जयशंकर मॉस्को में: व्याख्यान में कहा- चीन ने सीमा समझौतों का पालन नहीं किया, रिश्तों की बुनियाद गड़बड़ाई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 08 Jul 2021 04:29 PM IST

सार

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर तीन दिनी रूस यात्रा पर मास्को में हैं। गुरुवार को उन्होंने एक व्याख्यान में भारत-रूस और भारत-चीन संबंधों पर खुले रूप से विचार रखे। 
 
विदेश मंत्री एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : twitter.com/DrSJaishankar
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विस्तार

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तीन दिनी रूस यात्रा पर मॉस्को पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक व्याख्यान में कहा कि पिछले एक साल से भारत-चीन संबंधों को लेकर बहुत चिंता उत्पन्न हुई है। बीजिंग सीमा मुद्दे को लेकर समझौतों का पालन नहीं कर रहा है, इस वजह से द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद 'गड़बड़ा' रही है। 

मॉस्को में 'प्राइमाकोव इंस्टीट्यूट ऑफ वर्ल्ड इकनॉमी एंड इंटरनेशनल रिलेशंस' में भारत और चीन के संबंधों के बारे में एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा, 'मैं कहना चाहूंगा कि बीते 40 साल से चीन के साथ हमारे संबंध बहुत ही स्थिर थे, चीन दूसरा सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार के रूप में उभरा। लेकिन बीते एक वर्ष से, इस संबंध को लेकर बहुत चिंता उत्पन्न हुई क्योंकि हमारी सीमा को लेकर जो समझौते किए गए थे चीन ने उनका पालन नहीं किया।


45 साल बाद सीमा पर झड़प हुई
जयशंकर ने कहा कि '45 साल बाद, वास्तव में सीमा पर झड़प हुई और इसमें जवान मारे गए और किसी भी देश के लिए सीमा का तनावरहित होना, वहां पर शांति होना ही पड़ोसी के साथ संबंधों की बुनियाद होता है। इसीलिए बुनियाद गड़बड़ा गई है और संबंध भी।'

बता दें, पिछले वर्ष मई माह की शुरुआत से पूर्वी लद्दाख में कई स्थानों पर भारत और चीन के बीच सैन्य गतिरोध बना। कई दौर की सैन्य और राजनयिक बातचीत के बाद फरवरी में दोनों ही पक्षों ने पैंगांग झील के उत्तर और दक्षिण तटों से अपने सैनिक और हथियार वापस बुला लिये। विवाद के स्थलों से सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों के बीच अभी वार्ता चल रही है। भारत हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देपसांग से सैनिकों को हटाने पर विशेष तौर पर जोर दे रहा है। 

सेना के अधिकारियों के मुताबिक, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर ऊंचाई पर स्थित संवेदनशील क्षेत्रों में प्रत्येक पक्ष के अभी करीब 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं। विवाद के बाकी के स्थलों से सैनिकों की वापसी की दिशा में कोई प्रगति अब नजर नहीं आ रही है, क्योंकि चीनी पक्ष ने 11वें दौर की सैन्य वार्ता में अपने रवैये में कोई नरमी नहीं दिखाई है।

जयशंकर नौ जुलाई को मॉस्को में रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता इस दौरान तमाम द्विपक्षीय मसलों पर चर्चा करेंगे।  दिल्ली में रूसी दूतावास ने बताया कि दोनों नेता राजनीति मसलों के अलावा सुरक्षा, व्यापार, आर्थिक मसलों के अलावा तकनीकी सैन्य सहयोग, विज्ञान, संस्कृति व मानवीय पहलुओं पर विचार विमर्श करेंगे। 

दोनों मंत्री भारत-रूस रिश्तों के मुख्य दिशा-निर्देशों और पूर्व में हुए समझौतों, आगामी अनुबंधों को लेकर भी बातचीत करेंगे। वे यूएन, ब्रिक्स, एससीओ में सहयोग के साथ ही बड़े वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। जयशंकर व लावरोव अफगानिस्तान में राजनीतिक प्रक्रिया, सीरिया में समझौते और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मसलों पर भी विचार-विमर्श करेंगे। 
 

भारत-चीन के बीच परमाणु होड़ नहीं
भारत व चीन के बीच परमाणु हथियारों की होड़ की संभावना से जुड़े एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने इसे खारिज करते हुए कहा कि चीन के परमाणु कार्यक्रम का विकास भारत से कहीं अधिक बड़े पैमाने पर है। उन्होंने कहा, 'मैं नहीं मानता कि भारत और चीन के बीच परमाणु हथियारों की होड़ है। चीन 1964 में परमाणु शक्ति बन गया था जबकि भारत 1998 में।'

भारत-रूस के संबंध दुनिया के सबसे प्रमुख स्थिर संबंधों में से एक 
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और रूस के संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में सबसे प्रमुख स्थिर रिश्तों में से एक हैं और भारत वार्षिक द्विपक्षीय शिखर-सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के स्वागत को उत्सुक है।

जयशंकर ने कहा कि इन रिश्तों को कई बार हल्के में लिया जाता है। उन्होंने कहा कि इन संबंधों का सतत रूप से समृद्ध होना एक बड़ा कारक है। उन्होंने कहा, 'इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत और रूस के संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में सबसे स्थिर संबंधों में से एक हैं। जहां तक द्विपक्षीय संबंधों की बात है, कई बदलाव हुए हैं और समय-समय पर कुछ मुद्दे रहे हैं। लेकिन अंततोगत्वा भू-राजनीति का तर्क इतना अकाट्य है कि हम इन बदलावों को महज छोटी-मोटी बात समझकर याद रखते हैं।'

मोदी-पुतिन के बीच 19 बार मुलाकात
जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 2014 से अब तक 19 बार मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने कहा, 'यह तथ्य अपने आप में काफी कुछ बयां करता है। हम निश्चित रूप से वार्षिक द्विपक्षीय शिखर-सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पुतिन के भारत में आगमन पर स्वागत को लेकर उत्सुक हैं।
 
 

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