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Pakistan-Turkey: पाकिस्तान में और बढ़ेगी तुर्किये की पैठ, रणनीतिक नतीजों पर टिकी निगाहें

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 26 Nov 2022 04:08 PM IST
सार

Pakistan-Turkey: शहबाज शरीफ की यात्रा के दौरान तुर्किये और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने की हुई चर्चा ने सामरिक विशेषज्ञों का ध्यान खास तौर पर खींचा है। शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को यहां दोनों देशों के रक्षा विशेषज्ञों से अपील की वे हथियार उत्पादन में सहयोग बढ़ाने की खास योजना बनाएं...

shahbaz sharif turkey visit
shahbaz sharif turkey visit - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

तुर्किये की पाकिस्तान में बढ़ती पैठ से दक्षिण एशिया में नए समीकरण उभर सकते हैं। कूटनीति विशेषज्ञों के मुताबिक यह समीकरण भारत, अफगानिस्तान, और ईरान जैसे देशों के लिए गहरी दिलचस्पी का विषय है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तुर्किये यात्रा से न सिर्फ इन दोनों देशों के रिश्ते और प्रगाढ़ होने के संकेत मिले हैं, बल्कि दोनों देशों ने अपने समीकरण में चीन और अजरबैजान को भी साथ लेने के साफ संकेत दिए हैं।

बीते कुछ समय से ये चर्चा रही है कि पाकिस्तान तुर्किये को चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का हिस्सा बनाना चाहता है। सीपीईसी चीन की महत्त्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा है। शहबाज शरीफ ने अपनी ताजा तुर्किये यात्रा के दौरान तुर्किये के राष्ट्रपति रजिब तैयिब एर्दोआन को सीपीईसी में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया। इस मौके पर उन्होंने कहा- ‘चीन और पाकिस्तान गहरे दोस्त हैं। हम सीपीईसी और बीआरआई के फायदे उठा रहे हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और मेरा सुझाव है कि इस सहयोग में तुर्किये भी शामिल हो जाए।’

इसके पहले पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर असद कैसर ने इस्लामाबाद स्थित तुर्किये के राजदूत इहसान मुस्तफा यर्दाकुल से भेंट कर उन्हें सीपीईसी के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि तुर्किये के इस परियोजना में शामिल होने का लाभ दोनों देशों को मिलेगा।

विश्लेषकों के मुताबिक 2014 से चल रही 64 बिलियन डॉलर की परियोजना- सीपीईसी में तुर्किये के शामिल होने का चीन स्वागत करेगा। उससे उसे पाकिस्तान होते हुए पश्चिम एशिया और अफ्रीका तक सड़क, रेल और समुद्री मार्ग से आयात-निर्यात करने का आसान रास्ता मिलेगा। इसके अलावा इस परियोजना में गैस पाइपलाइन के निर्माण को भी शामिल किया जा सकता है।

यहां शहबाज शरीफ से बातचीत के दौरान एर्दोआन ने तुर्किये और अजरबैजान के बीच जारी ‘सहयोग’ में पाकिस्तान को भी शामिल करने की इच्छा जताई। अजरबैजान प्राकृतिक गैस समृद्ध देश है। अरजबैजान और अर्मीनिया के पिछले युद्ध में तुर्किये और पाकिस्तान ने मुस्लिम बहुल अजरबैजान को सैनिक सहायता मुहैया कराई थी। अब तीनों देशों को आर्थिक सहयोग के करार में शामिल करने की कोशिश हो रही है।

शहबाज शरीफ की यात्रा के दौरान तुर्किये और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने की हुई चर्चा ने सामरिक विशेषज्ञों का ध्यान खास तौर पर खींचा है। शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को यहां दोनों देशों के रक्षा विशेषज्ञों से अपील की वे हथियार उत्पादन में सहयोग बढ़ाने की खास योजना बनाएं।

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यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से तुर्किये ने अपनी खास अंतरराष्ट्रीय भूमिका बनाने की कोशिश की है। रूस और यूक्रेन से अनाज निर्यात का समझौता कराने में एर्दोआन ने खास रोल निभाया। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उन्होंने निकट संपर्क बनाए रखा है। उधर नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (नाटो) के विस्तार की योजना में उन्होंने रुकावट डाल रखी है। इससे पश्चिमी देश तुर्किये से नाराज हैं। इसी बीच पाकिस्तान की तुर्किये और चीन के बीच कड़ी बनने की कोशिश सामने आई है। इसीलिए सामरिक विशेषज्ञ इसे एक महत्त्वपूर्ण घटना बता रहे हैं।

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