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जर्मनी के नौसेना प्रमुख का इस्तीफा: भारत में अपने देश के रुख के खिलाफ जाकर यूक्रेन संकट-क्रीमिया पर बोले, पुतिन की तारीफ की थी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 23 Jan 2022 05:17 AM IST

सार

श्योनबाख ने रूस और यूक्रेन संकट के साथ क्रीमिया पर दिए अपने बयान को लेकर सोशल मीडिया पर खेद भी जताया है। इसी के साथ उन्होंने अपना इस्तीफा जर्मनी की रक्षा मंत्री क्रिस्टीन लैंब्रेख्त को भेज दिया।
जर्मनी के नौसेना प्रमुख के. आचिम श्योनबाख ने भारत में दो दिन पहले कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।
जर्मनी के नौसेना प्रमुख के. आचिम श्योनबाख ने भारत में दो दिन पहले कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। - फोटो : Twitter/@IDSAIndia
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विस्तार

जर्मनी के नौसेना प्रमुख के एचिम शॉनबाख ने हाल ही में भारत में एक कार्यक्रम के दौरान अपने ही देश की नीतियों के खिलाफ जाकर यूक्रेन संकट पर उल्टा बयान दिया था। साथ ही उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तारीफ करते हुए उन्हें सम्मान देने की बात कही थी। अपने नौसेना प्रमुख के ये बयान जर्मन सरकार को कुछ खास रास नहीं आए हैं, जिसके बाद श्योनबाख को रविवार को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है। 

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शॉनबाख ने रूस और यूक्रेन संकट के साथ क्रीमिया पर दिए अपने बयान को लेकर सोशल मीडिया पर खेद भी जताया है। इसी के साथ उन्होंने अपना इस्तीफा जर्मनी की रक्षा मंत्री क्रिस्टीन लैंब्रेख्त को भेज दिया और खुद को ड्यूटी से तत्काल बर्खास्त करने की मांग रख दी। नौसेना प्रमुख ने बताया कि उनकी इस मांग को रक्षा मंत्री ने मान भी लिया है। 


भारत में एक कार्यक्रम के दौरान दिया था जर्मनी की नीति के उलट बयान
शॉनबाख जर्मन नौसेना प्रमुख के तौर पर शुक्रवार को नई दिल्ली में मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस में रखे गए एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। यहां उन्होंने यूक्रेन संकट पर जर्मनी और यूरोप के रुख से इतर जाते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तारीफ की थी। उनके बयान का जो वीडियो यूट्यूब पर वायरल हुआ था, उसमें श्योनबाख यह भी कहते सुने गए थे कि रूस एक पुराना और अहम देश है। 

इतना ही नहीं अपने बयान में जर्मनी के नौसेना प्रमुख ने कहा था कि यूक्रेन में रूस की कार्रवाई से सख्ती से निपटना चाहिए। हालांकि, उन्होंने क्रीमिया पर पश्चिमी देशों की नीति के खिलाफ जाते हुए यह भी कह दिया था कि रूस द्वारा कब्जाए गए क्रीमिया प्रायद्वीप का मामला अब हाथ से निकल चुका है। उन्होंने कहा था, "वह (क्रीमिया) जा चुका है और अब कभी वापस नहीं आएगा। ये एक तथ्य है।" 

क्रीमिया और यूक्रेन संकट पर ये है यूरोप-अमेरिका का रुख
गौरतलब है कि जर्मन नौसेना प्रमुख का क्रीमिया पर दिया बयान सीधे तौर पर यूरोप-अमेरिका के रुख के उलट है। वॉशिंगटन और पश्चिमी देशों का कहना है मॉस्को ने 2014 में यूक्रेन पर हमला कर क्रीमिया प्रायद्वीप पर अवैध तरीके से कब्जा कर लिया था। इसलिए क्रीमिया को यूक्रेन को लौटाया जाना चाहिए। 

इसके अलावा यूक्रेन संकट को लेकर भी अमेरिका-यूरोप अपना रुख साफ कर चुके हैं। दोनों ने ही रूस पर आरोप लगाया है कि वह यूक्रेन पर हमला करने के लिए साजिश रच रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन तो यहां तक कह चुके हैं कि व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन पर कब्जा कर उसे एक बार फिर सोवियत संघ के दौर का रूप देना चाहते हैं। 

तानाशाहों और हत्यारों को पैसा दे रहा है चीन : जर्मन नौसेना प्रमुख
जर्मनी नौसेना के प्रमुख वाइस एडमिरल के एचिम शॉनबाख ने कहा है कि चीन दुनिया के तानाशाहों और हत्यारों को पैसा दे रहा है ताकि वो अपने देश के संसाधन चीन के हवाले कर दें। शॉनबाख भारत यात्रा पर हैं और यहां मनोहर परिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस द्वारा आयोजित एक संवाद सत्र के दौरान शुक्रवार को उन्होंने यह बात कही। चीन को एक आधिपत्यवादी ताकत करार देते हुए उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने के लिए पैसे और ताकत का इस्तेमाल कर रहा है। वह कुछ देशों के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रहा है और इन देशों के साथ निपटने में छिपे एजेंडे से काम कर रहा है।

चीन द्वारा तकनीक की चोरी का उदाहरण देते हुए उन्होंने जर्मनी की कूका रोबोटिक्स की चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस कंपनी का एक निजी चीनी कंपनी ने अधिग्रहण कर लिया और इस तरह से पूरी तकनीक चीन के पास चली गई और चीन इसके बदले किसी को कोई भुगतान भी नहीं कर रहा।

बयान को लेकर फंसे 
हालांकि शॉनबाख के इस बयान को लेकर जर्मनी में विवाद हो गया है। शनिवार को वाइस एडमिरल शॉनबाख से जर्मन रक्षा मंत्रालय ने उनकी टिप्पणी को लेकर जवाब मांगा। जर्मनी के बाइल्ड समाचार पत्र ने लिखा है कि शॉनबाख की टिप्पणी जर्मन सरकार का आधिकारित रुख नहीं है। शॉनबाख को इस टिप्पणी को लेकर इंस्पेक्टर जनरल के सामने सफाई देने का मौका दिया गया है। दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास ने भी इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया है।

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