जाते थे। सोवियत संघ के विघटन के बाद 1990 के दशक में ये ट्रेंड और बढ़ गया...
व्लादिमीर पुतिन
व्लादिमीर पुतिन - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पिछले 20 साल के शासनकाल में 50 लाख रूसी देश छोड़ कर बाहर चले गए हैं। मास्को स्थित पोर्टल टाकी डेला के एक अध्ययन से ये बात सामने आई है। ये अध्ययन रूस की सरकारी सांख्यिकी एजेंसी रोसस्टैट के आंकड़ों के आधार पर किया गया। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक कम से कम 50 लाख लोगों ने रूसी नागरिकता छोड़ी, इस बात के सबूत हैँ। लेकिन यह असली संख्या नहीं है। असल कितने लोग देश छोड़ गए, उसकी कोई पक्की जानकारी मौजूद नहीं है।
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लेकिन कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ताजा अध्ययन से सामने आई जानकारी चिंता का पहलू नहीं है। अमेरिकी थिंक टैंक कारनेगी की रूसी शाखा- कारनेगी मॉस्को सेंटर से जुड़े विश्लेषक आंद्रेई कोलेशिनिकोव ने यहां के अखबार द मॉस्को टाइम्स से कहा- ‘जो संख्या बताई गई है, वह असलियत से ज्यादा है। इसमें उन रूसी नागरिकों को भी शामिल किया गया है, जो विदेशों में रहते हैं या जिन्होंने विदेशों में जायदाद खरीद ली है।’ कोलेशिनिकोव ने कहा कि राजनीतिक कारणों से देश से बाहर जाने वालों और अधिक उपभोग की संभावना के कारण बाहर जाने वालों के बीच फर्क किया जाना चाहिए।


जानकारों का कहना है कि रूस से लोगों के बाहर जाकर बसने का ट्रेंड सोवियत संघ के जमाने में ही शुरू हो गया था। तब लोग अधिक समृद्ध जिंदगी की तलाश में पश्चिमी देशों में जाते थे। सोवियत संघ के विघटन के बाद 1990 के दशक में ये ट्रेंड और बढ़ गया।

लेकिन ताजा अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा संख्या में रूसी 2016 से 2019 के बीच देश से बाहर गए। इस बीच तीन लाख लोग विदेश जाकर बसे। टाकी टेला ने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के आधार पर बताया है कि फिलहाल एक करोड़ से अधिक रूसी विदेशों में रह रहे हैं। इससे ज्यादा बड़ी संख्या में सिर्फ भारत और मेक्सिको के लोग विदेशों में हैं।

विश्लेषकों ने कहा है कि इस समय रूस सरकार देश की आबादी बढ़ाने की नीति पर चल रही है। इसके लिए दंपतियों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। रूस में जनसंख्या रिप्लेसमेंट दर 1990 के दशक में ही उस सीमा से नीचे चली गई थी, जिसके बाद असल में आबादी घटने लगती है। जब रूस इस चुनौती का सामना कर रहा है, वैसे मौके पर बड़ी संख्या में रूसियों का विदेश जाकर बसना सरकार के लिए चिंता का विषय है।

इस साल अप्रैल में राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था- ‘रूसी लोगों को अपने देश में बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।’ लेकिन थिंक टैंक लेवाडा के एक सर्वे से कुछ समय पहले ये सामने आया था कि कोरोना महामारी से बढ़ी दिक्कतों के बीच अब रिकॉर्ड संख्या में रूसी विदेश जाकर बसने की इच्छा जता रहे हैं। सर्वे के मुताबिक अब रूस के 20 फीसदी नागरिक ऐसी इच्छा रखते हैं।
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