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Japan: बच्चे कम पैदा होने से मुसीबत में फंसा जापान, शिशुओं के जन्म लेने की संख्या में रिकॉर्ड गिरावट

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 04 Dec 2022 04:09 PM IST
सार

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल आठ लाख 11 हजार बच्चे पैदा हुए थे। यह भी एक रिकॉर्ड था। लेकिन तब माना गया था कि यह कोरोना महामारी का असर है। लेकिन ताजा आंकड़ों से जाहिर हुआ है कि ये ट्रेंड और आगे बढ़ गया है। 

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

जापान में इस साल शिशुओं के जन्म लेने की संख्या में रिकॉर्ड गिरावट आई है। इससे यह आशंका और गहरा गई है कि जापान की जनसंख्या अनुमान से पहले ही घट कर दस करोड़ के नीचे आ जाएगी। 



जून 2021 से मई 2022 तक के 12 महीनों में जापान में 7,98,561 शिशुओं का जन्म हुआ। स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्रालय के मुताबिक किसी भी 12 महीनों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब आठ लाख से कम शिशुओं का जन्म हुआ हो।


मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल आठ लाख 11 हजार बच्चे पैदा हुए थे। यह भी एक रिकॉर्ड था। लेकिन तब माना गया था कि यह कोरोना महामारी का असर है। लेकिन ताजा आंकड़ों से जाहिर हुआ है कि ये ट्रेंड और आगे बढ़ गया है। 

इस वर्ष के पहले छह महीनों में पूरे जापान में कुल 3,67,232 बच्चों का जन्म हुआ। 2021 की पहली छमाही की तुलना में यह पांच प्रतिशत कम है। इस साल के पहले नौ महीनों में पांच लाख 99 हजार शिशु पैदा हुए हैं। यह 2021 के पहले नौ महीनों की तुलना में 4.9 प्रतिशत कम है।

वैसे जापान में जन्म दर की गिरावट का एक लंबा ट्रेंड बन चुका है। पिछले एक दशक में हर वर्ष बच्चों के जन्म लेने में 2.5 फीसदी की गिरावट आ रही थी। लेकिन संकेत हैं कि पिछले दो वर्षों में गिरावट की ये दर दोगुनी हो गई है।

टोक्यो स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन एंड सोशल सिक्युरिटी रिसर्च ने पहले अनुमान लगाया था कि साल 2053 तक जापान की आबादी घट कर दस करोड़ के नीचे आ जाएगी। लेकिन अब ऐसा लगता है कि ऐसा उससे काफी पहले हो जाएगा।
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जापान में प्रति महिला जन्म दर रिप्लेसमेंट रेट से काफी नीचे गिर चुकी है। शोध संस्थान दाइ-इची लाइफ रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़े विशेषज्ञ तकुया होशिनो के मुताबिक ये दर अभी 1.27 है। जबकि आबादी के स्थिर रहने के लिए जरूरी दर 2.1 मानी जाती है। 

ताजा रुझान से जापान में श्रमिकों की कमी होने की आशंका और गहरा गई है। किसी भी समाज में कामकाजी उम्र के लोगों की उचित संख्या वहां की जन्म दर पर निर्भर करती है। कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या घटने पर इलाज, पेंशन आदि जैसी सामाजिक सुरक्षाओं को चलाना मुश्किल हो जाता है। 

जनसंख्या विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना महामारी के काल में कई देशों में जन्म दर में भारी गिरावट आई है। उनमे जापान के अलावा दक्षिण कोरिया और इटली भी शामिल हैं। लेकिन अमेरिका और फ्रांस में जन्म दर बढ़ने की खबर है।

यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो में एसोसिएट प्रोफेसर मिकितो मसुदा ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘गिरती जन्म दर रोकने के लिए सरकार क्या उपाय करती है और लिंग आधारित श्रम विभाजन की क्या स्थिति मौजूद है, ये इस मामले में निर्णयक पहलू हैँ।’

टोक्यो स्थित चुओ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर मेसाहीरो यामादा ने इसी वेबसाइट से कहा- ‘अगले 130 वर्षों तक मां बनने की उम्र वाली महिलाओं की संख्या घटती जाएगी। इससे जन्म दर गिरने का एक दुश्चक्र बन जाएगा। 30 साल बाद जापान में हर वर्ष लगभग पांच लाख बच्चों का ही जन्म होगा।’

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