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China heatwave: गर्मी से त्रस्त चीन करा रहा कृत्रिम बारिश, यांगत्जी नदी का एक हिस्सा सूखा

एजेंसी, शंघाई। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 18 Aug 2022 01:39 AM IST
सार

चीन में गर्मी का सबसे ज्यादा असर उद्योगों पर पड़ा है। चीन के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में सूखे की स्थिति की वजह से जलाशयों में पानी की कमी हो गई है जिससे पनबिजली का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके बाद बिजली की कटौती की जा रही है।

भीषण गर्मी से चीन के लोग त्रस्त।
भीषण गर्मी से चीन के लोग त्रस्त। - फोटो : iStock
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विस्तार

भीषण गर्मी से त्रस्त चीन में लोग बेहाल हैं। चीन की यांग्त्जी नदी का एक हिस्सा पूरी तरह सूख गया है। रिकार्ड तोड़ गर्मी के चलते फसलों और पशुओं को भारी नुकसान हो रहा है। ऐसे में प्रशासन ने कृत्रिम बारिश की तैयारी शुरू कर दी है। 

मध्य चीन के हुबेई प्रांत में एक व्यापक मौसम संशोधन कार्यक्रम की घोषणा की गई है। यहां बारिश को प्रेरित करने के लिए बादलों में सिल्वर आयोडाइड की छड़ें चलाने के लिए विमानों को तैनात किया गया है। यांग्त्जी के अन्य क्षेत्रों में भी कृत्रिम बारिश की तैयारी है, लेकिन बादलों के पतले होने के कारण कुछ सूखा प्रभावित हिस्सों में कार्यक्रम को रोक दिया गया है।



मौसम वैज्ञानिकों ने बुधवार को राष्ट्रीय जलवायु केंद्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, चीन में गर्मी का कहर 64 दिनों तक चला है। 1961 के बाद से यह सबसे लंबी हीटवेव है। 1,680 मौसम स्टेशनों का डाटा एकत्र किया है, जिन्होंने 35 डिग्री सेल्सियस (95 डिग्री फ़ारेनहाइट) से ऊपर तापमान दर्ज किया और 1,426 स्टेशनों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया। कुल 262 स्टेशनों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया जो कि एक रिकॉर्ड भी है। चीन के उत्तर-पश्चिमी हुबेई प्रांत के झुशान काउंटी के एक मौसम केंद्र में तापमान 44.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। चोंगकिंग की दक्षिण-पूर्वी नगर पालिका ने 44.5 डिग्री सेल्सियस, उत्तरी हेबेई प्रांत के लिंगशॉ काउंटी में 44.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया।

गर्मी के चलते चीन में कई उद्योग बंद
चीन में गर्मी का सबसे ज्यादा असर उद्योगों पर पड़ा है। चीन के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में सूखे की स्थिति की वजह से जलाशयों में पानी की कमी हो गई है जिससे पनबिजली का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके बाद बिजली की कटौती की जा रही है। सिचुआन प्रांत में सौर पैनल निर्माताओं के साथ ही सीमेंट और यूरिया उत्पादन करने वाली कंपनियों को बंद कर दिया गया है। उन्हें पांच दिन तक बिजली की बचत करने का निर्देश दिया गया है।

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