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एक तिहाई से ज्यादा भोजन हो जाता है बर्बाद, बचाएं तो भुखमरी से निबटना होगा आसान

यूएन हिंदी समाचार Published by: Nilesh Kumar Updated Tue, 15 Oct 2019 10:53 PM IST
सांकेतिक तस्वीर
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संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन की नई रिपोर्ट के अनुसार मानव उपभोग के लिए पैदा किया जाने वाला एक तिहाई से ज्यादा भोजन या तो बर्बाद हो जाता है या फिर उसका नुकसान होता है। इस रिपोर्ट में ऐसे समाधान भी पेश किए गए हैं, जिन्हें अपनाए जाने से असरदार ढंग से भोजन की विशालकाय बर्बादी रुक सकती है। इसके साथ-साथ भुखमरी से निपटने और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

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यूएन एजेंसी की नई रिपोर्ट 'द स्टेट ऑफ़ फ़ूड एंड एग्रीकल्चर 2019' के अनुसार उत्पादन के बाद भोजन का नुकसान और उसकी बर्बादी खेतों में होने वाली गतिविधियों, भंडारण और उसकी ढुलाई के दौरान होती है। 


यूएन एजेंसी के महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने रिपोर्ट की प्रस्तावना में लिखा है कि एक ऐसे समय जब हम भोजन की बर्बादी रोकने के प्रयासों में प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहे हैं, हमारे प्रयास तभी असरदार हो सकते हैं जब समस्या के प्रति हमारी गहन समझ हो। हम भोजन की बर्बादी कैसे स्वीकार कर सकते हैं जब 82 करोड़ से ज्यादा लोग दुनिया में हर दिन भूखे रहते हैं।

भोजन की बर्बादी और नुकसान को रोकने से खाद्य प्रणाली की दक्षता को बढ़ाने और खाद्य उत्पादन से जुड़े खर्च को कम करने के साथ-साथ कई टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिल सकती है।

इन लक्ष्यों में टिकाऊ जल प्रबंधन (एसडीजी-6), जलवायु परिवर्तन (एसडीजी-13), समुद्री संसाधन (एसडीजी-14) और पारिस्थितिकी तंत्र, वन जैवविविधता (एसडीजी-15) सहित अन्य लक्ष्य शामिल हैं।

रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया है कि खाद्य आपूर्ति श्रृंखला (फ़ूड सप्लाई चेन) के हर चरण में भोजन बर्बादी को ध्यानपूर्वक मापा जाना चाहिए और इसे सुनिश्चित करने के लिए एक नई पद्धति भी साझा की गई है ताकि सप्लाई चेन में उन चरणों की ख़ासतौर पर पहचान की जा सके जहां नुकसान ज्यादा होता है।

लक्षित कार्रवाई की पहचान

रिपोर्ट बताती है कि एक ही प्रकार के भोजन की बर्बादी का स्तर विश्व में क्षेत्रों के हिसाब से बदल जाता है और जहां बर्बादी की मात्रा ज्यादा है, वहां उचित उपायों के जरिए उसे रोका जा सकता है।

अनाज और दलहन की तुलना में सप्लाई चेन में फलों और सब्जियों का नुकसान और बर्बादी आम तौर पर ज्यादा होती है। औद्योगिक देशों की तुलना में निम्न आय वाले देशों में ताजा फलों और सब्जियों का नुकसान होने का मुख्य कारण वहां बदहाल बुनियादी ढांचे को बताया गया है।

ऐसे कई देशों में भंडारण के समय बड़ी मात्रा में भोजन का नुकसान होता है, क्योंकि वहां ठंडा वातावरण प्रदान करने वाले गोदामों सहित भंडारण की अन्य पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। 

अधिकांश उच्च-आय वाले देशों में भंडारण की पर्याप्त सुविधा होने के बावजूद नुकसान होता है, क्योंकि कई बार सही तापमान का ख़याल नहीं रखा जाता, गोदामों में तकनीकी खराबी पेश आती है या फिर जरूरत से ज्यादा मात्रा में भोजन रखा जाता है।

जिन चरणों पर भोजन की बर्बादी का पैमाना सबसे अधिक है वे खाद्य सुरक्षा पर सबसे अधिक असर पड़ने के कारण हैं जिसके आर्थिक नतीजे भी होते हैं। यह खुदरा और उपभोक्ता के स्तर पर पर होने वाली भोजन की बर्बादी को कम करने की अहमियत को भी दर्शाता है।

प्रोत्साहक नीतियों की दरकार

रिपोर्ट में देशों से अनुरोध किया गया है कि सभी चरणों में भोजन के नुक़सान और उसकी बर्बादी के मूल कारणों की रोकथाम के लिए प्रयास तेज़ किए जाने चाहिए। इसके लिए जरूरी नीतियों के लिए सुझाव भी प्रदान किए गए हैं। इस नुक़सान और बर्बादी को रोकने में काफी लागत आती है।

यही वजह है कि किसान, आपूर्तिकर्ता और उपभोक्ता बर्बादी को रोकने के लिए तभी क़दम उठाएंगे जब उससे होने वाला फ़ायदा इन प्रयासों की कीमत से ज्यादा हो। सप्लाई चेन में शामिल सभी हिस्सेदारों को प्रोत्साहन देने के लिए ऐसे विकल्पों की पहचान करनी होगी जिसे अपनाने से उन्हें होने वाले नेट फायदे में वृद्धि हो या मौजूदा फायदों के बारे में जानकारी मुहैया कराई जाए।

भोजन की बर्बादी को रोकने के प्रयासों में खर्च के अलावा  भी अक्सर कई अन्य अवरोधों का सामना करना पड़ता है। विकासशील देशों में ऐसे उपाय लागू करने में बड़ी लागत आती है जो निजी क्षेत्र और छोटे व मझोले किसानों के लिए मुश्किल का सबब बनती है।

इस समस्या पर पार पाने के लिए कर्ज की आसान उपलब्धता को अहम समझा गया है। रिपोर्ट में भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए अपनाई जाने वाली नीतियों को स्पष्ट और सुसंगत बनाने के साथ-साथ उनके मूल्यांकन और समीक्षा की अहमियत रेखांकित की गई है ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
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