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Nepal Politics: नेपाल में लेफ्ट गठबंधन बनाने की लॉबिंग से राजनीतिक असमंजस गहराया

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 29 Nov 2022 05:48 PM IST
सार

Nepal Politics: मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक माओइस्ट सेंटर को इस बात को लेकर नाराजगी है कि आम चुनाव के दौरान नेपाली कांग्रेस अपने वोट उसके उम्मीदवारों को ट्रांसफर करवा पाने में नाकाम रही। इससे कई ऐसी सीटें माओइस्ट सेंटर नहीं जीत पाई, जिनकी उसने नेपाली कांग्रेस के समर्थन के भरोसे उम्मीद जोड़ी हुई थी...

Nepal Politics: पुष्प कमल दहल के साथ नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा
Nepal Politics: पुष्प कमल दहल के साथ नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

नेपाल में ‘लेफ्ट एकता’ की मुहिम जोर पकड़ रही है। खबर है कि सत्ताधारी गठबंधन में शामिल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) का एक धड़ा पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की पार्टी के साथ गठजोड़ करने की लॉबिंग में जुट गया है। माओइस्ट सेंटर के महासचिव देव गुरुंग इस लॉबिंग में शामिल हैं। उधर ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के रसूखदार नेता पृथ्वी सुब्बा गुरुंग अपनी पार्टी के भीतर ऐसे नए गठबंधन की संभावना पर चर्चा चला रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक माओइस्ट सेंटर इस बात को लेकर नाराजगी है कि आम चुनाव के दौरान नेपाली कांग्रेस अपने वोट उसके उम्मीदवारों को ट्रांसफर करवा पाने में नाकाम रही। इससे कई ऐसी सीटें माओइस्ट सेंटर नहीं जीत पाई, जिनकी उसने नेपाली कांग्रेस के समर्थन के भरोसे उम्मीद जोड़ी हुई थी। नतीजा यह हुआ है कि 2017 के आम चुनाव की तुलना में इस बार माओइस्ट सेंटर की ताकत घट कर आधी रह गई है।

इसके बावजूद पार्टी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में बने रहना चाहते हैं। जबकि देव गुरुंग और कई दूसरे नेताओं की राय है कि माओइस्ट सेंटर को नई सरकार बनाने के क्रम में यूएमएल से बातचीत शुरू करनी चाहिए।   

यूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने पिछले हफ्ते ही फोन पर हुई बातचीत के दौरान फिर से हाथ मिलाने का प्रस्ताव दहल के सामने रखा था। सोमवार को यूएमएल के उपाध्यक्ष विष्णु पौडेल ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि चूंकि किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है, इसलिए यूएमएल नई सरकार बनाने की पहल करेगी। उन्होंने कहा- ‘हम जनादेश का सम्मान करते हैं। अगर यूएमएल ने पहल नहीं की, तो देश आगे नहीं बढ़ सकता और ना ही विकास कार्यों में गति आ सकती है।’

प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्षन शेर बहादुर देउबा को भी चल रही ऐसी सुगबुगाहटों का अंदाजा है। इसीलिए उन्होंने बीते शुक्रवार को बातचीत के लिए दहल को अपने निवास पर बुलाया था। इसके जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि सत्ताधारी गठबंधन को कोई खतरा नहीं है। उसके बावजूद राजनीतिक हलकों में कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच नया समीकरण बनने की अटकलों पर विराम नहीं लगा है।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन में अभी इन सवालों पर सहमति बननी बाकी है कि क्या देउबा और दहल पांच साल के कार्यकाल में बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनेंगे, किस पार्टी को कितने मंत्री पद मिलेंगे और राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, स्पीकर आदि जैसे पदों का बंटवारा कैसे होगा। यूएमएल को उम्मीद है कि इन मुद्दों पर सत्ताधारी गठबंधन में सहमति नहीं बन सकेगी।

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यूएमएल के उपाध्यक्ष सुभाष नामबान्ग ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘अभी सारी संभावनाएं खुली हुई हैं। इसलिए हम यूएमएल और माओइस्ट सेंटर के हाथ मिलाने की संभावना से इनकार नहीं कर सकते। लेकिन अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि अभी पूरे चुनाव नतीजे सामने नहीं आए हैं।’

नेपाल की संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 165 सीटों में से 47 पर माओइस्ट सेंटर ने चुनाव लड़ा था। इनमें से वह 17 सीट जीत पाई है। अब पार्टी के अंदर यह ध्यान दिलाया जा रहा है कि 2017 में यूएमएल से गठबंधन कर चुनाव लड़ने पर पार्टी 37 सीटों पर जीत गई थी। पार्टी की सेंट्रल कमेटी के एक सदस्य ने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘माओइस्ट सेंटर के नेतृत्व पर अपनी दिशा सुधारने के लिए गहरा दबाव है। पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ रहा है।’ पार्टी के कई नेताओं ने राय जताई है कि अगर माओइस्ट सेंटर सत्ताधारी गठबंधन में शामिल ना रहती, तो अधिक सीटें जीत सकती थी।

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